भारतीय राष्ट्रपति किस स्थिति में इमरजेंसी की घोषणा करता है

भारत में राष्ट्रपति राज्य के औपचारिक प्रधान होते है| उन्हें औपचारिक रूप से अनेक कार्यकारी, विधायी, वित्तीय, न्यायिक आदि शक्तियां प्राप्त होती है| इन शक्तियों में राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां यानि इमरजेंसी पॉवर प्रमुख है| राष्ट्रपति इन इमरजेंसी पॉवर का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रीमंडल के सलाह पर करता है|  हम इस पोस्ट में चर्चा करेंगें की राष्ट्रपति को कौन-कौन से आपातकालीन शक्तियां प्राप्त है और वह किस स्थिति में इमरजेंसी की घोषणा करता है? हम यह भी देखेंगे की इन इमरजेंसी का क्या प्रभाव होता है. इसी संदर्भ में हम इस पर भी चर्चा करेंगें की इन इमरजेंसी के दौरान मौलिक अधिकार पर क्या प्रभाव पड़ता है. आइये चर्चा की शुरुआत करते है.  राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां व कार्य हिंदी में..

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां व कार्य

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां व कार्य


भारतीय संविधान द्वारा इंडियन प्रेसिडेंट को तीन प्रकार की आपातकालीन शक्तियां प्रदान की गई है जो की इस प्रकार है|

  1. राष्ट्रीय आपात- अनुच्छेद 352
  2. राष्ट्रपति शासन- अनुच्छेद- 356
  3. वित्तीय आपात- अनुच्छेद- 360

आइये अब इन शक्तियों पर एक-एक कर विचार करते है|

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राष्ट्रीय आपात- अनुच्छेद 352


राष्ट्रीय आपात- अनुच्छेद 352

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां में राष्ट्रीय आपात या national emergency मुख्य है इसे निम्न बिन्दुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-

1. राष्ट्रीय आपात की घोषणा कब की जाती है?

  • इस आपातकालीन पॉवर का उपयोग राष्ट्रपति युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के स्थिति में  करता है|
  • उपर्युक्त स्थिति के आशंका के आधार पर भी इस इमरजेंसी की घोषणा की जा सकती है|
  • इसे घोषित किये जाने के लिए कैबिनेट की लिखित अनुमोदन किया जाना आवश्यक है| इस प्रावधान को 44 वें संविधान संसोधन अधिनियम 1978 के द्वारा जोड़ा गया|

2. राष्ट्रीय आपात को देश के किस क्षेत्र में लगाया जा सकता है?

  • इसे पूरे देश में एक साथ या देश के किसी खास भाग में लागू किया जा सकता है|

3. राष्ट्रीय आपात कब तक लागू रहता है?

  • राष्ट्रीय आपात घोषित किये जाने के एक माह के भीतर संसद से पारित किया जाना आवश्यक है अन्यथा यह समाप्त हो जाएगा|
  • संसद के अनुमोदन के द्वारा इसकी अवधि एक बार में 6 माह के लिए बढाया जा सकता है| इस तरह से इसे कितनी भी बार विस्तारित किया जा सकता है|
  • राष्ट्रपति इसे कभी भी वापस ले सकता है|
  • लोकसभा में साधारण बहुमत से प्रस्ताव पारित करके भी इसे हटाया जा सकता है|

4. राष्ट्रीय आपात का प्रभाव क्या होता है?

  • संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है|
  • राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है|
  • केंद्र द्वारा राज्य को प्रशासनिक शक्ति के प्रयोग के संदर्भ में निर्देश दिए जा सकते है|
  • मैलिक अधिकारों का निलंबन किया जा सकता है|
  • लोकसभा का कार्यकाल एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है|

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राष्ट्रपति शासन- अनुच्छेद- 356


राष्ट्रपति शासन- अनुच्छेद- 356

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां में राष्ट्रपति शासन या President’s rule भी मुख्य है इसे निम्न बिन्दुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-

1. राष्ट्रपति शासन की घोषणा कब की जाती है?

  • यह संविधान की विफलता के आधार पर घोषित किया जाता है|
  • यह सामान्यतः राज्यपाल की अनुशंशा के आधार पर लगाया जाता है|

2. राष्ट्रपति शासन को देश के किस क्षेत्र में लगाया जा सकता है?

  • इसे किसी प्रान्त में लगाया जा सकता है|

3. राष्ट्रपति शासन कब तक लागू रहता है?

  • इसे किसी प्रान्त में अधिक से अधिक तीन वर्षो तक लगाया जा सकता है|
  • राष्ट्रपति शासन घोषित किये जाने के दो माह के भीतर संसद से पारित किया जाना आवश्यक है|
  • संसद के अनुमोदन के द्वारा इसकी अवधि को 6 माह के लिए बढाया जा सकता है| परन्तु दूसरी बार विस्तारित करने हेतु निम्न शर्तों का पूरा होने आवश्यक होता है-
    • उस प्रान्त में या प्रान्त के  किसी क्षेत्र में राष्ट्रीय आपात लागू हो,
    • उस राज्य में चुनाव संभव न होने के संदर्भ में निर्वाचन आयोग अनुशंषा करें,
  • राष्ट्रपति इसे कभी भी वापस ले सकता है|
  • उच्चतम न्यायालय द्वारा भी इसे हटाया जा सकता है|

4.  राष्ट्रपति शासन का प्रभाव क्या होता है?

  • इसमें भी संसद राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है|
  • राज्य विधानसभा को भंग या निलम्बित किया जा सकता है
  • राष्ट्रपति द्वारा राज्य के किसी भी अधिकारी या संस्था की शक्ति का अधिग्रहण किया जा सकता है|
  • इसमें संघात्मक ढांचा एकात्मक हो जाता है|
  • उच्च न्यायालय की शक्ति बरक़रार होती है|
  • मौलिक अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है| राष्ट्रपति शासन के दौरान मौलिक अधिकार का उलंघन नहीं किया जा सकता है|

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वित्तीय आपात- अनुच्छेद- 360


वित्तीय आपात- अनुच्छेद- 360

इसे अभी तक कभी लागू नही किया गया है| वित्तीय आपात या Financial Emergency को निम्न बिन्दुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-

1. वित्तीय आपात की घोषणा कब की जाती है?

  • वित्तीय साख या वित्तीय स्थिरता के खतरें की स्थिति में इसे लगाया जा सकता है|

2. वित्तीय आपात का प्रभाव क्या होता है?

  • राज्यों को वित्तीय आचरण के सन्दर्भ में निर्देश दिया जा सकता है|
  • राज्यों के धन-विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किया जा सकता है|
  • सरकारी कर्मचारियों का वेतन कम किया जा सकता है|

3. वित्तीय आपात कब तक लागू रहता है?

  • एक बार संसद द्वारा अनुमोदित किये जाने के बाद यह राष्ट्रपति द्वारा स्वयं वापस लिये जाने तक जारी रहता है|

इस तरह देखा जा सकता है की भारतीय राष्ट्रपति किस स्थिति में इमरजेंसी की घोषणा करता है| राष्ट्रपति तीनों प्रकार के इमरजेंसी पॉवर का प्रयोग ऊपर वर्णित विभिन्न स्थिति में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रीमंडल के सलाह पर करता है| क्योंकि राष्ट्रपति सरकार का औपचारिक प्रधान होता है जबकि सरकार का वास्तविक प्रधान प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला निर्वाचित मंत्रीमंडल होता है|

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां काफी महत्वपूर्ण है लेकिन विभिन्न आधारों पर इसकी आलोचना भी की जाती रही है जैसे की-

  1. इन शक्तियों का सरकार दुरूपयोग कर सकती है| सरकार द्वारा आपातकालीन शक्तियों के दुरूपयोग के लिए सर्वाधिक चर्चित उदाहरण 1975 के आपातकाल के रूप में दिया जाता है|
  2. इन शक्तियों को विपक्षी दल के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण ढंग से इस्तेमाल किया जाता है|
  3. इसके अलावा मौलिक अधिकार के उलंघन एवं संघीय ढांचे के निलंबन को लेकर भी इसकी आलोचना की जाती रही है|

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प्रिय विजिटर इस तरह आपने अवेयर माय इंडिया के हिंदी आर्टिकल ‘भारतीय राष्ट्रपति किस स्थिति में इमरजेंसी की घोषणा करता है’ को पढ़ा| अगर आपका राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट जरुर करें| आशा है की हमारे अन्य आर्टिकल की तरह ही आप इस आर्टिकल से भी लाभान्वित होंगे| हम इस बात को महसूस कर रहे है की आपके और बेहतर सुविधा के लिए इस साईट में कई सुधार किया जाना अपेक्षित है| आप सरीखे विजिटर के स्नेह और सुझाव से हम इस साईट में निरंतर सुधार कर रहे है और हमें विश्वास है की आगे के समयों में हम आपको और भी बेहतर सुविधा दे पाएंगें| लेकिन इस हेतु आपसे अनुरोध है की आप हमारे कांटेक्ट अस पेज के माध्यम से अपना विचार एवं अपना बहुमूल्य सुझाव हम तक जरुर प्रेषित करें| इस आर्टिकल को पढ़ने तथा अवेयर माय इंडिया साईट पर विजिट करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद|

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6 Comments

  1. क्या वित्तीय आपातकाल के समय भारत के राष्ट्रपति के वेतन में कटौती होती है?

  2. इस आर्टिकल को पढने और प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद अनमोल..
    वित्तीय आपातकाल के समय भारत के राष्ट्रपति के वेतन में आम तौर पर या अनिवार्य तौर पर कटौती नहीं होती है.
    लेकिन ऐसा संभव भी है..

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