आइए समझे राजनीति को

अलग अलग लोग राजनीति के बारे में अलग अलग राय रखते है| राजनेता एवं राजनितिक पदाधिकारी के अनुसार यह एक प्रकार की जनसेवा है वही कुछ लोग राजनीति को दांव पेंच मानते है| यहाँ तक की आम जिन्दगी में किसी की चालाकी अथवा धूर्तता को राजनीति का नाम दिया जाता है| कुछ  लोग तो यह भी कहते है की मैं कभी भी राजनीति में नही आऊंगा या मैं राजनीती से दूर रहता हूँ| क्या राजनीति गलत है, इससे अच्छे सभ्य लोगों को दूरी बनाए रखना चाहिए ? या अपनी जिन्दगी बेहतर बनाने के लिए इसमें भाग लेनी चाहिए?
आइए समझे राजनीति को
    राजनीति समाज का महत्वपूर्ण अविभाज्य अंग है| राजनितिक संगठन और सामूहिक निर्णय के  ढांचे के बगैर कोई भी समाज जिन्दा नहीं रह सकता| किसी समाज का अस्तित्व बरक़रार रहने के लिए यह आवश्यक है की उसके सभी सदस्यों के हितो का ध्यान रखा जाए| इस हेतु विभिन्न सामाजिक संस्था जैसे परिवार, समुदाय यहाँ तक की सरकारी निकाय को बनाया गया है| ये संस्था व्यवहार में एक-दूसरे के प्रति सामंजस्य उत्पन्न करते है तथा व्यक्ति-व्यक्ति सम्बन्ध में निरन्तरता को बढ़ावा देते हैं|
      सरकार कैसे बनती है और कैसे कार्य करती है, यह राजनीति में दर्शाने वाली महत्वपूर्ण बात है, लेकिन राजनीति  सरकार के कार्यकलाप तक ही सीमित नही होती|
    सरकार की गतिविधियाँ व्यक्ति के जीवन को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में प्रभावित करता है| एक कुशल और ईमानदार सरकार विकास कि संभावनाओ को उड़ान दे सकती है| वहीँ एक अकुशल और भ्रष्ट सरकारी तंत्र जीवन और सुरक्षा को भी संकट में डाल सकती है| जब सरकार की गतिविधियों का व्यक्ति के जीवन पर इतना असर है तो व्यक्ति को भी सरकार में दिलचस्पी लेना आवश्यक है| संस्थाए बनाना, अपनी मांग जुड़वाना, सरकार के निर्धारित लक्ष्यों को आकार देने के प्रयास करना यहाँ तक की सरकारी नीति से असहमत होने पर संवैधानिक रीती से विरोध दर्ज करवाना आदि सक्रिय कदम आवश्यक है| इसके अतिरिक्त भी प्रतिनिधियों की गतिविधियों पर वाद विवाद और विचार विमर्श, भ्रष्टाचार पर प्रश्न- उत्तर, आरक्षण न्यायसंगत है या नहीं? कोई पार्टी या नेता चुनाव क्यों जीतते है? अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार की वजह क्या है? बेहतर दुनिया कैसे हो ? आदि व्यावहारिक प्रश्नों पर विचार किया जाना आवश्यक है|
      राजनीति का जन्म इस तथ्य से होता है की हमारे और हमारे समाज के लिए क्या उचित है और क्या नहीं| समाज में विभिन्न लोग विभिन्न दशा एवं परिस्थिति में रहते है, चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक पहलुओं से सम्बन्धित हो, ऐसी दशा में इन प्रश्नों पर सभी लोगों की सोच भिन्न भिन्न होती है|
    जब जनता आपस में वार्ता करती है और उन सामूहिक गतिविधियों में भाग लेती है जो सामाजिक विकास को बढ़ावा देने और समान्य समस्याओं के समाधान में मदद करने के उद्देश्य से तैयार की गई होती है तब कहा जा सकता है की जनता राजनीति में सलंग्न है|
इस संसार में सभी प्राणियों में मानव सर्वाधिक अद्वितीय है| उसके पास सोचने की क्षमता एवं विवेक के साथ उसे गतिविधियों में व्यक्त करने की योग्यता है| उसके अंदर भावना को व्यक्त करने, अच्छे प्रतीत होने वाले विचारों को साझा करने एवं उस पर चर्चा करने की योग्यता है| राजनीति का जन्म इन बुनियादी तत्वों में छिपा है|राजनीतिक सिद्धांत कुछ बुनियादी प्रश्नों का विश्लेषण करता है| जैसे समाज को कैसे संगठित होना चाहिए ? हमें सरकार की जरूरत क्यों है ? सरकार का सर्वश्रेष्ठ रूप कौन सा है?

हमें राजनीति की समझ क्यों आवश्यक है? हम राजनीती में भाग क्यों ले?

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  • राजनीति में संलग्न होने का यह मतलब कदापि नहीं है की हम चुनाव लड़े| हम सभी लोग मत देने और अन्य मसलों के फैसलें में भाग लेने के लिए अधिकार सम्पन्न नागरिक है या बनने वाले है| इस दायित्व को निभाने के लिए राजनितिक विचारों और संस्थाओ की बुनियादी जानकारी हमारे लिए मददगार होती है|
  • राजनितिक रूप से सजग नागरिक रहने पर चुनाव लड़ने वाले नेतागण से लेकर राजनीति करने वाले लोग तक जनाभिमुख होते है| यानि ऐसा कहा जा सकता है की इससे राजनीती करने वालों पर पहरा होता है| इसका एक बेहतर उदाहरण है की कोई संगीतकार तभी बेहतर प्रदर्शन करता है जब उसे यह पता है की उस संगीत को सुनने वाले जानकार और कद्रदान है|
  • हमें राजनीति के बारे में इसलिए भी समझ रखनी आवश्यक है की यदि हम विचारशील और परिपक्व है, तो हम अपने साझा हितों को गढ़ने  और व्यक्त करने के लिए नये माध्यमों का प्रयोग कर सकते है|
  • राजनितिक सिद्धांत हमें राजनितिक चीजों के बारे में अपने विचारों और भावनाओं के परिक्षण के लिए प्रोत्साहित करता है|  व्यक्ति थोड़ी अधिक सतर्कता से देखने भर से अपने विचारों और भावनाओं में उदार हो जाता है|
     कुछ बड़ी बड़ी बातें जैसे आजादी, समानता और धर्मनिरपेक्षता के अलावा हमारे जीवन के कुछ पह्लुएं हमें प्रतिदिन प्रभावित करती है| उदाहरण के लिए परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल, अन्य केंद्र आदि पर हम प्रतिदिन भेदभाव का सामना करते है, हम दुसरे लोगों के प्रति या कुछ विशेष समुदाय के प्रति अपने मन में पहले से ही कुछ सोच बनाकर रखते है, हम कहीं किसी क्षेत्र में किसी के द्वारा सताए जाते है, या हमें न्याय मिलने में  देर होती है, इस तरह के स्थिति में हम बहुत अधिक विचलित हो जाते है|  अगर व्यक्ति अच्छी स्थिति में है तो हो सकता है की वह अपने सम्मान के लिए संघर्षरत किसी व्यक्ति के प्रति नकारात्मक सोच रखता हो| राजनितिक सिद्धांत इन राजनितिक पह्लुए के परिक्षण को सुलभ करता है|
      जब हम किसी मुद्दे पर वाद- विवाद करते है तो अपने पक्ष में तर्क भी देते है| राजनितिक सिद्धांत हमारे विचारों को परिष्कृत करता है और हम सार्वजनिक हित में सुविज्ञ तरीके से तर्क वितर्क करते है|

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