अब तक आयात किया जाता रहा LI-ON लिथियम आयन बैटरी अब भारत में भी बन सकेगा

सभी लोग अपने स्मार्ट फ़ोन में बैटरी बैकअप अधिक चाहते है और इसके लिए मोबाइल खरीदते समय बैटरी की कैपिसिटी की अच्छे से जांच पड़ताल करते है | इलेक्ट्रोनिक गैजेट के लिए LI-ON लिथियम आयन बैटरी को अच्छा माना जाता है | इसका कारण है की अन्य बैटरी के मुकाबलें इसकी कैपसिटी अधिक होती है | अभी तक भारत में इसका विदेशों से आयात किया जाता रहा है और भारत दुनिया में इसका सबसे बड़े आयातकों में से एक रहा है | लेकिन हाल ही में LI-ON बैटरी से जुड़ी एक परियोजना के तहत इसका उत्पादन भारत में भी हो सकेगा |  हम इस पोस्ट में LI-ON लिथियम आयन बैटरी परियोजना के बारे में हिंदी में चर्चा करेंगें | साथ ही हम देखेंगे की LI-ON लिथियम आयन बैटरी क्या है ? इसकी क्षमता अन्य बैटरियों से kaise अलग है और यह भारत के विकास में कैसे सहायक हो सकती है |

LI-ON लिथियम आयन बैटरी

LI-ON लिथियम आयन बैटरी क्या है


LI-ON लिथियम आयन बैटरी एक रिचार्ज करने योग्य बैटरियां होती है | इसकी energy density बहुत high होती है | इसका उपयोग generally electronics gadgets में किया जाता है | LI-ON लिथियम आयन बैटरी में electrode के रूप में धात्विक लिथियम के स्थान पर इंटरकैलेटेड लिथियम यौगिक का use किया जाता है|

इसमें बैटरी के प्रति किलोग्राम में 150-150 वाट विद्युत् भंडारण करने की क्षमता होती है | LI-ON लिथियम आयन बैटरी को उसके पूरे जीवनकाल में 5000 या उससे अधिक बार चार्ज किया जा सकता है जबकि अन्य लेड एसिड बैटरी को उसके सम्पूर्ण जीवनकाल में केवल 400-500 बार चार्ज किया जा सकता है |

भारत पूरी दुनिया में LI-ON लिथियम आयन बैटरी का सबसे बड़े आयातकों में से एक है | वर्ष 2017 में भारत द्वारा लगभग 150 मिलियन us $ के मूल्य का LI-ON लिथियम आयन बैटरी आयात किया गया | भारत के विनिर्माता चीन, जापान, दक्षिण कोरिया आदि देशों से इसका आयात करते है |

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1st LI-ON लिथियम आयन बैटरी परियोजना


वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के तहत सेंट्रल इलेक्ट्रो कैमिकल रिसर्च इंस्टीच्यूट (CECRI) एवं RAASI सोलर पावर प्राइवेट लिमिटेड ने भारत की पहली लिथियम आयन (LI-ON) बैटरी परियोजना के लिए टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर हेतु एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है।

लिथियम-आयन बैटरियों की इस स्वदेशी प्रौद्योगिकी को डॉ. गोपु कुमार की अध्यक्षता में CSIR- CECRI की एक समूह (CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला नई दिल्ली, CSIR-सेंट्रल ग्लास एंड सिरेमिक्स रिसर्च इंस्टीच्यूट कोलकाता और भारतीय रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद की साझेदारी में) ने विकसित की है |

लिथियम आयन (LI-ON) बैटरी परियोजना समझौते पर CECRI के निदेशक डॉ. विजयमोहन के. पिल्लई एवं RAASI समूह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सी. नरसिम्हन द्वारा केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की उपस्थिति में 9 जून, 2018 को बंगलुरु में हस्ताक्षर किया गया।

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इस परियोजना और लिथियम-आयन बैटरियो का महत्व


LI-ON लिथियम आयन बैटरी का सबसे अधिक महत्व है की इसका ऊर्जा भंडारण प्रणाली में व्यापक उपयोग किया जा सकता है | इससे श्रवण सहायक उपकरणों से लेकर कंटेनर आकार की बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोट आदि में उपयोग किया जा सकता है | यह भौतिक तारों के बिना भी यानी की वायरलेस माध्यम से भी किसी भी विद्युत् उपकरणों को ऊर्जा प्रदान कर सकती है |

यह किसी भी उद्योग के लिए सतत ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत बड़ा माध्यम साबित हो सकती है |

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इसके महत्व के संबंध में, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के अनुसार, यह परियोजना भारत को एक विनिर्माण हब में रूपांतरित कर देने तथा विदेशी मुद्रा के देश से बाहर जाने में कमी लाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के -मेक इन इंडिया- के विजन के अनुरूप है।

उन्होंने कहा की यह परियोजना अन्य क्षेत्रों के अतिरिक्त, हमारे उद्योग की सहायता करने के लिए महत्वचपूर्ण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी की पूर्ति करने में CSIR एवं इसकी प्रयोगशालाओं की क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने यह भी कहा कि , ‘ इससे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दो प्रमुख योजनाओं-2022 तक 175 गीगावाट, जिसमें 100 गीगावाट सौर ऊर्जा होगा, के सृजन के द्वारा ऊर्जा बास्केट में स्वच्छ ऊर्जा के हिस्से को बढ़ाना, तथा दूसरा, 2030 तक पूरी तरह बिजली के वाहनों में बदल देने की राष्ट्रीय बिजली गतिशीलता मिशन- को बेशुमार बढ़ावा मिलेगा।

इस तरह कहा जा सकता है लिथियम-आयन बैटरी के स्वदेशी तकनीक विकसित किये जाने से और इस स्वदेशी तकनीक के जरिये लिथियम-आयन बैटरी के उत्पादन किये जाने से भारत में विकास को बढ़ावा मिलेगा | यह परियोजना सिर्फ विकास नहीं बल्कि सतत समावेशी विकास की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी |

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