खुश रहने के लाभ

यह एक सच्चाई है की खुश रहने के लाभ को मापा या शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता है| फिर भी हम इस आर्टिकल में खुश रहने के कुछ  लाभों को बताने की प्रयास करेंगे| प्रकृति ने एक ऐसी अलौकिक शक्ति का निर्माण किया है जिसके द्वारा संसार की समस्त भौतिक और अध्यात्मिक उपलब्धियों को सरलता से पाया जा सकता है| सबसे बड़ी बात तो यह है की यह सबके लिए समान और सरल रूप से उपलब्ध है| यानि की यह आसानी से सबको मिल सकती है है| प्रकृति की इस अलौकिक शक्ति का नाम है-प्रसन्नता.

खुश रहने के लाभ

जी हाँ, खुश रहना ही वह कुंजी है जिससे सफलता का हर ताला खोला जा सकता है| हम इस आर्टिकल में प्रसन्नता पर बातें करेंगे| हम देखेंगे की खुश रहने के लाभ क्या है? प्रसन्नता कैसे सफलता का अचूक मंत्र है? अगर हम खुश रहते है तो कैसे बड़ी से बड़ी झंझावत को झेल ले जाते है और वह हमारा बाल भी बांका नही कर पाता है| इस तरह खुश रहने के लाभ से संबंधित तमाम बातें हम इस पोस्ट में करेंगें| अगर आप यह जानना चाहते है की खुश कैसे रहा जा सकता है तो खुशियाँ पाने के 8 फार्मूला आर्टिकल पढ़ें|  Benefits of being happy in hindi.

खुश रहने के लाभ


खुश रहने के लाभ अनंत है जिसकी संक्षेप और सीमित चर्चा इस प्रकार है-

1. विक्षोभ (disturbance) का मजबूत कवच

प्रसन्नता और मानसिक संतुलन का सीधा सम्बन्ध है| मानसिक संतुलन प्रसन्नता के अधीन होती है, अगर कोई व्यक्ति प्रसन्न न रहता है तो असफलता का एक छोटा झटका भी उसे भयावह रूप से हिला डालता है| प्रकृति, समाज का , थोरा सा भी विक्षोभ (disturbance)उसे बहुत अधिक नुकसान पहुँचाता है| जबकि इसके विपरीत जिस व्यक्ति में प्रसन्न रहने का गुण है, वह बड़े से बड़े विक्षोभ को चाहे वो समाज द्वारा प्रद्दत हो या प्रकृति द्वारा उसे वह हँसते हँसते झेल जाता है|

इस समाज में जहाँ सबकुछ अंतर्संबंधित है, यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है की किसी भी प्रकार के विक्षोभ (disturbance) से सामना न हो| तब फिर हमारे पास एक विकल्प यह बचता है की हमें उससे निपटने के लिए, जूझने के लिए वह कवच चाहिए जिससे हमें वह विक्षोभ कष्ट न प्रदान करें और वह कवच, वह ढाल हमे प्रसन्नता प्रदान करती है| इस तरह विक्षोभ से रक्षा खुश करने के लाभ में मुख्य है|

2. लोकप्रियता और सफलता का बीज

हर व्यक्ति अपने आस-पास के वातावरण को सकारात्मक या नकारात्मक बनाए रखता है| यह व्यक्ति के अंदर की प्रसन्नता या निराशा के अनुरूप होता है| अन्य कोई व्यक्ति उसके सम्पर्क में जाता है तो वह भी उसमे भागीदार हो जाता है| आपने कई बार अनुभव किया होगा की कोई व्यक्ति जो हमेशा दुःख, निराशा, कष्ट का रोना रोता रहता है, आप उससे मिलने में संकोच करते हैं| अगर आप उसके सम्पर्क में आते है तो आप भी दुखी हो जाते हैं| आप जल्दी वहां से हटना चाहते है|

ऐसा इसीलिए है की क्योंकि उसने अपनी नकारात्मक सोच के कारण अपने चारो ओर नकारात्मक माहौल बना रखा है| इसके विपरीत कोई अन्य व्यक्ति, चाहे वह अभावग्रस्त ही क्यों न हो, अगर वह प्रसन्न रहता है तो आप उससे मिलना पसंद करते हैं| उससे मिलकर आपको ख़ुशी  महसूस होती है| उसके स्मरण से भी आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा एवं आशा का संचार होता है|

यदि आप कोई अच्छा कम नहीं कर सकते है तो कम से कम निराशा का माहौल न बनाए| इससे आपकी प्रगति तो अवरुद्ध होगी| लोग आपसे मिलने में संकोच करेंगे| आप संसार में अकेले रह जाएँगे| अगर कोई विशेष आत्मीयता वश आपसे मिलता भी है तो आपके सम्पर्क में आकर वो भी अपनी क्षमता और प्रगति को नष्ट कर बैठेगा| इसीलिए हमेशा प्रसन्न रहिये| इससे आप लोकप्रिय और सफल होंगे| लोकप्रियता और सफलता भी खुश रहने के लाभ में मुख्य है|

3. सफलता की संजीवनी

आप प्रसन्न रहने की आदत डालें| शुरुआत में झूठे ही सही पर दिल से खुश रहने की कोशिश करे|  आपको प्रसन्न रहने के सचमुच अवसर प्राप्त होगा| आपके सम्पर्क में आने वाले परिजन, मित्र, परिचित-अपरिचित सब पर इसका सकारात्मक प्रभाव होगा| आप सुबह सोकर उठे और महसूस करे की आप आज बहुत खुश हैं| सबको बताएं की आज आप बहुत खुश है|

थोरी देर में आपको सचमुच प्रसन्नता होने लगेगी| परिवार के लोग आपको सहयोगी नजर आएँगे| आपके सपर्क में आने वाले लोग भी आपको सहयोगी लगेंगे| ये प्रयास निरंतर रूप से करते रहने पर आप पाएँगे की आप धीरे धीरे प्रगति की ओर अग्रसर होते जा रहे है|

लेकिन इसके विपरीत कोई व्यक्ति यदि सुबह उठकर निराशा, दुःख अनुभव करे| परिवार के लोगो से कटु वचन बोले तो भले ही परिवार के लोग उससे डरकर कुछ नही बोलें पर उनके मन में भी एक निराशा का भाव उत्पन्न होगा| पूरा माहौल निराशा में बदल जाएगा| फिर वो निराशा चक्रित होकर उस व्यक्ति का ही सर्वनाश कर डालेगा| इस प्रकार प्रसन्नता एक महान औषधि है जिसे निसंदेह संजीवनी कहा जा सकता है| इस संजीवनी के द्वारा सफलता प्राप्त की जा सकती है और यह खुश रहने के लाभ है|

खुश रहने के लाभ

4. एक दैवीय गुण

हम अक्सर देखते है की कोई व्यक्ति न तो अधिक सुंदर है न ही स्वास्थ्य का धनी है परन्तु वह हमेशा प्रसन्न रहने के कारण बहुत आकर्षक जान पड़ता है| दरअसल वह सदैव प्रसन्न रहने के अपनी गुण के कारण अपने चारो ओर एक सकारात्मक दैवीय माहौल बना लिया है| इससे कोई भी व्यक्ति उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता है| यह गुण कोई भी व्यक्ति अपने अंदर धारण कर सकता है| इस तरह खुश रहने का अच्छी आदत दैवीय गुण साबित होता है और यह खुश रहने के लाभ है|

5. संसाधन अभाव से मुक्ति

याद रखें की दुनिया में कोई भी दुःख, कोई भी कष्ट एवं संसाधन विहीनता दुखी होने का कारण नहीं हो सकता| आप उसे एक बहाना बनाकर दुखी रहते भी हैं तो उससे आपका कल्याण नही हो सकता| वह बहाना आपको कष्ट ही पहुचाएगा| लेकिन अगर आप उसे तुच्छ मानकर प्रसन्न रहते हुए अपना पुरुषार्थ दिखाते है तो वह कष्ट आपसे थोरे ही दिनों में अपना नाता तोड़ कर रफूचक्कर हो जाएगा|

उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति के पास क्या कष्ट हो सकता है? उसे धन, विद्या, स्वास्थ्य, संशाधन आदी का अभाव हो सकता है| इसी अभाव में उसे दुखी रहने की आवश्यकता जान पड़ती होगी| लेकिन वह दुखी रहते हुए इस अभाव रूपी कष्ट से कभी भी मुक्ति नहीं पा सकता है| अगर वह प्रसन्नतापूर्वक चुनौती को स्वीकार करता है तो उसमे कठिनाई से लोहा लेने के सभी गुण सहज ही आ जाएगा| वह अपनी मेहनत के बलबूते उस अभाव से बाहर आ जाएगा| या फिर अपनी परिस्थिति के अनुरूप बेहतर सामंजस्य कर स्वयं लाभान्वित रहते हुए जीवन व्यतीत करता है |

यहाँ यह ध्यान देने की बात है की सामंजस्य पूर्वक लाभान्वित होने के शब्द को मैंने इस अर्थ में प्रयोग किया है की कोई दिव्यांग भले ही अपनी शारीरिक क्षति को पुर्णतः वापस न पा पाए परन्तु वह न केवल अपनी अभाव ग्रस्तता को दूर कर सकता है वरन समाज के लिए एक रोल मॉडल भी बन सकता है| ऐसे सैकड़ो उदाहरण दुनिया में भरे पड़े है|

       यहाँ एक बात की ओर मैं और ध्यान दिलाना चाहूँगा की कोई भी कष्ट या अभाव से बड़ी समस्या भी इस संसार में मिलती है| आप यह सोचकर की मेरा दुःख बहुत बड़ा है कभी भी दुखी न हो| अगर आप संसार की ओर देखेंगे तो इस संसार में भयंकर चुनौती धारण करने वाले व्यक्ति भी प्रसन्नता पूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहे है तो आप दुखी क्यों हैं? दुखी होकर आप अपने को शापित न करे| अपनी सफलता को दूर न करे| अपने पास उपलब्ध अवसरों को देखें| इस तरह खुश रहने से संसाधन आभाव से ही मुक्ति पाई जा सकती है और यह खुश रहने के लाभ में अनन्य है

आशा है की आप खुश रहने के लाभ से परिचित हुए होंगें| प्रसन्न रहना हमें हमारे लक्ष्य को तो प्राप्त कराता ही है यह हमारे जीवन को भी धन्य बनाता है| तो फिर चलिए आज से हम हमेशा खुश रहे और खुश रहने के लाभ से लाभान्वित रहें|

प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल ‘खुश रहने के लाभ’ को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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