हमारा मौलिक अधिकार

हमारा मौलिक अधिकार हमारे लिए गर्व का विषय रहा है| किसी देश के नागरिकों को उनके संविधान द्वारा प्रदान किये गये अधिकारों की समझ होनी आवश्यक है| अधिकांश लोकतांत्रिक देशों की तरह भारत में भी मूल अधिकार के रूप में नागरिकों को व्यापक मूलभुत अधिकार दिए गये है| हमें गर्व है की हम ऐसे देश की नागरिक है जहाँ हमारा संविधान हमारे सम्पूर्ण चहुंमुखी विकास के लिए हमें कुछ मूल भुत अधिकार प्रदान करता है| हम इस पोस्ट में हम भारतीय संविधान में वर्णित मूल अधिकारों को जानेंगे| हम देखेंगे की हमारे संविधान में कौन-कौन से मूल अधिकार वर्णित है| इसके अलावा हम मूल अधिकार किसे कहते है की भी संक्षेप में चर्चा करेंगे| आइये चर्चा की शुरुआत करते है|
हमारा मौलिक अधिकार

मूल अधिकार क्या है


किसी भी व्यक्ति के केवल मुलभुत आवश्यकता को पूर्ति कर देने से उसका सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित नहीं हो सकता है| व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक है की उसे ऐसी परिस्थतियाँ प्रदान किया जाये जिसमें वह अपने व्यक्तित्व विकास की दिशा में निरंतर अविरल रूप में बढ़ता रहे| वह अपनी बौद्धिक और मानसिक क्षमता, विचार, विश्वास, आदि का उपयोग कर सके| इसके लिए आवश्यक है की व्यक्ति को कुछ गारंटीशुदा अधिकार प्रदान किये जाए| इसी परिपेक्ष्य में संविधान निर्माताओ द्वारा भारतीय नागरिकों को मूल अधिकार के रूप में भविष्य की एक सुलभ गारंटी प्रदान की गई है|
     राज्य नामक संस्था व्यक्ति के द्वारा ही बनाया गया है| समाज में एक व्यक्ति और दुसरे व्यक्ति के हितों के मध्य टकराव होना स्वाभाविक है| राज्य नामक संस्था इन टकरावों का उचित निपटारा करता है| इससे सभी व्यक्ति का हित सुनिश्चित होता है| परन्तु ऐसी भी परिस्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता, जब राज्य ही निरंकुश हो जाए| या फिर कोई अधिक सपन्न व्यक्ति अपने शक्ति के बल पर राज्य की शक्ति को अपने पक्ष में भुनाने लगे| इस स्थिति में राज्य द्वारा किसी व्यक्ति का अनुचित नुकसान हो सकता है|
     हम ऐसा कह सकते है की एक व्यक्ति का सुरक्षा कवज उसे ही नुकसान पहुंचा सकता है| इसके मद्देनजर कोई एक ऐसा सुरक्षा कवज होना चाहिए जो की व्यक्ति की रक्षा कर सकें|  इस सुरक्षा कवज को भी मूल अधिकार के रूप में देखा जा सकता है| इस तरह यह भी कहा जा सकता है की हमारा मौलिक अधिकार हमें राज्य के मनमाने रवैया के खिलाफ संरक्षण देता है|

भारतीय संविधान द्वारा प्रदान किया गया हमारा मौलिक अधिकार

भारतीय संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक में हमारा मौलिक अधिकार का वर्णन किया गया है| शुरू में भारतीय संविधान में 7 मूल अधिकार प्रदान किये गये थे, परंतु 44 वें संविधान संसोधन द्वारा सम्पति के अधिकार को मूल अधिकार के रूप में समाप्त कर दिया गया| भारतीय संविधान में प्रदान किया गया हमारा मौलिक अधिकार इस प्रकार है|
  • समानता का अधिकार- अनुच्छेद 14-18
    • अनुच्छेद 14- भारत में प्रत्येक व्यक्ति को काननु के समक्ष समानता एवं कानूनों का समान सरंक्षण प्राप्त होगा|
    • अनुच्छेद 15- किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग आदि के आधार पर सार्वजानिक स्थल पर भेदभाव नहीं किया जाएगा|
    • अनुच्छेद 16- राज्य के अधीन रोजगार में किसी व्यक्ति के साथ धर्म, मूल, वंश जाति लिंग जन्मस्थान, निवास या उत्पत्ति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा|
    • अनुच्छेद 17- अस्पृश्यता एक दंडनीय अपराध होगी
    • अनुच्छेद 18 – उपाधियों का अंत
  • स्वतंत्रता का अधिकार- अनुच्छेद 19-22
    • अनुच्छेद 19- इसके अंतर्गत 6 स्वतंत्रता प्रदान किये गये है|
      1. विचार एवं अभिव्यक्ति  की स्वतंत्रता|
      2. शांतिपूर्ण और शस्त्ररहित सम्मलेन की स्वतंत्रता|
      3. संगठन बनाने और सहकारी संस्थाएं बनाने की स्वतन्त्रता|
      4. भारत में कही भी आने जाने की स्वतंत्रता|
      5. भारत में कहीं भी निवास या बस जाने की स्वतंत्रता|
      6. कोई भी पेशा या व्यवसाय अपनाने की स्वतंत्रता|
    • अनुच्छेद 20- अपराधी ठहराए जाने पर संरक्षण|
    • अनुच्छेद 21- भारत में किसी भी व्यक्ति को विधि के द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना प्राण और दैहिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता|
    • अनुच्छेद 21 A- 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा दी जाएगी|
    • अनुच्छेद 22- मनमानी गिरफ्तारी और निवारक नजरबंदी में संरक्षण|
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार- अनुच्छेद 23-24
    • अनुच्छेद 23- मनुष्यों का दुर्व्यापार, बेगार, या बलात श्रम का निषेध|
    • अनुच्छेद 24- 14 वर्ष तक के उम्र के बच्चों को कारखाने, खान या खतरनाक रोजगार में नहीं लगाया जा सकता
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार- अनुच्छेद 25-28
    • अनुच्छेद 25- प्रत्येक व्यक्ति को अन्तः करण की स्वतंत्रता और किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता होगी|
    • अनुच्छेद 26- प्रत्येक धार्मिक समुदाय को धार्मिक मामलें में प्रबंध का अधिकार है|
    • अनुच्छेद 27 – कोई ऐसा टैक्स नहीं लगाया जाएगा, जिससे प्राप्त आय किसी धर्म विशेष के उन्नति के लिए व्यय की जाएगी|
    • अनुच्छेद 28- राज्य की शिक्षा संस्था में धार्मिक शिक्षा का निषेध|
  • शैक्षिक और सांस्कृतिक अधिकार- अनुच्छेद 29-30
    • अनुच्छेद 29- नागरिकों का सभी वर्ग जिनकी अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति हो को उसके संरक्षण का अधिकार होगा और इनके साथ शिक्षा संस्थाओं में भेद भाव नहीं किया जाएगा|
    • अनुच्छेद 30- सभी अल्पसंख्यक चाहे वह धार्मिक अल्पसंख्यक हो या भाषाई अल्पसंख्यक हो, उन्हें मनोनुकूल शिक्षा संस्था स्थापित करने का  अधिकार है| यदि अल्पसंख्यक शिक्षा संस्था की सम्पत्ति का अधिग्रहण किया जाता है तो बाजार दर पर मुआवजा दिया जाएगा|
    • अनुच्छेद 32 – अगर किसी व्यक्ति की मौलिक अधिकारों का उलंघन होता है तो वह व्यक्ति सीधे सुप्रीम कोट जा सकता है और न्यायालय पांच प्रकार के रिट जारी करके व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को लागू करता है|

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