प्राणायाम हेतु सावधानियां

प्राणायाम की महत्ता को भला कौन नकार सकता है| आज से ही नही अनादी काल से ही प्राणायाम की महत्ता स्वीकार की जाती रही है| जीवन में सफल होने की चाह रखने वालो के लिए प्राणायाम सफलता की द्वार है| निरोग तथा दीर्घायु रहने की कल्पना करने वालों के लिए भी योग और प्राणायाम संजीवनी है| परन्तु उचित पथ प्रदर्शक के बिना योग-प्राणायामों को करना वांछित परिणाम नही दे पाता है| उल्टे गलत विधि से प्राणायाम करने पर हानि ही की सम्भावना रहती है| इसी सन्दर्भ में हम इस पोस्ट में योग-प्राणायाम के कुछ महत्वपूर्ण सावधानियों पर चर्चा करेंगे| प्राणायाम करने के लिए इन आवश्यक बातों का पालन करना अति आवश्यक है, तभी प्राणायाम का उचित लाभ प्राप्त किया जा सकता है| प्राणायाम हेतु सावधानियों की विस्तृत जानकारी श्री राम शर्मा द्वारा लिखी यम नियम पुस्तक से प्राप्त की जा सकती है|
प्राणायाम हेतु सावधानियां

प्राणायाम हेतु सावधानियां


योग-प्राणायाम करने के लिए आवश्यक बातें इस प्रकार है-
  • स्वच्छता एवं खुला वातावरण
    • प्राणायाम के लिए स्वच्छ स्थान तथा शुद्ध वायु का होना आवश्यक है|
    • जल के समीप बैठकर प्राणायाम करना अधिक लाभदायक है|
    • पूर्व दिशा में मुंह करके बैठना चाहिए|
    • नगरीय वातावरण में जहाँ वायु प्रदूषित होती है, वहां गोघृत अथवा गुग्गुलु जलाकर स्थान को सुगन्धित कर लेना चाहिए|
    • बहुत से लोग उपयुक्त स्थान के आभाव के कारण तंग जगहों में योग प्राणायाम करते है,और उसी में अगरबत्ती या धुप भी अधिक मात्रा में जला लेते है इस प्रवृति को कहीं से भी उचित नही कहा जा सकता इससे लाभ के बदले नुकसान की ज्यादा सम्भावना है| प्राणायाम की सही सही लाभ पाने के लिए शुद्ध वायु के साथ ही वायु की उचित मात्रा भी आवश्यक है|
  • उपयुक्त आसन
    • प्राणायाम के लिए ऐसे आसन में बैठना चाहिए जिसमें बार-बार मन न उचटे| इसके लिए सिद्धासन, वज्रासन, पद्मासन या सुखासन में बैठना उपयुक्त रहता है|
    • बैठने में प्रयुक्त होने वाला आसन विद्युत का कुचालक होना चाहिए| इसके लिए कम्बल या चटाई का प्रयोग उपयुक्त हो सकता है| बिना कुछ आसन बिछाए प्राणायाम करना सही नहीं है| ऐसा करने पर प्राणायाम का उचित लाभ प्राप्त होने में संदेह है| इसके पीछे का विज्ञान है की- जब कोई व्यक्ति प्राणायाम करता है तो वायु के घर्षण के कारण उसके शरीर में सजातीय विद्युत तरंगें उत्पन्न होती है| इसी सजातीय विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के कारण व्यक्ति लाभान्वित होता है| परन्तु जब कोई व्यक्ति बिना कोई आसन बिछाए प्राणायाम  करता है तो उसके शरीर में उत्पन्न होने वाला सजातीय विद्युत तरंग धरती द्वारा खींच ली जाती है और उसे प्राणायाम का उचित लाभ प्राप्त नहीं हो पाता है|  इस तरह कहा जा सकता है की प्राणायाम की उचित लाभ प्राप्ति के लिए कुचालक आसन का प्रयोग अनिवार्य है|
  • उपयुक्त समय
    • खाली पेट प्राणायाम करना ज्यादा लाभकारी होता है|
    • कपालभाती व बाह्य प्राणायाम को खाने के बाद नहीं करना चाहिए| इन्हें भोजन के कम से कम चार-पांच घंटे बाद ही करना चाहिए|
    • उज्जायी प्राणायाम को कभी भी किया जा सकता है|
    • उज्जायी, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, भ्रामरी और उदगीत प्राणायाम को सुबह शाम भी किया जा सकता है| इन्हें शाम को खाने के एक-दो घंटे के बाद भी कर सकते है|
    • जिन्हें अनिद्रा की शिकायत हो या जिन्हें रात में जल्दी नींद न आती हो, वे सोते समय अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम कर सकते है| इससे उन्हें शीघ्र नींद आ जाएगी|
  • उपयुक्त मनःस्थिति
    • प्राणायाम के समय मन शांत और प्रसन्नचित्त रखना चाहिए|
    • प्राणायाम के बाद शवासन करना उपयुक्त रहता है|
  • उपयुक्त शारीरिक स्थिति
    • प्राणायाम के समय रीढ़ की हड्डी, वक्ष, कमर, तथा गर्दन सीधी रखकर बैठना चाहिए|
  • उपयुक्त स्वास्थ्य स्थिति
    • महिलाओं को माहवारी या पीरियड के दौरान प्राणायाम नही करना चाहिए|
    • गर्भवती महिला को प्राणायाम नही करना चाहिए|
    • किसी भी तरह के ऑपरेशन होने पर 6 माह तक कपालभाती व बाह्य प्राणायाम नहीं करना चाहिए|
    • बहुत कब्ज होने पर बहुत ज्यादा व्यायाम और बहुत ज्यादा कपालभाती और दुसरे प्राणायाम नहीं करना चाहिए|
    • उच्च रक्तचाप या हृदय रोग में कपालभाती तेज गति से न करें| धीरे-धीरे करें|
    • जिस दिन तेज बुखार हो उस दिन तेज व्यायाम-प्राणायाम व आसन नहीं करना चाहिए| लेकिन अनुलोम-विलोम किया जा सकता है|
    • किसी रोग-विशेष की स्थिति में योगाचार्य के सानिध्य में ही योग करना चाहिए|
  • अधीरता का त्याग
    • जोर से योग-प्राणायाम न करें| इससे शरीर की संवेदनशील कोशिकाएं प्रभावित होती है| इसीलिए कोई भी प्राणायाम जोर देकर न करे| यहाँ यह समझने की जरूरत है की हठयोग जोर देना नहीं है| कुछ लोग जोर देकर योग-प्राणायाम करने को हठयोग मान बैठते है लेकिन हठयोग का निहितार्थ इससे बिलकुल अलग है|
    • किसी भी आसन-प्राणायाम-योग को जबरदस्ती तथा वेगपूर्वक नही करना चाहिए|
    • श्वास को रोकने और निकलने में हठ नही करना चाहिए| सामान्य रूप से धैर्य के साथ प्राणायाम करना चाहिए|
सही विधि से सही समय पर और श्रद्धापूर्वक किया गया योग-प्राणायाम शत-प्रतिशत फायदेमंद साबित होता है| किसी दिन प्राणायाम में नागा हो जाने से कोई हानि नहीं होती है| इसी तरह प्राणायाम को बंद कर देने से कोई अतिरिक्त हानि नही होती केवल आप उसके लाभ से वंचित रह जाते है|

प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल प्राणायाम हेतु सावधानियां एवं योग-प्राणायाम करने के लिए आवश्यक बातें को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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