शांगरी-ला संवाद: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते कद का गवाह

शांगरी-ला संवाद या शांगरी-ला वार्ता (Shangri-la dialogue) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के और खासकर एशिया क्षेत्र के लिहाज से काफी अहम है| इस वार्ता से जो बातें निकल कर आती है, उसका इस क्षेत्र की विदेश नीति में सुरक्षा और रक्षा के लिहाज़ से वर्ष 2002 के बाद से काफी महत्व रहा है| हम इस पोस्ट में इनके बारे में विस्तार पूर्वक बात करेंगें| हम यह देखेंगें की शांगरी-ला संवाद क्या है? यह वार्ता कब से जारी है? इसे कौन आयोजित करता है? इसमें कौन-कौन से देश भाग लेते है? शांगरिला डायलॉग का आज के समय में महत्व क्या है? यह कैसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते हुए कद का गवाह है? हम इसी वर्ष 2018 में हुए शांगरी-ला संवाद 2018 की भी चर्चा करेंगें| Shangri-la dialogue in hindi.

शांगरी-ला संवाद या शांगरी-ला वार्ता (Shangri-la dialogue)

यदि आप शांगरी-ला संवाद या शांगरी-ला वार्ता या शांगरिला डायलॉग या शांग्रिला संवाद की पूरी जानकारी हिंदी में पाना चाहते है तो ‘शांगरी-ला संवाद: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते कद का गवाह’ आर्टिकल आपके लिए ही लिखा गया है| Shangri-la dialogue in hindi. आइये आर्टिकल की शुरुआत करते है|

शांगरी-ला संवाद – शांगरी-ला वार्ता – Shangri-la dialogue in hindi.

शांगरी-ला संवाद क्या है?


शांगरी-ला वार्ता क्या है? या Shangri-la dialogue kya hai in hindi. SLD in hindi.

यह एक ‘ट्रैक वन’ अंतर-सरकारी सुरक्षा मंच है| इसे सालाना (yearly) आयोजित किया जाता है|

1. यह वार्ता कब से जारी है?

इस वार्ता को सर्वप्रथम 2002 में आयोजित किया गया| 2002 के बाद से प्रत्येक वर्ष इसका आयोजन होता आ रहा है|

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2. इसे कौन और कहां आयोजित करता है?

इस वार्ता को एक स्वतंत्र थिंक टैंक या शोध संस्थान द्वारा आयोजित किया जाता है| इस स्वतंत्र थिंक टैंक का नाम IISS-International Institute for Strategic Studies है| क्या आपको पता है की IISS थिंक टैंक ब्रिटेन की शोध संस्थान है| इसे ग्लोबल थिंक टैंक सूचकांक-2017 में दसवां स्थान दिया गया तथा रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा थिंक टैंक के लिए दूसरा स्थान दिया गया|

IISS थिंक टैंक द्वारा शांगरी-ला संवाद को सिंगापूर के शांगरी-ला होटल में आयोजित किया जाता है| मजेदार बात यह है की इसी होटल के नाम पर इस वार्ता का नाम भी रखा गया| यानी की शांगरी-ला होटल के नाम पर ही इस वार्ता को Shangri-la dialogue नाम दिया गया|

3. इसमें कौन-कौन से देश भाग लेते है?

इस वार्ता में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न देशों के रक्षामंत्री, मंत्रालयों के स्थायी कार्यपालिका और सैन्य प्रमुख भाग लेते है| इस तरह इसमें लगभग 28 देश शिरकत करते है|

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शांगरी-ला संवाद 2017


वर्ष 2017 में शांगरिला डायलॉग को 4 जून को आयोजित किया गया| यह 16 वीं शांगरिला डायलॉग थी| इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के काफी देशों ने भाग लिया परन्तु भारत की ओर से इस वार्ता में शिरकत नहीं की गई| शांगरी-ला संवाद 2017 में मुख्य तौर पर कहा गया की चीन की रास्ता रोकने की प्रवृति से भारत नाखुस है|

जहां एक ओर वर्ष 2017 के शांगरिला डायलॉग में भारत की ओर से मंच भी साझा नहीं किया गया वहीं दूसरी ओर वर्ष 2018 के शांगरी-ला संवाद में स्वयं भारतीय प्रधानमंत्री का जाना यह साबित करता है की भारत के लिए इस मंच का महत्व बढ़ा है साथ ही इस क्षेत्र के देश हर हाल में भारत को लेकर चलना चाहते है|

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शांगरी-ला संवाद 2018


शांगरी-ला संवाद 2018 का आयोजन 1 से 3 जून तक के लिए सिंगापूर के शांगरी-ला होटल में किया गया| वर्ष 2002 से प्रारम्भ हुए इस सालाना वार्ता के पूर्व में 16 वार्ता हो चुकी थी और शांगरी-ला वार्ता 2018 के रूप में यह 17 वीं वार्ता थी|  इसमें लगभग 17 देशों के रक्षामंत्री और 40 से अधिक देशों के उच्चस्तरीय सैन्य अफसर के अलावा 600 से अधिक बुद्धिमान लोगों ने भाग लिया|

शांगरी-ला संवाद 2018

शांगरी-ला संवाद 2018 में भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं भारत की तरफ से उपस्थिति जताई| उन्होंने अपने संबोधन में कहा की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर निर्भर करेगा की एशिया का भविष्य क्या होगा| उन्होंने ने यह भी कहा की इस क्षेत्र के देश किसी एक देश पर निर्भर नहीं रह सकते| उन्होंने चीन का जिक्र किये बिना साफ़ किया की अंतर्राष्ट्रीय नियमों एवं रायों का सभी देश को सम्मान करना चाहिए|
      उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत का संबंध सभी महाशक्तियों से, क्षेत्र की बड़ी और छोटी शक्तियों और सभी देशो के साथ बहुत अच्छे है| हम आशियान के साथ चलेंगें और आशियान को ही इस क्षेत्र में शांति और समृद्धि की धुरी मानेंगें|
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 शांगरिला डायलॉग कैसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते हुए कद का गवाह है?


यह मंच काफी समय से भारत की प्रतीक्षा कर रहा था| चीन का इस क्षेत्र में प्रभाव काफी आक्रामक रहा है, इससे सभी देश विशेषकर आसियान के देश में भय का माहौल रहा है| ऐसे में आसियान के देश चाहते है की भारत इस क्षेत्र में और खासकर शांगरी-ला वार्ता जैसे मंच के माध्यम से शिरकत करें| इससे चीन का काउंटर हो सकेगा तथा छोटे देशों को कुछ राहत मिलेगी|
       इंडो पैसिफिक क्षेत्र में भारत और अमेरिका ही वैसे बड़े राष्ट्र है जो चीन के बढ़ते प्रभाव को चेक कर सकते है| ऐसा करना बाकी के छोटे देशो के लिए संभव नहीं है| आसियान की बात की जाए तो उसके अंदर भी फूट है| लाओस, कम्बोडिया आदि देश चीन की तरफ ज्यादा झुक रहे है| ऐसे में आसियान जो आपसी सहमती से काम करता है थोड़ा ठंडा पड़ गया है और उसके लिए चीन को रोक पाना संभव न हो पा रहा है| इस स्थिति में भारत का महत्व इस क्षेत्र में बढ़ा है|
     इस वार्ता से एक दिन पूर्व अमेरिका के रक्षा मंत्री Jim Mattis ने अमेरिका के पैसिफिक कमान का नाम बदलकर इंडो पैसिफिक
कमान कर दिया है| यह भी इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते महत्व को बताता है|
भारतीय प्रधानमंत्री श्री मोदी के शांगरी-ला संवाद 2018 में संबोधन के मुख्य संकेत
  1. यह सशक्त सन्देश दिया गया की भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक बहुत सक्षम भूमिका खेलने के लिए तैयार है|
  2. उन्होंने यह भी संकेत दिया की भारत की भूमिका सकारात्मक होगी| उन्होंने कहा की आपसी मनमुटाव को सुलझाते हुए शांति के रास्ते पर बढ़ना होगा|
  3. शांति और समृद्धि की बात सिर्फ अपने लिए ही करने से काम नहीं चलेगा, सभी देशों को अंतर्राष्ट्रीय नियम-कानून और राय के हिसाब से चलना होगा|
  4. उन्होंने बिना चीन का जिक्र किये कहा की सिर्फ एक देश का ही नहीं चलेगा| कोई देश किसी इलाके को अपना नहीं समझ सकता| वह यह नहीं समझ सकता की उस क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ उसकी है| सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी एक देश की नहीं बल्कि सामूहिक है| उन्होंने कहा की हम बात कर रहे है कॉपरेटिव सिक्योरिटी की|

शांगरिला डायलॉग भारत के इस क्षेत्र में बढ़ते महत्व को प्रदर्शित करता है| परन्तु भारत को अपेक्षाओं पर खड़ा उतरना होगा| उसे सिर्फ वादे नही बल्कि कार्य को अमली जामा भी पहनाना होगा तभी आसियान के छोटे-छोटे देश भारत पर पूरा विश्वास कर सकेंगें और भारत को इस क्षेत्र में चीन की अपेक्षा बढ़त प्राप्त हो सकेगी| भारत के अंदर इस कार्य के लिए काफी क्षमता भी विद्यमान है अब देखना है की भारत इस क्षेत्र का कितना बड़ा खिलाड़ी बन पाता है|

प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल ‘शांगरी-ला संवाद: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते कद का गवाह’ को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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