क्या है लाभ का पद जिसे लेकर अक्सर होती है सियासी घमासान

कुछ समय पहले लाभ का पद Office of Profit Act का मुद्दा काफी चर्चा में आया, क्योंकि लाभ का पद धारण करने के कारण दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल सरकार के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था| इससे पूर्व भी कई बार लाभ के पद धारण करने के कारण लोकसभा सदस्यों या राज्य विधानसभा के सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा सांसद या विधायक होने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता रहा है| हम इस पोस्ट में समझेंगें लाभ का पद क्या है और दिल्ली के 20 विधायकों को अयोग्य क्यों घोषित कर दिया गया?

लाभ का पद Office of Profit

हम देखेंगें की office of profit – Labh Ka Pad का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है? इसके नकारात्मक और सकारात्मक पह्लुएँ क्या है? हम यह भी देखेंगे की भारत के संविधान में संसद या राज्य विधानसभा के सदस्यों के निर्हता के लिए क्या प्रावधान किये गये है?  इसके अलावे भी हम संबंधित पहलुओं पर चर्चा करने के साथ ही तथ्यों को भी समझने का प्रयास करेंगें| सबसे अंत में हम लाभ के पद से जुड़े निष्कर्ष पर भी बात करेंगें|

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लाभ का पद Office of Profit


लाभ का पद क्या है?


हम देखने जा रहे है की लाभ के पद का मुद्दा क्या है या लाभ का पद कानून क्या है. इसमें क्या प्रावधान किये गये है.

अगर कोई व्यक्ति लाभ का पद धारण करता है तो उसे संसद सदस्य तथा राज्य विधानसभा के सदस्य बनने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है. लेकिन लाभ का पद उसे ही कहा जाएगा जो सरकारी पद हो. यह वर्णन करना जरुरी होगा की किसी भी मंत्री को लाभ के पद पर नहीं माना जाता. इसमें उन सभी पदों को भी शामिल किया गया है जिन्हें संसद या राज्य सरकार के द्वारा मंत्री पद का दर्जा दिया गया है.

लाभ के पद को संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है लेकिन संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (a) और 191 (1) (a) में इसका वर्णन मिलता है. संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (a) और 191 (1) (a) में लाभ के पद के आधार पर निर्ह्ताओं का उल्लेख किया गया है. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के सेक्शन 9(a) के अनुसार भी सांसदों और विधायकों को अन्य पद ग्रहण करने से रोक का प्रावधान है.

office of profit को स्पष्ट रूप से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में भी परिभाषित नहीं किया गया है. माननीय उच्चतम न्यायालय ने चर्चित प्रद्युत बारदोलाई वर्सेज स्वप्न रॉय मामलें में 2001 में कहा की लाभ का पद उसे ही माना जाएगा जिसमें निम्न प्रावधान हो.

  • नियुक्ति केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा की गई हो,
  • उस व्यक्ति को उक्त पद से हटाने का अधिकार या निलम्बित करने का अधिकार सरकार के ही पास हो,
  • उस पद के लिए सरकार व्यक्ति को पारिश्रमिक प्रदान कर रही हो,
  • पद प्राप्त करने वाला व्यक्ति सरकार के लिए कार्य कर रहा हो,
  • क्या कार्य किया जा रहा है इस पर सरकार का नियंत्रण और निगरानी हो.

बाद में, जया बच्चन वर्सेज भारत संघ के मामलें में उच्चतम न्यायालय ने इसे पुनः परिभाषित किया. तब कहा गया की “ऐसा सरकारी पद जो कोई लाभ अथवा अथवा मौद्रिक अनुलाभ प्रदान करने में सक्षम हो.”  इस तरह इसमें लाभ वास्तविक रूप में होने के अलावे लाभ होने की सम्भावना को भी एक प्रभावी कारक माना गया.

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दिल्ली विधानसभा के विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने का मामला


2015 में दिल्ली सरकार ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया था. इससे ये सभी विधायक लाभ की पद की परिभाषा में आ गये. इन विधायकों को लाभ के पद की परिभाषा के अंतर्गत आने हेतु भारतीय निर्वाचन आयोग ने आधार बताया की- संसदीय सचिव के का पद एक सरकारी पद है और इस पद में लाभ प्राप्त होने की संभावनाएं विद्यमान है.

तब दिल्ली सरकार ने इन विधायकों को लाभ की पद की परिभाषा से बाहर रखने हेतु एक अधिनियम – दिल्ली विधानसभा सदस्य (योग्यताओं का उन्मूलन) अधिनियम लाई. इस अधिनियम को दिल्ली सरकार भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना चाहती थी, ताकि सदस्यों को लाभ के पद के आधार पर नियोग्य ठहराए जाने से बचाया जा सके.

लेकिन दिल्ली विधानसभा सदस्य (योग्यताओं का उन्मूलन) अधिनियम को दिल्ली के राज्यपाल की सहमति नहीं मिली और इससे दिल्ली सरकार के 21 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने का मार्ग खुला रहा.

अनुच्छेद 103 कहता है की कोई सदस्य किसी कार्य को करने से संसद सदस्य तथा राज्य विधानसभा के सदस्य बनने के लिए अयोग्य हो गया है या नहीं इस प्रश्न को राष्ट्रपति के पास विमर्श के लिए भेजा जाएगा और राष्ट्रपति, निर्वाचन आय़ोग की सलाह के अनुसार कार्य करेगा. संविधान में यह प्रावधान भी मिलता है की अनुच्छेद 102 व 191 से संबंधित मुद्दों पर राष्ट्रपति व राज्यपाल  निर्वाचन आय़ोग की सलाह के अनुसार कार्य करेगा.

इन्ही पृष्ठभूमि में निर्वाचन आय़ोग की सलाह के अनुसार राष्ट्रपति ने दिल्ली के 20 विधायकों को लाभ का पद धारण करने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया.

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सदस्यों की निर्हता के संवैधानिक प्रावधान


अब हम देखने जा रहे है की भारत के संविधान में संसद या राज्य विधानसभा के सदस्यों के निर्हता के लिए क्या प्रावधान किये गये है. संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (a) और 191 (1) (a) में संसद या राज्य विधानसभा के सदस्यों के निर्ह्ताओं का उल्लेख किया गया है.

अनुच्छेद 102 (1) (a)

कोई भी व्यक्ति निम्न स्थिति के आधार पर संसद सदस्य के निर्रह ठहराया जा सकता है.

  • भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के अंतर्गत लाभ का पद धारण करने पर,
  • पागल हो जाने पर,
  • अनुन्मोचित दिवालिया होने पर,
  • भारत के नागरिक न रह जाने पर,

अनुच्छेद 191 (1) (a)

कोई भी व्यक्ति निम्न स्थिति के आधार पर राज्य विधानसभा सदस्य के निर्रह ठहराया जा सकता है.

  • भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के अंतर्गत लाभ का पद धारण करने पर,
  • पागल हो जाने पर,
  • अनुन्मोचित दिवालिया होने पर,
  • भारत के नागरिक न रह जाने पर,

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GNCTD एक्ट की 1991 की धारा 15 (1)(a)

गवर्मेंट ऑफ़ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ़ दिल्ली एक्ट की 1991 की धारा 15 (1)(a) के अनुसार एक व्यक्ति विधानसभा का सदस्य चुने जाने के लिए अर्रह होगा यदि वह भारत सरकार, राज्य सरकार अथवा संघ शासित क्षेत्र के अधीन लाभ का कोई ऐसा पद धारण करता है जिसे विधि द्वारा सुरक्षा प्राप्त नही है.

लाभ के पद का आलोचनात्मक परिक्षण


आइये अब लाभ के पद के आधार पर सदयों को निर्रह ठहराए जाने के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझते है.

लाभ का पद Office of Profit

सकारात्मक पक्ष

  • दायित्वों का प्रभावी निर्वहन :- लाभ का पद धारण करने पर अयोग्य ठहराया जाना शक्ति पृथक्करण का समर्थन करता है. लाभ का पद धारण करके कोई व्यक्ति सांसद या विधायक के रूप में (कार्यपालिका) अपने दायित्वों का उचित निर्वहन नहीं कर सकता.
  • राजनितिक लाभ हेतु उपयोग पर अंकुश :- संविधान में चर्चा मिलती है की मंत्रियों की संख्या कुल विधायक या सांसदों का 15 % से अधिक नहीं हो सकती है, ऐसे में राजनितिक लाभ प्राप्त करने के लिए या गठजोड़ में समर्थन प्राप्त करने के लिए सदस्यों को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त कर दिया जाता है. इससे अतिरिक्त दबाब एवं बोझ में वृद्धि होती है| इन परिस्थितियों में लाभ के पद पर नियुक्त किये जाने पर सदस्यों को निर्रह ठहराए जाने से राजनितिक लाभ के लिए इसके प्रयोग पर अंकुश लगाया जा सकेगा.
  • गोपनीयता की संकट पर रोक :- मंत्रियों को गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है लेकिन अन्य लाभ के पदों खासकर संसदीय सचिवों पर व्यक्तियों को गोपनीयता की शपथ नहीं दिलाई जाती. जबकि सांसद या विधायक के रूप में मंत्रियों और मंत्रालयों तक उनकी पहुँच हमेशा बनी रहती है. ऐसे में गोपनीयता के संकट की स्थिति बन जाती है और इससे भ्रष्टाचार, राष्ट्रीय सुरक्षा समेत जनमत को खतरा आदि की भी समस्या उत्पन्न हो जाता है. ऐसी स्थिति में लाभ के पद पर आसीन सदस्यों को निर्रह ठहराया जाना इस समस्या पर रोक लगाता है|

इसके अलावे भी इसके कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अनगिनित लाभ हो सकते है|

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नकारात्मक पक्ष

Office of Profit के आधार पर सदस्यों के निर्रह ठहराए जाने के नकारात्मक पक्ष काफी सिमित है, लेकिन फिर भी इसके एकदम से नकारात्मक पक्ष न होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता. आइये इसके कुछ प्रमुख नकारात्मक पक्षों को समझते है.

  •  इसका केंद्र सरकार द्वारा दुरूपयोग किया जा सकता है. इस संबंध में कई आरोप भी लगाये जाते रहे है.
  •  अगर किसी सदस्य को सकारात्मक मानसिकता के साथ भी संसदीय सचिव आदि बनाया गया तो भी वह इस लाभ के पद के kanun का शिकार हो सकता है.
  • यह प्रावधान सदस्यों के अधिकारों को सिमित करता है
  • यह प्रावधान कहीं न कहीं विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और अस्थिरता को बढ़ावा देता है.

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निष्कर्ष


तमाम पहलुओं पर विचार करने के बाद Office of Profit के ज्यादा लाभ ही सामने आता है और इसके सीमाओं में ज्यादा दम नहीं है. तथापि इसके सीमाओं को जहाँ तक हो सके दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए.  दुसरे, लाभ का पद ब्रिटेन से प्रेरित है किन्तु ब्रिटेन में निर्र्ह्ताओं के लिए कोई सामान्य सिद्धांत या निर्रह ठहराए जाने वाले पदों की कोई विशेष सूची नहीं है, हालाँकि भारत में सामान्य निर्र्ह्ताओं का उल्लेख किया गया है, इस संबंध में संसद स्पष्ट कानून भी बना सकती है. लाभ के पद की न्याययिक व्याख्याएँ अलग-अलग रही है, अतः इस मामलें को संसद की संयुक्त समिति को भी सौपने पर विचार किया जा सकता है ताकि इस बात का निर्धारण किया जा सके की कौन -कौन से पद निर्रहता के अंतर्गत होंगें|

इस तरह आपने ‘लाभ का पद Office of Profit Act’ के बारे में जाना| अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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