चिनूक से क्या अभिप्राय है, इसकी उत्पत्ति की प्रक्रिया और प्रभावों को समझाएं

चिनूक एक प्रमुख गर्म स्थानीय पवन है. विश्व की स्थानीय पवनें पोस्ट में हमने सभी प्रकार की स्थानीय पवनों के बारे में विस्तार पुर्वक चर्चा की है. इस पोस्ट में हम विशिष्ट रूप से चिनूक के बारे में बात करने जा रहे है. हम देखेंगें की चिनूक से क्या अभिप्राय है. इसके अलावे हम चिनूक की उत्पत्ति की प्रक्रिया और प्रभावों को भी समझने का प्रयास करेंगें. chinook se kya abhipraya hai hindi me.

चिनूक से क्या अभिप्राय है

चिनूक से क्या अभिप्राय है


चिनूक एक प्रमुख स्थानीय पवन है. इसकी उत्पत्ति पर्वतों से उतरती हुई गर्म पवन के रूप में होती है. चिनूक पवन के विकास में शीतोष्ण चक्रवात, वायु का रुद्धोष्म परिवर्तन तथा रॉकी पर्वत की भौगोलिक स्थिति का अहम योगदान है. अतः कहा जा सकता है की द्वितीय परिसंचरण प्रणाली पर स्थानिक कारकों के प्रभावों के फलस्वरूप चिनूक की उत्पत्ति होती है.

शीतकाल में प्रशांत महासागर से उत्पन्न होने वाला शीतोष्ण चक्रवात जब रॉकी पर्वत से टकराते हुए पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होता है तब इसके निम्न वायुदाब के प्रभाव से रॉकी पर्वत के पश्चिमी ढाल के सहारे हवाएं उपर उठती है. इन्हीं हवाओं के द्वारा रॉकी पर्वत के पूर्वी तटीय भाग में चिनूक पवन की उत्पत्ति होती है.

चिनूक से क्या अभिप्राय है

जब रॉकी पर्वत के पश्चिमी ढाल के सहारे हवाएं उपर उठती है तब इसके तापमान में प्रारम्भ में शुष्क रुद्धोश्म दर से कमी आती है और संघनन प्रारंभ हो जाता है. ऐसे में संघनन की गुप्त ऊष्मा मुक्त होती है. संघनन की गुप्त ऊष्मा के कारण संघनन तल के उपर वायु के तापमान में थोड़ी वृद्धि हो जाती है. यह प्रक्रिया चिनूक के गर्म होने का पहला आधार है.

शीतोष्ण चक्रवात के प्रभाव से जब यह थोड़ी सी गर्म हवाएं रॉकी पर्वत को पार करती है तब इनमें क्रमशः अवतलन होने लगता है. नीचे उतरती हुई इसके तापमान में शुष्क रुद्धोश्म प्रक्रिया द्वारा वृद्धि होती है. यह चिनूक के गर्म होने का दूसरा आधार है.

रॉकी के पूर्वी ढाल के सहारे उतरती हुई इन्हीं गर्म पवनों को प्रेयरी के मैदान में चिनूक कहते है. चिनूक का औसत तापमान या सामान्य तापमान 3 से 3.5 डिग्री सेल्सियस होता है. इसके कारण प्रेयरी के क्षेत्र में शीतकाल में जमा हुआ बर्फ पिघलने लगता है. इसी कारन चिनूक पवन को हिमभक्षिनी भी कहा जाता है.

चिनूक पवन का प्रेयरी प्रदेश के जलवायु, मौसमी दशाओं और आर्थिक सांस्कृतिक क्रियाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. प्रेयरी के मैदान में शीतकालीन जलवायु को यह अपेक्षाकृत अनुकूल बनाये रखती है. यहाँ गेहूं की कृषि, पशुपालन, चारा कृषि एवं अन्य कृषिगत और आर्थिक क्रियाकलापों को यह सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है.

Hey, आशा है की इस छोटे से पोस्ट को पढने के बाद आप इस प्रश्न का उत्तर दे पायेंगें की चिनूक से क्या अभिप्राय है. अगर इसे समझने में किसी भी तरह की कठिनाई हो या फिर इससे संबंधित कोई प्रश्न हो तो नीचे कमेंट करें अथवा हमारे कांटेक्ट अस के माध्यम से सम्पर्क करें. इस आर्टिकल को पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

यह भी पढ़ें-

Leave a Reply

Your email address will not be published.