भारत और थाईलैंड के थल सेना के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास मैत्री

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी भारत और थाईलैंड के थल सेना के बीच 6 अगस्त से 19 अगस्त 2018 तक 14 दिवसीय संयुक्त युद्धाभ्यास मैत्री संपन्न हुआ| इसे मिशन मैत्री 2018 नाम दिया गया|

संयुक्त युद्धाभ्यास मैत्री

संयुक्त युद्धाभ्यास मैत्री भारतीय सेना और थाईलैंड के शाही सेना के बीच होने वाला वार्षिक युद्धाभ्यास है जो प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है| इस संयुक्त अभ्यास में लगभग 50-50 सदस्यीय पलटन भाग लेती है| यह प्रत्येक वर्ष अल्टरनेट रूप से थाईलैंड और भारत में आयोजित किया जाता है|

वर्ष 2018 में, सम्पन्न होने वाला मिशन मैत्री 2018 थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्राविन्स में आयोजित हुआ था| यह संयुक्त अभ्यास 6 अगस्त 2018 को प्रारंभ हुआ था तथा 19 अगस्त 2018 को इसका सफलतापूर्वक समापन किया गया| इसमें भाग लेने हेतु भारत के 45 सदस्यीय पलटन थाईलैंड गए थे तथा थाईलैंड के शाही सेना के भी लगभग 50 सदस्य ने इस अभ्यास में भाग लिया|

इससे पूर्व वर्ष 2017 में, हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले के बकलोह नमक छावनी क्षेत्र में यह संयुक्त अभ्यास किया गया था| तब भी यह 14 दिन तक चला था| इस अभ्यास में शाही थाईलैंड आर्मी के और भारतीय सेना के लगभग 50-50 सदयों ने भाग लिया था| 2017 में होने वाले इस अभ्यास को मिशन मैत्री 2017 नाम दिया गया था| इसका उद्देश्य भी समान था|

इससे और पूर्व 2016 की बात करे तो, वर्ष 2016 में, थाईलैंड के कर्बी में इस तरह के 14 दिन की संयुक्त अभ्यास संपन्न हुआ था| इस तरह भारत और शाही थाईलैंड के थल सेना के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास मैत्री एक वार्षिक युद्धाभ्यास है जो प्रत्येक वर्ष अल्टरनेट रूप में एक दुसरे देश में होता है तथा दोनों देश के सैनिक इसमें भाग लेते है|

संयुक्त युद्धाभ्यास मैत्री का उद्देश्य एवं महत्व


  • दोनों देशो के बीच होने वाले इस संयुक्त अभ्यास से यह प्रदर्शित होता है की दोनों देश अपने हितो को एक दुसरे से साझा रूप में देखते है| यह दोनों देशो के संबंधों में प्रगाढ़ता लाएगा|
  • एक दुसरे की विशेषज्ञता एवं अनुभव का लाभ
  • दोनों सेनाओं के बीच सहयोग एवं मैत्री भावना में सुधार
  • दोनों देशो की थल सेनाओं के बीच भागीदारी का शसक्त होना
  • आतंकवाद एवं उग्रवाद निरोधक कार्यवाहियों का संयुक्त अभ्यास
  • शहरी, जंगली एवं ग्रामीण इलाकों में कार्यवाहियों का अभ्यास
  • योग्यता एवं तकनीक का आदान-प्रदान
  • आपात स्थिति से निपटने में दक्षता का साझाकरण इत्यादि|

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