डरपोक और साहसी- एक हिंदी कहानी

रात अधिक हो रही थी| रेलगाड़ी रफ्तार पकड़ें भागी जा रही थी|  घड़ी की सुइयां भी ट्रेन जितनी रफ्तार में ना सही पर लगातार भागे जा रही थी| शायद ग्यारह या बारह बज रहे होंगे|  रेलगाड़ी की एक डब्बे में कुछ लड़के चुहलबाजी कर रहे थे| सभी यात्री आतंकित थे| छोकरे न खुद शांत थे और ना किसी को शांत रहने दे रहे थे| लगातार बदतमीजी भरी बातें, अभद्र टिप्पणियां, आपस में गाली गलोच किए जा रहे थे| उनकी बातों से लग रहा था कि वह कोई प्रतियोगी परीक्षा देकर अपने घर लौट रहे थे| लड़कों की संख्या यही कोई 8-10 की रही होगी इसीलिए कोई अन्य यात्री उनसे उलझना नहीं चाह रहे थे|
डरपोक और साहसी- एक हिंदी कहानी
      लड़कों की बदतमीजी घड़ी की सुइयों के साथ बढ़ती ही जा रही थी| ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो निशा की निशाचरी प्रभाव इन्हें अपनी गिरफ्त में लिये जा रहा है और इनकी आसुरी वृत्तियां बढ़ती ही जा रहीउनकी हरकतों को विछिप्तता का नाम दिया जाए तो कोई गलत नही होता|
      इसी बीच पच्चीस-छब्बीस साल की एक महिला यात्रीवाशरूम कीओर बढ़ी| लड़के वाकई बड़े अभागे थे| उन्होंने अभद्र टिप्पणियों की बरसात कर दी| इससे स्थिति बर्दाश्त के पड़े जान पड़ने लगी| तब साधारण दिख पड़ने वाला एक दुबले-पतले ने जाकर उन विछिप्त लड़कों से कुछ बाते की| न जाने क्या बात हुई लेकिन इसके बाद सारे लड़के पहले तो उत्तेजित हुए फिर हँसे लेकिन थोड़ी ही देर में बहुत हद तक शांत हो गए|
      दरअसल कुछ ऐसा हुआ कि उस लड़के ने उन विछिप्त लड़कों से कहा की आपके व्यवहार से सभी यात्री को कष्ट हो रही हैं लेकिन आपको कौन रोक सकता है? आप लोग समूह में है और बहुत शक्तिशाली हैं लेकिन आपका यह आचरण मुझसे नहीं देखा जा रहा है| आपकी गलती का मुझे विरोध जरुर करना चाहिए|  इसीलिए मैं आपलोगों को एक चैलेन्ज देता हूँ| चैलेंज यह है की आप में से सबसे मजबूत लड़का मुझसे अगले स्टेशन पर खुले में फाइट करे| अगर मै हार जाऊंगा तो मैं आप सबसे माफ़ी मांगूंगा लेकिन आप हार गये तो आप यात्रियों के साथ यह व्यवहार बंद कर देंगे| लेकिन यह फाइट रेलगाड़ी में नहीं बल्कि खुले में होगी ताकि यात्रियों को परेशानी न हो| इस चैलेन्ज के पूरा होने तक तक आप लोग उचित व्यवहार करे|
        उसकी चैलेन्ज सुनने पर कुछ लड़के बहुत क्रुद्ध हो गये और तत्काल मार-पीट पर उतारू हो गये लेकिन उन लड़कों के बॉस ने उस लड़के की चैलेन्ज को स्वीकार कर लिया| और बाकी लड़कों से शांत रहने को कहा|
      अब लड़कों की बदतमीजी पर कुछ लगाम लग चूका था| यात्री अब हल्का महसूस कर रहे थे|  जिस लड़के ने उन उपद्रवी लड़कों को चैलेन्ज किया था वह शांत था लेकिन उन लड़कों में बड़ी उथल-पुथल थी| वे आपस में खूब कानाफूसी कर रहे थे| कुछ उस लड़के को अपशब्द बोल रहे थे तो कुछ कह रहे थे की आगे के स्टेशन पर इसकी सारी हेरोपंती निकालनी है| कुछ लड़के यह भी कह रहे थे की गाड़ी रुकने पर इसे कोने में ले जाकर धुलाई करेंगे| लेकिन उपद्रवी लड़कों का बॉस सबको समझा कर शांत रखे था और वह कह रहा था की उसके चैलेन्ज के अनुसार ही उसकी पिटाई करनी है|
      लड़कों की बदचलन हरकतें अब भी जारी थी लेकिन पहले की अपेक्षा कम थी| यात्री अब आराम महसूस कर रहे थे तथा मन ही मन उस साधारण से दिखाई पड़ने वाले लड़के को धन्यवाद कर रहे थे| लेकिन जो यात्री इस लड़के द्वारा उपद्रवी लड़कों से की गई चैलेन्ज के बारे में जानते थे वह मन ही मन उस लड़के के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे थे|
डरपोक और साहसी- एक हिंदी कहानी
       खूब घनी अंधेरी रात थी| रेलगाड़ी रफ्तार पकड़ी सरपट दौड़ी चली जा रही थी| दूर-दूर इक्का-दुक्का रोशनी नजर आती और थोड़ी देर में छिप जाती थी|अब लगभग यात्री ऊँघने लगे थे|
      तभी लम्बी हौर्न के बाद धीरे-धीरे ट्रेन की रफ्तार कम होने लगी| शायद किसी ने वैक्यूम किया था|अभी ट्रेन पूरी तरह रुकी भी नहीं थी कि कुछ हथियार बंद लोगो ने ट्रेन में घुसते ही यात्रियों से मार-पीट और छीना-झपटी शुरू कर दिया| यात्रियों को कुछ देर तक तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है| जल्द ही सभी को यह समझ आ चुका था की ट्रेन एक कुख्यात लुटेरों की गिरोह द्वारा घेर लिया गया है और डाकुओं द्वारा यात्रियों को लुटने का क्रम जारी है|
       कुछ समय पहले उपद्रव मचाने वाले लड़के अब भीगी बिल्ली बने कोने में छुप रहे थे| इधर वह साधारण दुबला-पतला लड़का जिसने उपद्रवी लड़कों को चैलेन्ज किया था अब भी शांत बैठा था| तभी कुछ डाकओं ने उस लड़के से गर्मजोशी से मुलाकात की| जिससे यह पता चला कि वह लड़का डाकुओं के गिरोह का एक मुख्य सदस्य था| उपद्रवी लड़कों के बदमाशियों के अधिक बढ़ता जान पड़ने पर उसे यह डर सताने लगा था की कहीं कोई यात्री पुलिस की मदद ना ले ले| पुलिस के आने से डकैती का सारा प्लान मिटटी हो जाता| इसीलिए उसने हस्तक्षेप कर उन लड़कों को चैलेन्ज किया और लड़के उसकी जाल में फंसकर शांत रहे| और वह अपने मकसद में कामयाब रहा|
       भयंकर लूट-मार और छीना-झपटी के कारण यात्रियों मे भयानक चीख-पुकार मची थी| डाकू बच्चो-महिलाओं तक पर रहम नही दिखा रहे थे और सभी यात्रियों के साथ मार-पीट कर रहे थे| अचानक एक ओर से कुछ तेज आवाजें आई| आवाज उधर से ही आई थी जिधर वहीं महिला यात्री थी, जिसके वाशरूम जाने के समय लड़कों ने खूब अभद्र टिप्पणी की थी| 
       दरअसल वह महिला लड़को की बदमाशियों से ऊबकर कान में लीड लगाकर अपने ऊपर वाले बर्थ पर लेटी थी| तेज आवाज में गाना सुनने के कारण लुटेरों की गतिविधियों का इस महिला को पता नहीं चल पाया था| लेकिन लुटेरों के मार-पीट से इसे लुटेरो की भनक लगी और उसने संभलते हुए अपने नजदीक के एक लुटेरे का सर बहुत तेज से रेलगाड़ी की दीवार से ठुकरा दिया था और यह आवाज उसी की थी|
       वह महिला यात्री भारत सरकार की एक ट्रेंड कॉप थी| उसे सभी प्रकार के हथियार चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त था| वह मार्शल आर्ट में भी
निपुण थी| बिना हथियार के निहत्थे ही हथियार बंद दुश्मनों को धुल चटाना इसके लिए आम बात थी| इसने दर्जनों मुश्किल ऑपरेशनो को अंजाम दिया था और यह एक अन्य सीक्रेट ओपरेशन में ही जा रही थी| इसीलिए लड़कों की बदमाशियों के बाबजूद उसने उन्हें सबक सिखाना अच्छा न समझा था| उसने तय किया था की वह उन लड़कों को बाद में सबक सिखाएगी|
       महिला ने पलक झपकते ही आस-पास के डाकूओं का सफाया कर दिया| और बहुत जल्द सभी डाकूओं का उसने एक समान हाल कर दिया| लेकिन इस कार्य को भी उसने बहुत निपुणता से अंजाम दिया| सभी यात्रियों को ऐसा लगा की उन्होंने ही डाकूओं को सबक सिखाया है| वह सबसे पहले डाकूओं से उनके हथियार को छीन लेती और फिर उन्हें यात्रियों के हवाले कर देती| इससे उसके सीक्रेट मिशन पर कोई आंच नही आई| कल के अखबार में खबर थी- यात्रियों की बहादुरी से हथियार बंद डाकूओं पर आफत
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