राष्ट्रपति और राज्यपाल की क्षमादान शक्ति

भारत के राष्ट्रपति भारत के अधिकारिक प्रमुख होते है जबकि राज्यपाल राज्य के कार्यकारी प्रमुख होते है| हालाँकि संविधान में इन्हें नाममात्र का कार्यकारी प्रमुख बनाया गया है तथापि इनकी भूमिका को रबड़ की स्टाम्प की तरह नही बनाया गया है| इन्हें संविधान द्वारा कई परिस्थितियों में विभिन्न शक्तियां प्रदान की गई है| इन शक्तियों में क्षमादान की शक्ति को प्रमुख कहा जा सकता है| हम यहाँ इन्ही के बारे में चर्चा करेंगे| हम देखेंगे की राष्ट्रपति और राज्यपाल की क्षमादान शक्ति क्या है| इसका क्या महत्व है? यह कितना सही है? अर्थात हम राष्ट्रपति और राज्यपाल की क्षमादान शक्ति की आलोचनात्मक परिक्षण भी करेंगे| आइये चर्चा की शुरुआत करते है| राष्ट्रपति और राज्यपाल की क्षमादान शक्ति हिंदी में..

राष्ट्रपति और राज्यपाल की क्षमादान शक्ति

राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 में राष्ट्रपति के क्षमादान शक्ति प्राप्त होने के संबध में प्रावधान मिलते है| यह राष्ट्रपति को 5 प्रकार के क्षमादान से संबंधित शक्ति प्रदान करता है| जो की इस प्रकार है-

  1. क्षमा- PARDON- इसके अंतर्गत अपराधी को राष्ट्रपति सजा मुक्त कर सकता है|
  2. विराम- RESPITE- इसके अंतर्गत विशेष मानवीय परिस्थिति के आधार पर क्षमादान शक्ति का प्रयोग आता है जैसे विकलांगता, गर्भावस्था आदि के आधार पर|
  3. परिहार- REMISSION- इसके अंतर्गत दंड की मात्रा को कम करने की शक्ति होती है|
  4. लघुकरण- COMMUTATION- इसके अंतर्गत दंड के प्रकार को बदलकर हलके प्रकार का दंड देने की शक्ति आती है|
  5. निलम्बन- इसके अंतर्गत किसी दंड विशेषकर मृत्यदंड पर अस्थायी रोक लगाई जाती है ताकि दोषी व्यक्ति को क्षमायाचना का समय प्राप्त हो|

राज्यपाल की क्षमादान शक्ति


भारतीय संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को क्षमादान की शक्ति प्राप्त है| प्रमुख रूप से राज्यपाल को राज्य विधि के विरुद्ध सजा प्राप्त व्यक्ति के संबंध में क्षमादान शक्ति प्राप्त होती है| इस सम्बन्ध में उसे बहुत हद तक लघुकरण, विराम, परिहार या निलंबन से सम्बन्धित क्षमादान शक्ति प्राप्त होती है परन्तु मृत्युदंड के सम्बन्ध में राज्यपाल की क्षमादान शक्ति को अपवाद माना गया है|

राज्यपाल मृत्युदंड के संबंध में क्षमादान नही दे सकता है, चाहे वह राज्य विधि के विरुद्ध अपराध के लिए ही क्यों न दिया गया हो| इस संबंध में राज्यपाल की क्षमादान शक्ति राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति से सिमित होती है| हालाँकि राज्यपाल को मृत्यदंड के संबंध में निलम्बनकारी अर्थात अस्थायी रोक तथा न्यायपालिका को पुनर्विचार करने को कहने की  शक्ति प्राप्त होती है|

राज्यपाल की क्षमादान से सम्बन्धित शक्तियां दो अन्य रूपों में भी राष्ट्रपति से सिमित होती है| पहला- वह अपने राज्य क्षेत्र के बाहर अन्य राज्य क्षेत्र के सजा प्राप्त व्यक्ति के संबंध में शक्ति का प्रयोग नही कर सकता| दूसरा- वह कोर्ट मार्शल- सैन्य अदालत के तहत सजा प्राप्त व्यक्ति की सजा को माफ़ नही कर सकता|

आलोचनात्मक परिक्षण


क्षमादान शक्ति का सकारात्मक पक्ष

राष्ट्रपति को प्राप्त क्षमादान की शक्ति राष्ट्रपति पद और राष्ट्रपति के अधिकारिक प्रमुख होने की गरिमा का सम्मान करता है| व्यवहार में वह अपनी क्षमादान की शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है तथा अपराधी को मौखिक सुनवाई का अधिकार नही होता| यह प्रावधान राष्ट्रपति को व्यक्तिगत संकुचित निर्णय लेने से रोकता है| ऐसे में राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति अपने आप में व्यापक महत्व रखता है|

क्षमादान शक्ति का नकारात्मक पक्ष

राष्ट्रपति को प्राप्त क्षमादान की शक्ति का औचित्य ही नही है|  यह शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत के विरुद्ध है| अपराधी को सजा देने का कार्य न्यायपालिका को है और उसके द्वारा प्रदान किये गये सजा को रोक देना उचित नहीं है| इससे नयायपालिका की गरिमा का उलंघन होता है|

निष्कर्ष

राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति की जाँच करने के पश्चात यह किसी नकारात्मक मानसिकता का परिणाम नही प्रतीत होता है| अगर राष्ट्रपति पद पर बैठा कोई व्यक्ति इसका अनुचित प्रयोग करना भी चाहे तब भी वह ऐसा नही कर सकता है| क्योंकि संविधान में ऐसे प्रावधान है की प्रथमतः क्षमादान शक्ति का न्यायिक पुनर्विलोकन नही हो सकता लेकिन अगर राष्ट्रपति का निर्णय अतार्किक हो या भेदभाव पूर्ण या द्वेषमूलक हो तो इसका न्यायिक पुनर्विलोकन हो सकता है| यह प्रावधान अपने आप में यह सिद्ध करता है की राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति न्यायपालिका की गरिमा का उलंघन नही करता है|

हालिया दौर में दया याचिकाओं के निपटारे में अधिक विलम्ब हुआ है जिससे राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति अधिक विवादित हुई है| दया याचिकाओं के निपटारे में देरी से उत्पन्न हुई समस्या का निपटारा किया जाना आवश्यक है| 2014 में न्यायलय ने भी निर्णय दिया की दया याचिका का उचित विधि से एक निश्चित समय सीमा के भीतर निपटारा किया जाना कैदी का मूल अधिकार है| इसी सम्बन्ध में न्यायालय ने कहा की लम्बे समय से लम्बित मृत्यदंड से संबंधित दया याचिकाओं को आजीवन कारावास में बदलवाना कैदी का अधिकार है और राजीव गाँधी के हत्यारे की मृत्यदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया|

इन समस्याओं से बचने के लिए दया याचिका के निपटारे के लिए एक रोड मैप बनाये जाने चाहिए और उस पर कार्य करते हुए दया याचिकाओं का निपटारा किया जाना चाहिए| इसके बाद रष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति पर उठ रहे विवाद स्वतः नगण्य हो जाएँगे|

प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल राष्ट्रपति और राज्यपाल की क्षमादान शक्ति को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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2 Comments

  1. आज मेरे दिन की शुरुवात एक अच्छा आर्टिकल पढ कर हुई
    मुझे अच्छी knowledge मिली
    Keep writing sir
    आप अच्छी knowledge शेअर करते है

  2. आपका बहुत धन्यवाद मित्र..अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखें और aware my india पर विजिट करते रहें..

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