पथरी

वर्तमान दौर में पथरी एक सामान्य बीमारी है| भारत में लगभग 1 मिलियन से अधिक केश हर साल इस बीमारी से जुड़ते है| इस बीमारी में जाँच का अहम रोल है| इसका इलाज़ प्रोफेसनल डॉक्टर से ही करवाना चाहिए जो की लैब और इमेज्निंग जाँच के बाद बेहतर आइडिया के अनुसार इलाज करते है| केस के स्थति के अनुसार पथरी क्योर होने में कुछ दिन से लेकर कुछ सप्ताह तक लग सकता है| हम इस पोस्ट में किडनी स्टोन से सम्बन्धित विभिन्न बाते करेंगे जैसे की पथरी क्या है? इसके होने के कारण क्या है? इसके लक्षण क्या है? इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है? इसमें क्या परहेज करना चाहिए| इसके आलावा हम पथरी या किडनी स्टोन के रोकथाम और इलाज़ पर भी विभिन्न बाते करेंगे| आइये चर्चा की शुरुआत करते है|

पथरी -किडनी स्टोन

पथरी या किडनी स्टोन क्या है


यह मिनिरल्स और सोडियम (नमक) से बनी एक जमाव है जो की ठोस रूप में होती है| सामान्य तौर पर भी ये बिना किसी परेशानी के मूत्र मार्ग से बाहर निकाल दी जाती है| लेकिन विभिन्न कारणों से जब यह बाहर नहीं निकल पाती है और यह सामान्य से अधिक बड़ी हो जाती है तो ये मूत्र मार्ग में अवरोध बन जाते है और तभी से परेशानी प्रारम्भ होती है| अनेक केस में तो पथरी का आकार गोल्फ के गेंद जितनी भी बड़ी पाई गई है| एक समय में शरीर में एक या अधिक पथरी भी पाई जा सकती है| सामान्य से अधिक बड़े पथरी लगभग 2-3 मिमी तक होते है|

पथरी को किडनी स्टोन भी कहा जाता है| इसे शरीर में लोकेशन के आधार पर सामान्य नाम भी दिया जा सकता है| जैसे किडनी के पथरी को Nephrolithiasis, मुत्रवाहिनी में पथरी को Ureterolithiasis तथा मूत्राशय के पथरी को Cystolithiasis कहते है|

पथरी का कारण


ऐसे विभिन्न कारक है जो किडनी स्टोन की सम्भावना को बढाते है| इनमें से कुछ मुख्य कारक निम्न है|
  • पानी कम पीना- अगर ज्यादातर रोगों के कारणों पर विचार किया जाए तो उनका सबसे प्रथम कारक पानी कम पीना ही निकलता है| पथरी भी इसका अपवाद नही है| पथरी होने का सबसे महत्वपूर्ण कारक द्रव्य पदार्थो को कम मात्रा में लेना है| यह माना गया है की कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी प्रतिदिन पीना निहायत जरूरी है| पानी कम मात्रा में पीने से पेसाब भी कम होती है| इससे मिनिरल्स और नमक द्वारा बनी पथरी छोटी रूप में पेसाब द्वारा नही निकल पाती है तथा बीमारी का कारण बनता है|
  • मोटापा
  • मूत्र में कैल्सियम की अधिक मात्रा का होना
  • आनुवंशिकता- परिवार में किसी को किडनी स्टोन होना या किसी को एक बार पथरी हो जाने से दूसरी बार होने के चांस बढ़ जाते है|
  • जलवायु का प्रभाव- गर्म जलवायु में रहना तथा कम द्रव्य पदार्थो को लेना इस बीमारी की सम्भावना को बढ़ाता है| इस दृष्टि से आवास की स्थिति भी किडनी स्टोन के कारक के रूप में आ जाता है | भारत के महराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान में इसके रोगियों की संख्या ज्यादा है|
  • आहार- देखा जाए तो यह कम प्रभावी कारक है| परन्तु यदि कोई व्यक्ति इस बीमारी का सॉफ्ट टारगेट है, यानि की इस रोग के प्रति सम्वेदनशील है तो उसे अपने खाद्य पदार्थो में ऐसे पदार्थो पर रोक लगाने की जरूरत है या अपनी संवेदनशीलता के आधार पर कम मात्रा में लेना चाहिए, जो किडनी स्टोन की सम्भावना को बढाती है| कुछ आहार जो इसकी सम्भावना को बढ़ाते है- पालक, चुकुन्दर, बादाम, बैगन, टमाटर, रेड मिट,उच्च प्रोटीन वाले पदार्थ, विभिन्न सुप्प्लिमेंट्स, डार्क चोकलेट, उच्च सोडियम युक्त पदार्थ|
  • कुछ पुरानी बीमारियाँ
  • कुछ दवाएं
  • अत्यधिक नमक का सेवन
  • बाइपास सर्जरी
  • प्रोटीन, कैल्सियम, विटामिन सी आदि की सप्लीमेंट्स

पथरी के लक्षण


विभिन्न रोगियों के अनुभव के आधार पर इसके कुछ लक्षणों को जाना जा सकता है| इनमें से कुछ प्रमुख लक्षण जो सर्वाधिक कॉमन है, निम्नलिखित है|
  • दर्द ( Pain) -यह किडनी स्टोन का सबसे सामान्य लक्षण कहा जा सकता है|
    • ज्यादातर केस में दर्द पीठ के तरफ या पेट के निचले हिस्से में होता है| कुछ केश में दर्द बाजु, गुप्तांग,जांघ के बीच भी फ़ैल जाता है|
    • दर्द अक्सर अचानक शुरू होता है तथा समय के साथ यह तेज हो जाता है|
    • पथरी के स्थिति एवं प्रकार के आधार पर दर्द अलग अलग होती है|
    • पेसाब करने के समय भी दर्द महसूस हो सकता है|
    • दर्द का उतार- चढाव भी हो सकता है या दर्द बंद भी हो सकता है|
    • दर्द आमतौर पर रात में या सुबह सुबह होता है|
  • मूत्र से सम्बन्धित लक्षण
    • मूत्र में असामान्य गंध
    • बार- बार पेसाब जाने की इच्छा
    • पेसाब के रंग में परिवर्तन
    • पेसाब में कठिनाई/ दर्द
    • मूत्र में धुंधलापन
    • मूत्र में खून का आना
  • उल्टी/ मितली
  • ठंड लगना
  • बुखार
  • सामान्य से अधिक पसीना आना

पथरी से रोकथाम या बचाव


कुछ ऐसे कारक है जिन्हें अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है| इनमे से कुछ कारक निम्नलिखित है|
  • पर्याप्त मात्रा में पानी तथा तरल पदार्थ लें| निम्बू पानी तथा संतरे का जूस भी किडनी स्टोन से बचने का आसान उपाय है|
  • सही आहार तथा खुराक- संतुलित तथा पोषक तत्व युक्त ठोस अनाज ग्रहण करे, भोजन में फाइबर को शामिल करे|
  • सप्लीमेंट्स के बदले खाद्य पदार्थो को वरीयता दे|
  • अत्यधिक नमक का सेवन न करे|
  • पथरी के प्रति सम्वेदनशील होने पर कुछ खाद्य पदार्थो को ना या कम लें| कुछ खाद्य पदार्थ जो की इस बीमारी की सम्भावना को बढ़ाते है- चुकन्दर, पालक, टमाटर, बैंगन, चाय, अधिकांश मेवा, डार्क चॉकलेट आदि|

यदि आप किडनी स्टोन की समस्या से पीड़ित है या फिर आनुवंशिक रूप से इसके प्रति संवेदनशील है तो आपको अपने आहार में उपर्युक्त पदार्थो के प्रति सतर्कता बरतने की आवश्यकता है और अगर ऐसा नही है तो आप इन पदार्थो को अधिक मात्रा में न ग्रहण करते हुए पर्याप्त मात्रा में ले सकते है| इसके आलावा निश्चित रूप से 2.5 से 3 लीटर पानी भी पीना चाहिए|

पथरी के प्रकार


ज्यादातर लोगो में 4 प्रकार के किडनी स्टोन की समस्या देखने को मिलती है|
  1. कैल्शियम पथरी – यह सर्वाधिक सामान्य पथरी है| अधिकतर पथरी रोगियों में यही देखने को मिलकर कैल्सियम अन्य पदार्थो (आक्सिलेट, फास्फेट, कार्बोनेट) के साथ मिलकर पथरी का निर्माण करता है|
  2. यूरिक अम्ल पथरी- मूत्र में अधिक एसिड की मात्रा होने से यूरिक अम्ल पथरी होती है|
  3. स्टुवाइट पथरी – मूत्र मार्ग में होने वाला संक्रमन इसके लिए जिम्मेवार है| यही कारण है की यह पुरुषों के अपेक्षा महिलाओं में अधिक होता है|
  4. सिस्टीन पथरी- यह रेयर है| यह मुख्यतः आनुवंशिक विकार से ग्रस्त रोगियों में ज्यादातर होता है|

पथरी का परीक्षण


पथरी का लक्षण महसूस होने पर या किसी तरह का शक होने पर डॉक्टर से तुरंत सम्पर्क करे| डॉक्टर इसके लिए जाँच करवाने की सलाह दे सकता है जो की एक उचित कदम है| जाँच के रिपोर्ट के आधार पर एक उचित इलाज की जा सकती है इस बिमारी का पूर्ण और सुरक्षित इलाज सम्भव है| इस बीमारी का का पता निम्न परीक्षण से लगाया जा सकता है|
  • रक्त परीक्षण
  • मूत्र परीक्षण
  • इमेजिंग परीक्षण
    • एक्स- रे
    • सिटी स्कैन
    • अल्ट्रासाउंड
  • एक झरनी के माध्यम से पेसाब कराकर लैब विश्लेषण

पथरी का इलाज़


जाँच के रिपोर्ट के आधार पर एक बेहतर रोडमैप के आधार पर किडनी स्टोन की इलाज किया जा सकता है| यह कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह में आसानी से क्योर किया जा सकता है|

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