10 क्यों वाला सवाल और विज्ञान का समाधान-1

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हम अपने दैनिक जीवन में कई तरह की घटनाओं को देखते है लेकिन उनके कारणों पर ध्यान नहीं देते है| हालाँकि घटनाएं सामान्य होती है लेकिन कभी-कभी जब कोई हमसे पुछता है की ऐसा क्यों हो रहा है तो हम इसका जबाब नहीं दे पाते| ज्यादातर छोटे बच्चों का सवाल होता है की ऐसा क्यों हो रहा है? तब हमें उस घटना का कारण खुद ही नही पता होता है| इसी संदर्भ में हम दैनिक जीवन की सामान्य घटनाओं को ’10 क्यों वाला सवाल और विज्ञान का समाधान’ में शेयर करेंगे| यह ’10 क्यों वाला सवाल और विज्ञान का समाधान’ की पहली यूनिट पोस्ट है| हम इसके अन्य यूनिट को भी जल्द ही आपके सामने लेकर आएँगे| आइये आज के पोस्ट ’10 क्यों वाला सवाल और विज्ञान का समाधान-1′ के प्रश्न-उत्तर का क्रम प्रारम्भ करें|

10 क्यों वाला सवाल और विज्ञान का समाधान-1

1. थरमस में रखा गया तरल पदार्थ अधिक समय तक ठंडा या गर्म क्यों बना रहता है?


थर्मस की बनावट के कारण ही थरमस में रखा गया तरल पदार्थ अधिक समय तक ठंडा या गर्म बना रहता है| दरअसल तरल पदार्थ के ठंडा या गर्म होने के लिए ताप का अंदर या बाहर होना आवश्यक है इसे ताप का संचरण कहते है| ताप का संचरण तीन प्रक्रियाओं द्वारा हो सकता है: चालन, संवहन और विकिरण|  थरमस फ्लास्क की बनावट ऐसी होती है की इन तीनों प्रक्रिया के द्वारा टेंपरेचर यानी की ताप का संचरण नही हो पाता है|
चालन क्रिया का अवरोध- फ्लास्क शीशे का बना होता है, जबकि सीसा ताप का कुचालक होता है| इससे थरमस के भीतर रखा गया तरल पदार्थ चालन क्रिया द्वारा गर्म नहीं हो पाता है |
संवहन क्रिया का अवरोध- फ्लास्क शीशे की दोहरी दीवार की बनी होती है जिसके भीतर से हवा निकाल दी जाती है, इसके कारण संवहन द्वारा भी थरमस में रखा गया लिक्विड गरम नहीं हो पाता है|
विकिरण क्रिया का अवरोध-  फ्लास्क की दीवार पर चांदी की पॉलिश की गई रहती है जिससे ताप के विकिरण का प्रभाव नहीं पड़ता है | इसके अलावा फ्लास्क का धातु पात्र रंग चढ़ाकर चमकीला कर दिया जाता है जो विकिरण क्रिया को रोकता है तथा लिक्विड गर्म नहीं हो पाता है |
     इस तरह थरमस में रखा गया तरल पदार्थ अधिक समय तक ठंडा या गर्म बना रहता है|

2. बंदूक से गोली चलाई जाने पर पीछे की ओर धक्का क्यों देती है?


जब कोई व्यक्ति बंदूक से गोली छोड़ने हेतु लोडेड बंदूक को ट्रिगर दबाता है तो बंदूक की नली से गोली पूरे संवेग के साथ आगे की ओर निकलती है| न्यूटन का तीसरे नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के समान और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया लगता है| इस नियम के अनुसार गोली जिस संवेग के साथ आगे की ओर निकलती है वही संवेग विपरीत दिशा में भी कार्य करता है| यही कारण है कि गोली चलाई जाने पर बंदूक पीछे की ओर धक्का देती है

3. कोई गेंद भूमि पर गिरने के बाद ऊपर की ओर क्यों उछलती है ?


कोई गेंद जब भूमि पर गिरती है गेंद के आकार में  विरूपता आ जाती है अर्थात गेंद पिचक जाता है जिसके कारण इलास्टिक फोर्स उत्पन्न होता है और गेंद का विरूपित भाग अपने पूर्व की अवस्था में आना चाहता है गेंद उस अवस्था में आने के लिए सतह पर दबाव डालकर ऊपर जाता है| न्यूटन के गति के तीसरे नियम हर क्रिया की समान और विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है के अनुसार भी गेंद के भूमि पर गिरने की प्रतिक्रिया समान और विपरीत दिशा में होती है इन कारणों से  गेंद  ऊपर की ओर उछल जाता है|

4. गर्मी में सुराही का जल शीतल क्यों रहता है?


सुराही में छोटे-छोटे रंध्र होते हैं जिनसे रिसकर जल सुराही के बाहरी सतह पर आता रहता है| शुष्क और गर्म हवा के कारण सुराही की सतह पर रिसकर आए जल का वाष्पीकरण होता रहता है | इस प्रक्रिया में सुराही के जल का ताप खत्म हो जाता है, अर्थात वाष्पीकरण में ताप खर्च हो जाता है जिसके कारण सुराही का जल शीतल हो जाता है |

5. ग्रीष्म ऋतु में सफेद कपड़े पहनना क्यों बेहतर रहता है ?


सफेद वस्त्र सूर्य की विकिरित उष्मा को अधिकांश अंश परावर्तित कर देता है जिससे सूर्य की गर्मी सफेद वस्त्र के भीतर बहुत कम प्रवेश कर पाती है| जबकि काला या गहरा रंग का वस्त्र विकसित उसमा का अवशोषण सफेद वस्त्र की अपेक्षा अधिक करता है | यह उल्लेखनीय है कि काला वस्त्र ऊष्मा का अच्छा संवाहक होता है |

6. दिन के प्रकाश में हरी पत्ती तो हरी दिखती है, लेकिन लाल प्रकाश में काली क्यों दिखाई देती है?


जब हम हरी पत्ती को  दिन के प्रकाश में देखते हैं तो यह हमें हरी दिखाई देती है जबकि जब इसे लाल प्रकाश में देखते हैं तो यह हरी के बदले काली दिखाई देती है| हम में से कई लोग यह देख कर आश्चर्य से भर जाते हैं और यह नहीं समझ पाते की ऐसा क्यों हुआ| चलिए हम जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है
      सूर्य का प्रकाश श्वेत प्रकाश हैयह सात रंगों से मिलकर बना होता है| जब सूर्य का श्वेत प्रकाश हरी पत्तियों पर पड़ता है तो पत्तियाँ द्वारा हरे रंग को छोड़कर अन्य 6 रंगों को अवशोषण कर लिया जाता है जबकि हरे रंग का परावर्तन कर दिया जाता है| इस परावर्तन के कारण ही हमें दिन के  प्रकाश में पत्ती का रंग हरा नजर आता है|
  वहीँ जब पत्ती को लाल प्रकाश में देखा जाता हैं यानी की जब पत्ती पर सिर्फ लाल प्रकाश पड़ता है तो पत्ती द्वारा लाल रंग का पूरा अवशोषण कर लिया जाता है और इसीलिए पत्ती हमें काली नजर आती है|

7. आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई पड़ता है?


सूर्य का प्रकाश श्वेत प्रकाश है और यह सात रंगों से मिलकर बना होता है| इन सात रंगों के तरंगदैर्घ्य अलग-अलग होते हैं| इनमें नीले रंग की तरंगदैर्घ्य सबसे कम होती है| जिस रंग का तरंगदैर्घ्य जितना कम होता है, उस का परावर्तन उतना ही अधिक होता है|
     जब प्रकाश की किरण हवा में तैरते धूल पर पड़ती है तब धूल प्रकाश की किरणों को परावर्तित कर देती है| नीले रंग की तरंगदैर्घ्य सबसे कम होने के कारण नीले रंग के प्रकाश किरण का परावर्तन सर्वाधिक होता है और यह पुरे आकाश में बिखर जाता है| यही कारण है कि आकाश का रंग नीला दिखाई देता है|

8. पंखा झलने पर शीतलता या ठंडक क्यों महसूस होती है?


यह सवाल पूछने पर लोग इसे पागलों सा सवाल कर कर टाल सकते हैं| लेकिन यह एक लॉजिकल और बेहतरीन सवाल है कि पंखा झलने पर शीतलता क्यों महसूस होती है| आइए हम इस प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने की कोशिश करें|
    इस प्रश्न का उत्तर एकदम सरल है| जब कोई व्यक्ति पंखा झलता है तो इससे शरीर और हवा का आपस में बार- बार स्पर्श होता है और यह प्रक्रिया बार बार होने के साथ ही तेज गति से भी होता है| इससे शरीर की त्वचा पर मौजूद नमी का  वाष्पीकरण होता हैवाष्पीकरण की क्रिया के दौरान शरीर की ताप कुछ स्तर तक खर्च हो जाता है और इसके कारण व्यक्ति शीतलता या ठंडक महसूस करता है|

9. एक भारी पत्थर हवा में उठाना मुश्किल है, जबकि यही पत्थर जल में उठाना आसान क्यों होता है?


आर्कीमिडीज के सिद्धांत के अनुसार किसी वस्तु को किसी लिक्विड में पूर्ण रूप से या आंशिक डुबाए जाने पर इसके भार में  प्रत्यक्ष कमी होती हैयह कमी वस्तु द्वारा विस्थापित लिक्विड के भार के बराबर होती हैयही कारण है कि जल में पत्थर के भार में कमी आ जाती है| जिससे पत्थर को आसानी से उठाया जा सकता है|

10. मोटे शीशे के बर्तन में गर्म तरल पदार्थ डाले जाने पर बर्तन टूट क्यों जाता है?


 मोटा शीशा ताप का कुचालक होता है| यानी की उससे होकर ताप का संचरण नहीं हो पाता है| जब एक मोटे शीशे के बर्तन में गर्म तरल पदार्थ डाला जाता है तो बर्तन के भीतरी भाग में तो ताप का प्रसार होता है परंतु शीशे के कुचालक होने के कारण बर्तन के बाहरी भाग में ताप का प्रसार नहीं हो पाता है और बर्तन के बाहरी दीवार पूर्व के अवस्था में बनी रहती है| इसीलिए शीशे का बर्तन अनियमित प्रसार के कारण टूट जाता है|


प्रिय विजिटर, आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी पोस्ट ’10 क्यों वाला सवाल और विज्ञान का समाधान-1′ को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य पोस्ट की तरह ही आप इस पोस्ट से भी लाभान्वित होंगे. धन्यवाद.
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