नवीन लोक प्रशासन की समझ

अपना नारा ‘नैतिकता एवं सामाजिक उपयोगिता’ के साथ नवीन लोक प्रशासन या New public administration 70 के दशक में सामने आया| इसने प्रशासन के क्षेत्र में नवीन क्रांति को जन्म दिया| हम इस छोटे से पोस्ट में समझेंगें की नवीन लोक प्रशासन क्या है? इसके उदय के क्या कारण था? इसकी मुख्य विशेषताएँ क्या है? अगर आप इसके बारे में जानकारी चाहते है तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें| यह पोस्ट छोटा होते हुए भी अपने आप में व्यापक महत्व रखता है|

नवीन लोक प्रशासन की समझ

नवीन लोक प्रशासन

लोक प्रशासन एक विकासशील विषय है| इसमें सतत रूप से सिद्धांतों तथा प्रविधियों का विकास हो रहा है| लोक प्रशासन में 1960 के पश्चात कुछ अति महत्वपूर्ण नवीन विचारों का सूत्रपात हुआ| इन विचारों को नवीन लोक प्रशासन कहा जाता है|

1960 का दशक पश्चिमी देशों के लिए विशेषकर usa के लिए अनेक सामाजिक समस्याओं का काल था| लेकिन परम्परागत लोक प्रशासन के पास इन समस्याओं का कोई हल नहीं था| फलस्वरूप इस दशक के अंतिम वर्षों में (1968) अमेरिकी विद्वानों की युवा पीढ़ी ने लोक प्रशासन का पथ प्रदर्शन किया| इससे इस क्षेत्र में नये आन्दोलन का जन्म हुआ|

इविइट वाल्डो के संरक्षण में मिन्नो बुक के कुछ विद्वान एकत्रित हुए और परम्परागत लोक प्रशासन की स्वीकृत मान्यताओं को चुनौती देना प्रारम्भ कर दिया| इस तरह कहा जा सकता है की इस सम्मलेन ने लोक प्रशासन को जन्म दिया| सम्मलेन में यह निष्कर्ष निकाला गया की लोक प्रशासन की सर्वोपरि विशेषता होनी चाहिए- सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता|

1971 में फ्रेंक मेरिनी सम्पादित पुस्तक ‘नवीन लोक प्रशासन की दिशाएँ मिन्नोबुक परिप्रेक्ष्य में’ के प्रकाशन के साथ ही नवीन लोक प्रशासन को मान्यता प्राप्त हुई| यह नवीन लोक प्रशासन की प्रतिनिधि पुस्तक है| यह पुस्तक संभवतः मिन्नो बुक सम्मलेन 1968  पर आधारित है| नवीन लोक प्रशासन के अग्रणी विचारक है- फ्रेंक मेरिनी, जार्ज पेडरिक्सन, जोसेफ, उवाजेस, चार्ल्स लिन्डब्लोक|

नवीन लोक प्रशासन के उदय के कारण


नवीन लोक प्रशासन के उदय के निम्न कारण कहे जा सकते है-

  1. 1960 के दशक में पश्चिमी देशों विशेषकर अमेरिका में सामाजिक समस्याओं का उत्पन्न होना और तत्कालिक लोक प्रशासन के विद्वानों के द्वारा उसका हल न किया जाना|
  2.  नये विद्वानों द्वारा समस्याओं को दूर करने की दिशा में किया जाने वाला प्रयास
    • लोक प्रशासन के सिद्धांत व व्यवहार पर फिलाडेल्फिया सम्मलेन (1967)
    • मिन्नोबूक सम्मलेन (1968)
    • फ्रेंक मेरिनी की पुस्तक
    • वाल्डो द्वारा सम्पादित “विक्षोभ के समय में लोक प्रशासन” का प्रकाशन (1971)

नवीन लोक प्रशासन की विशेषताएँ


नवीन लोक प्रशासन की विशेषताएँ इस प्रकार है-

  1. यह राजनीती और लोक प्रशासन के भेद को अवास्तविक मानता है और दोनों के एकीकरण पर बल देता है|
  2. यह मूल्य निरपेक्षता को एक भ्रम मानता है| इसकी मान्यता है की प्रशासन में नीति निर्माण, नीति क्रियान्वयन और नीति मूल्यांकन सदैव नैतिकता के आधार पर होता है|
  3. मूल्य निरपेक्ष- मूल्य साक्षेप
  4. यह सकारात्मक और आदर्शात्मक है और यह प्रत्यक्ष रूप से जनता के प्रति उत्तरदायी है|
  5. यह परिवर्तन में विश्वास रखता है तथा यह सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील है|
  6. इसका मुख्य लक्ष्य सामाजिक न्याय की प्राप्ति है| यह जनता के कल्याण और कार्यक्रम के प्रति निष्ठावान है|
  7. यह विकेंद्रीकरण का समर्थन करता है|

संक्षेप में कहें तो नवीन लोक प्रशासन का नारा है- ‘नैतिकता एवं सामाजिक उपयोगिता’ जबकि लोक प्रशासन का नारा है- ‘मूल्य निरपेक्षता एवं दक्षता’|

प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल नवीन लोक प्रशासन की समझ को पढ़ा| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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