ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018, 29 मार्च 2018 से लागू

ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018, 29 मार्च 2018 से लागू कर दिया गया| हम इस पोस्ट में इससे सम्बन्धित तमाम बातों को जानेंगे जैसे ग्रेच्युटी क्या है तथा ग्रेच्युटी का लाभ कौन प्राप्त कर सकता है? ग्रेच्युटी अधिनियम 1972 में क्या प्रावधान है और इसमें संसोधन की अर्थात ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018 लाने की क्या जरूरत पड़ीआइये चर्चा प्रारंभ करते है|
ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018
ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018 लोकसभा में 15 मार्च 2018 को और राज्य सभा में 22 मार्च 2018 को पारित हुआ था| हम इसके बारे में आगे बात करेंगे लेकिन पहले ग्रेच्युटी को समझते है|

ग्रेच्युटी क्या है What is gratuity in hindi


किसी कम्पनी द्वारा अपने कर्मचारी के वेतन का एक हिस्सा भविष्य निधि और ग्रेच्युटी (उपदान) के रूप में काटा जाता है और यह राशि उस कर्मचारी को आमतौर पर रिटायर्मेंट के समय दिया जाता है| आमतौर पर पांच साल की लगातार सेवा के बाद किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का लाभ प्राप्त होता है| यानी की जो लोग बार बार नौकरी बदलते रहते है, वे इस लाभ से वंचित हो सकते है| ग्रेच्युटी का मुख्य उद्देश्य कामगारों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे यह सेवानिवृत्ति की वजह से हो या शारीरिक अपंगता या फिर शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग के काम करना बंद करने की वजह से हो।

ग्रेच्युटी अधिनियम 1972


ग्रेच्युटी का भुगतान अधिनियम, 1972 उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिसमें 10 या इससे अधिक कर्मी होते हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य कामगारों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है, चाहे यह सेवानिवृत्ति की वजह से हो या शारीरिक अपंगता या फिर शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग के काम करना बंद करने की वजह से हो। इस प्रकार ग्रेच्युटी का संशोधन अधिनियम, 1972 उद्योगों, कारखानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाली जनता की सामाजिक सुरक्षा के लिये एक महत्वपूर्ण कानून है।

ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत ग्रेच्युटी पर टैक्स छुट की सीमा बढ़ी- अब 20 लाख हुआ


ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी के भुगतान की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये थी।लेकिन सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों के मामले में इसे बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया था।
   इसलिये निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के लिये भी महंगाई और वेतन में वृद्धि को देखते हुये सरकार ने तय किया कि जो कर्मी ग्रेच्यटी का भुगतान कानून, 1972 के दायरे में हैं उनके लिये भी अधिकतम भुगतान की सीमा को परिवर्तित किया जाना चाहिये। इसलिये सरकार ने ग्रेच्युटी का भुगतान कानून, 1972 में संशोधन की प्रक्रिया आरंभ की ताकि अधिकतम सीमा को केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाया जा सके। और अब सरकार ने ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत 20 लाख रुपये की अधिकतम सीमा को अधिसूचित कर दिया है।
    इसके अलावा सरकार ने महिला कर्मियों के लिये ग्रेच्युटी के भुगतान के लिये निरंतर सेवा में रहने की परिभाषा को भी बदला है और अब इसे 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है।

ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 में संसोधन का मुख्य प्रभाव


ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018 को संसद के दोनों सदनों ने पारित किया, माननीय राष्ट्रपति ने इसे अपनी मंजूरी दी और सरकार ने इसे अधिसूचित कर दिया है। यह निजी क्षेत्र और सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उन कर्मियों के बीच समानता स्थापित करेगा जो कि सीसीएस (पेंशन) अधिनियम के दायरे के बाहर थे। ये कर्मचारी भी सरकारी क्षेत्र के अपने समकक्षों के समान ज्यादा ग्रेच्युटी के भुगतान के हकदार होंगे।


प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल ‘ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम 2018’ को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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