खुशियाँ पाने का 8 गूढ़ मंत्र

खुशियाँ कौन नही चाहता| हम सभी खुश रहना चाहता है| दुनिया में सारे इन्सान खुश रहना चाहता है| वह व्यक्ति जो दुखी है, वह भी ख़ुशी चाहता है, क्योकि कहीं न कहीं किसी इच्छा की पूर्ति न होने के कारण या अनुकूल परिस्थिति न मिल पाने के कारण ही वह ख़ुश नहीं है| दुनिया में सारे इंसान जाने या अनजाने खुशियों की तलाश में लगे है| हमने पिछले पोस्ट में चर्चा की थी खुशियाँ/प्रसन्नता सफलता की कुंजी है| हम इस पोस्ट में चर्चा करेंगे की आखिर खुश कैसे रहा जाएँ? खुश रहने के सरल उपाय क्या है? The Secret Mantra to Find Happiness.

खुशियाँ पाने का 8 गूढ़ मंत्र

खुशियाँ के बारे में शोधकर्ताओ का कहना है की इसका बाह्य सुख साधनों एवं परिस्थिति से अधिक लेना-देना नहीं है| उदाहरण के लिए कोई लड़का अमन यह सोचकर दुखी हो की उसके पास कार नहीं है| कल के समय में उसके पास कार हो जाने पर वो खुश हो जाएगा इस बात की बहुत कम सम्भावना है| क्योंकि इच्छाएँ हमेशा सापेक्षिक रूप से बढती जाएगी और वह दुखी ही रहेगा|

खुशियाँ महल और फुटपाथ पर भी निर्भर नही करती| न ही यह संसाधन तथा संसाधन विहिनता पर निर्भर करती है| यह अनुकूल और विपरीत परिस्थितियों पर भी निर्भर नहीं करती| मिसाल के तौर पर हो सकता है की कोई व्यक्ति मखमली गद्दे पर सोने के बाबजूद नींद न आने के कारण दुखी हो, इसी तरह यह भी हो सकता है की कोई व्यक्ति भूखे पेट के कारण फुटपाथ पर लेटा नींद न आने के कारण दुखी हो, इसके विपरीत कोई कर्तव्य निरत व्यक्ति अपने नाईट ड्यूटी पर हो और अपना काम इमानदारी के साथ करते हुए रात भर नींद से रसाकस्सी करते हुए मुस्तैदी से जगा हो और फिर भी वह खुश हो| आखिर खुशियाँ है क्या? आइये इसे समझते है|

खुशियाँ क्या है?


खुशियाँ मन की एक गहन (deep) अन्तः अवस्था है जो जीवन के अंतर्बाह्य (internal-external) पहलुओं के सम्यक निर्वाह के साथ सहज ही प्रस्फुटित होती है| कुछ ऐसे सूत्र है जिसे अपनाकर व्यक्ति खुशियाँ को मजबूर कर सकता है की वह स्वयं आकर व्यक्ति का आलिंगन कर लें| अब प्रश्न उठता है की वह सूत्र क्या है जो खुशियाँ को आने के लिए मजबूर कर दें? तो आइये अब खुशियाँ पाने का गूढ़ मंत्र को समझें|

खुशियाँ पाने का 8 गूढ़ मंत्र


खुशियाँ पाने का 8 गूढ़ मंत्र

1. अपने शरीर के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण:

यह शरीर भोग का साधन नही है| बल्कि प्रकृति द्वारा उच्च स्तरीय विकास यात्रा पर आगे बढ़ने के लिए मिला एक दुर्लभ उपकरण है| जीवन की चरम सम्भावना का बीज इसी के भीतर गुह्य केंद्र में पड़ा हुआ और वह दुनिया के सामने अभिव्यक्त होने के लिए छटपटा रहा है| इसीलिए शरीर पर समुचित ध्यान दिया जाना चाहिए| पौष्टिक आहार, सयंमित विहार एवं उचित श्रम- विश्राम के साथ इसे स्वस्थ, बलिष्ठ एवं निरोग रखना चाहिए|

तंदुरुस्त देह ही खुशियाँ का प्रथम आधार है| इसे जहरीले आहार, नशीले पदार्थो एवं भ्रष्ट आचरण से बर्बाद न करते हुए खुशियाँ को खुद-ब-खुद अपने पास बुलाया जा सकता है|

2. अपनी मौलिक विशेषताओ को खोजे व तराशें:

प्रत्येक व्यक्ति में कुछ ऐसी विशेषता होती है जो उसे दुसरों से अलग करती है, जिसे करने में उसके जीवन की साथर्कता झलकती है| अपने इस विशेषता को ढूंढे तथा उसे पोषित करने में, उसे सबल- सुदृढ़ बनाने में कोई कसर न छोड़ें| इसी के इर्द-गिर्द अपने जीवन लक्ष्य का निर्धारण करें| व्यवहारिक एवं छोटे कदमों के साथ इसे साकार करने की ओर बढ़े| हर सफल कदम की उपलब्धि आपके जीवन में खुशियाँ की एक बहार लेकर आएगी|

3. वर्तमान का सही इस्तेमाल करें:

अपने वर्तमान के क्षणों को पूरी तरह से जियें| जो कुछ अभी वर्तमान में है, उस पर पूरी तरह से ध्यान केन्द्रित करें| इस राह में जो कुछ भी आता है, उसे पूरी तरह स्वीकार करते हुए सामना करे| उससे अभीष्ट शिक्षण लेते हुए उसे विदा करें| भूतकाल की सुखद स्मृतियों व भविष्य की आशाओं को अपनी शक्ति बनाएँ, न की उनमें डूबते इतराते वर्तमान को नष्ट करें| न ही भूत के पश्चाताप और भविष्य की चिन्ताओ को वर्तमान की कर्मनिष्ठा में बाधक बनने दें|

यदि हम वर्तमान का सही इस्तेमाल करते है तो भुत के दाग स्वतः धुलते जाएँगे और भविष्य की चिंताओं का निराकरण होता जाएगा| और खुशियाँ की महक से वर्तमान जीवन सुवासित हो उठेगा|

4. दुसरों की ज्यादा परवाह न करे:

यदि आप अपने जीवन पथ पर सत्य और सदिच्छा के मार्ग पर अग्रसर है तो दूसरों के समर्थन, प्रशंसा आदि की ज्यादा आशा न करें| दूसरों की स्वीकृति या पुष्टि की आशा- अपेक्षा हमें अपनी खुशियों के लिए परावलम्बी बनाती है|

जब आप पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी मौलिक क्षमताओं के प्रकटीकरण के मार्ग पर अग्रसर है तो इसकी शक्ति सामर्थ्य सब आपके अंदर से ही प्रस्फुटित होनी है| ऐसे में दुसरों के सोचने या मानने से क्या बनने-बिगड़ने वाला है| अतः ऐसे में अंदर ईमान और उपर विधाता को लेकर एकाकी साहस के बल पर जीवन-पथ के राही बनें| खुशियाँ आपके चरण चूमने को मजबूर होगी|

5. दूसरों का सम्मान करें:

पिछले सूत्र का यह मतलब नही है की हम दुराग्रही बने| जहाँ दूसरों की अच्छाइयों- गुणों का सम्मान करना सीखे, वही उनके दोष- दुर्गुणों एवं मानवीय त्रुटियों के प्रति कटुता से बचें| इनके प्रति उदार एवं सहिष्णुता भरा दृष्टिकोण का विकास करे| किसी के प्रति निंदा, चुगली, दोषारोपण आदि के नकारात्मक व्यवहार से बचें| क्षमा एवं उदारता के साथ हुआ आत्मविस्तार, खुशियाँ में आश्चर्यजनक इजाफा करेगा|

6. बाधाओं के प्रति सोच बदलें:

अपने राह में बाधा और प्रतिक्रियाओं के क्षणों में भी आप ख़ुश रह सकते है| विवेकानन्द जी का कहना है की जिस दिन आपके सामनें कोई चुनौतियाँ और बाधा न आएं आप सतर्क हो जाएँ की वो सही रास्ता है या नहीं| सही कर्तव्य पथ पर बढ़ें| प्रतिक्रियाएं और बाधा स्वाभाविक है, उससे दुखी न हो| अगर आप सही पथ पर जा रहे है तो उस पर निष्ठा पूर्वक चलते रहे|

7. अंतर्ध्वनि का अनुसरण करें:

जीवन में क्या सही है क्या गलत ? इसके समाज एवं प्रचलन में अलग-अलग नियम हो सकते है| इसी तर्ज पर इन्हें करना उचित है या अनुचित, इसमें भी द्वन्द की स्थिति हो सकती है| किन्तु एक अचूक सूचक हमारा अंतर्मन है, जो इस समय हमारी सहायता कर सकता है| गलत राह पर पैर रखते ही लड़खड़ाने लगते है| यह ध्वनी इतनी स्पष्ट होती है की इसको नजरंदाज नहीं कर सकते है, किन्तु यह इतनी सूक्ष्म होती है की इसको आसानी से कुचलकर आगे बढ़ सकते है| इसे कुचलकर आगे बढ़ने की मनमानी ही खुशियाँ की तमाम संभावनाओं पर बिजली गिरा जाती है|

8. नियमित स्वाध्याय, ध्यान तथा योग करें:

खुशियों के अनंत स्त्रोतों से जुड़े रहने के लिए आवश्यक है, कुछ समय एकांत, स्वाध्याय, चिंतन मनन, योगा और ध्यान के लिए निकालें| यह कदम तनाव और चिंता से भी निपटने के लिए कारगर होगा|
इस तरह इन 8 गूढ़ सूत्रों को अपना कर आप अपने जीवन में खुशियाँ को आने के लिए मजबूर कर सकते है| आशा है की आप इन सूत्रों को अपनाएँगे और यही हमारे इस आर्टिकल की महत्ता है|

प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल ‘खुशियाँ पाने का 8 गूढ़ मंत्र’ को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|
यह भी पढ़ें-