पुनर्जागरण और भौगोलिक खोज का भारत सहित एशिया और अफ्रीका पर प्रभाव

13 वीं से 15 वीं शताब्दी के बीच यूरोप में आधुनिक विश्व की नींव रखने वाले महान आन्दोलन पुनर्जागरण की शुरुआत हुई| पुनर्जागरण का पूरी दुनिया पर व्यापक प्रभाव पड़ा| इस क्रांति की कड़ी के रूप में ही भौगोलिक खोज का दौर प्रारम्भ हुआ| पुनर्जागरण और भौगोलिक खोज ने भारत सहित एशिया और अफ्रीका को व्यापक रूप से प्रभावित किया| हम इस पोस्ट में इन बातों की चर्चा करेंगें| Punarjaagaran aur bhaugolik khoj ka bhaarat sahit Asia aur Africa par prabhaav hindi me.

भौगोलिक खोज का प्रभाव

अगर आप जानना चाहते है की पुनर्जागरण और भौगोलिक खोज का एशिया और अफ्रीका पर क्या प्रभाव पड़ा? अथवा पुनर्जागरण और भौगोलिक खोज का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा? अथवा भौगोलिक खोज का कारण क्या था? अथवा यूरोपीय कम्पनियों के एशिया और अफ्रीका में आने की पृष्ठभूमि क्या थी? तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें| Renaissance and geographical discoveries impact on Asia Africa including India in hindi.

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पुनर्जागरण और भौगोलिक खोज का प्रभाव


13 वीं से 15 वीं शताब्दी के बीच यूरोप में आधुनिक विश्व की नींव रखने वाले महान आन्दोलन पुनर्जागरण की शुरुआत हुई| इस आन्दोलन के केंद्र में मनुष्य एवं मानवतावाद था| इसमें परलोक के बजाय इहलोक पर और आस्था के बजाय तर्क एवं विवेक पर बल दिया गया| इस आन्दोलन की कड़ी के रूप में भौगोलिक खोजें हुई| धर्म सुधार के आन्दोलन चलाये गये| धर्म को राज्य से अलग किया गया|

इसी कड़ी में ही वहां बौद्धिक आन्दोलन हुआ जिसमें आधुनिक विचार जैसे व्यक्तिवाद, स्वतन्त्रता, न्याय, उद्यमिता आदि विचार उभर कर सामने आये, इसी कड़ी में वैज्ञानिक क्रांति हुई| कॉपर निकस तथा गैलीलियों जैसे वैज्ञानिको की खोजों ने यूरोप वासियों को नए तरीके से सोचने पर मजबूर कर दिया|

इन घटनाओं का प्रभाव दुनिया को जानने की जिज्ञासा के रूप में हुआ| इससे भौगोलिक खोज का दौर प्रारम्भ हुआ| 15 वीं से 16 वीं सदी के बीच एशिया से जुड़ने के लिए यूरोप में नवीन मार्गो की खोज प्रारम्भ हुई| एशिया एवं भारत की खोज के क्रम में अमेरिका, आस्ट्रेलिया तथा दुनिया के अन्य नए क्षेत्रो की जानकारी होती चली गई|

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नए भौगोलिक मार्गो के खोज के कारण


भौगोलिक मार्गो के खोज के कारण

नये भौगोलिक मार्गों के खोज के कारण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण पुनर्जागरण को कहा जा सकता है| इसके अतिरिक्त एवं पुनर्जागरण के कड़ी के रूप में कार्य करने वाले कारण निम्नलिखित है|

  • यूरोप में उष्णकटिबंधीय वस्तुओं की मांग- प्राचीन काल से ही यूरोप में मसालों, सूती तथा रेशमी वस्त्रों, नील आदि की काफी मांग थी| इन वस्तुओं का यूरोपीय जीवन पर व्यापक प्रभाव था| इन मांगों के कारण आधुनिक काल में भारत की खोज को बल मिला|
  • कुस्तुतूनिया का पतन- 1453 में उस्मानिया सल्तनत ने एशिया माईनर को जीत लिया और कुस्तुतूनिया पर अपना अधिकार कर लिया| इससे पूर्व और पश्चिम के व्यापारिक मार्ग पर तुर्क का नियंत्रण हो गया| इसके अलावा यूरोप और एशिया के व्यापार पर वेनिश तथा जेनेवा का अधिकार था और वह यूरोप के नए राष्ट्रों खासकर स्पेन एवं पुर्तगाल को पुराने व्यापारिक मार्गों से होने वाले व्यापार में भागीदार नहीं बनाना चाहते थे| फलस्वरूप नवीन और सुरक्षित मार्ग की तलाश को बल मिला और यह नए भोगौलिक मार्गो के खोज के कारण बना|
  • नवीन वैज्ञानिक खोजें- पुनर्जागरण तथा वैज्ञानिक क्रांति के फलस्वरूप यूरोप में कई अविष्कार हुए| इस समय समुद्री कम्पास जहाज की चाल को मापने वाले उपकरण एस्ट्रोलैब (अक्षांश देशांतर को मापने वाला यंत्र) जहाजो में त्रिकोण पाल का प्रयोग, बारूद का प्रयोग एवं बन्दुक आदि की खोज हुए| इन नवीन वैज्ञानिक खोजों ने दुनिया में आगे बढ़ने के लिए यूरोप वासियों को समर्थन एवं आधार दिया|
  • यूरोपीय शासकों का योगदान- नवीन भौगोलिक खोजों के अग्रणी स्पेन तथा पुर्तगाल जैसे देश थे| स्पेन की महारानी इशाबोला तथा पुर्तगाल के राजकुमारी हेनरी ने नवीन खोजों को सहयोग एवं प्रोत्साहन प्रदान किया| अतः शासकीय समर्थन से नये नये खोजों के लिए नाविकों को प्रेरणा प्राप्त हुई और यह नए भोगौलिक मार्गो के खोज के कारण बना|
  • साहसी नाविकों के खोज के उदाहरण- यूरोप के कई साहसी नाविकों ने कई सारे नवीन क्षेत्र खोज निकालें| पार्थोलेमेडियास नामक पुर्तगाली नाविक ने 1487 में केप ऑफ़ गुड होप की खोज की, स्पेनवासी कोलम्बस ने 1491 में अमेरिका में नयी दुनिया को खोज निकाला| इसी प्रकार 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा भारत पहुँचने में सफल रहा|

उपरोक्त कारणों के परिणामस्वरूप भौगोलिक खोज हुई| दुनिया एवं भारत का आपसी जुड़ाव कायम हुआ| इसी क्रम में भारत में यूरोपीय वाणिज्यिक कम्पनियों का आगमन हुआ|

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भारत समेत एशिया-अफ्रीका पर प्रभाव


विश्व व्यापार में बेहद बढ़ोतरी हुई| यूरोप को अमेरिकी महाद्वीप के रूप में लम्बा चौड़ा स्थान उपलब्ध हो गया| 15वीं सदी के मध्य में यूरोपियों का अफ्रीका में प्रवेश हुआ| शुरुआत में बागानी, सोने एवं हाथी दांत का व्यापार और बाद में दास व्यापार द्वारा अफ्रीका का बुरी तरह शोषण किया गया| अफ्रीका से बनाई गई पूंजी को आद्योगिक क्रांति में लगाया गया|

यूरोप और एशिया के संबंध भी बदल गये| यूरोप के साथ भारत तथा एशिया का व्यापारिक संबंध यूनानियों के ज़माने से ही था| मध्यकाल में मुख्यतः अरब व्यापारियों के माध्यम से यह व्यापार किया जाता था| यूरोपीय तथा भूमध्यसागरीय भाग पर इटली वालों का एकाधिकार था| अनेक मध्यस्थों के बाबजूद यह व्यापार लाभदायक होता था भौगोलिक खोज ने इस संबंध को बदल डाला|

इन खोजो के बाद भारत में आगे के समय में विभिन्न यूरोपीय वाणिज्यिक कम्पनी का आगमन हुआ| धीरे-धीरे वे कम्पनियां भारत में बसते चले गये| 18 वीं सदी में भारत में काफी राजनितिक उथल-पुथल मची थी| तत्कालिक राजनीतिक कमजोरी का फायदा उठाते हुआ यूरोपीय कम्पनियों ने अपनी राजनीतिक बढ़त बनाई|

16 वीं सदी में ही यूरोप के व्यापारियों और सैनिकों ने एशियाई देशों में घुसने और अधीन बनाने का लम्बा सिलसिला शुरू किया| इस दरम्यान यूरोपीय कम्पनियां आपस में भी संघर्षरत रही| शुरुआत में स्पेन और पुर्तगाल तथा बाद में डच, फ़्रांसीसी और अंग्रेज ने बढ़त बनाई| अततः इस शक्ति संघर्ष में अंग्रेजों ने विजय प्राप्त किया तथा आगे भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना हुई|

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दुनिया के ये नवीन खोजें आधुनिक विश्व की अहम घटना है जिसने एक साथ एशिया, अमेरिका, अफ्रीका यहाँ तक की यूरोप को बदल डाला| इन खोजों ने मनुष्य को बदल दिया| समग्र काल खंड को बदल दिया| इन खोजों से एक साथ दूनिया बड़ी और एक साथ ही छोटी हो गई|

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