दैनिक पवनें – समुद्री एवं स्थलीय समीर तथा घाटी एवं पर्वतीय समीर की हिंदी में जानकारी

पवनें (wind), वायु (air) का गतिमान स्वरूप है जो सामान्यतः उच्च वायुदाब और निम्न वायुदाब की ओर चलती है. हम पवनों के प्रकार पोस्ट में सभी पवनों के प्रकार के बारे में हिंदी में विस्तृत चर्चा कर चुके है. इस पोस्ट में हम दैनिक पवनें के बारे में विस्तार पूर्वक बात करेंगें. हम यहाँ दैनिक पवनों के प्रकार – समुद्री एवं स्थलीय समीर तथा घाटी एवं पर्वतीय समीर को भी समझेंगें. आइये चर्चा की शुरुआत करते है. Dainik pawnen hindi me puri jankari.

दैनिक पवनें के प्रकार

दैनिक पवनें


दैनिक पवनें हिंदी में. दैनिक पवनों की उत्पत्ति दिन एवं रात में मौसमी परिवर्तनों की के कारण होती है. यही कारण है की दैनिक पवनों का अध्ययन मौसमी पवनों के अंतर्गत बेहतर तौर पर किया जाता है. वास्तव में दैनिक पवनों का अध्ययन मौसमी पवनों के अंतर्गत ही किया जाना चाहिए.

दैनिक पवनों के प्रकार


हम बात करने जा रहे है हिंदी में दैनिक पवनों के प्रकार की. Types of Daily wind in hindi. दैनिक पवनें दो प्रकार की होती है. (क.) समुद्री एवं स्थलीय समीर (ख.) घाटी एवं पर्वतीय समीर . आइये एक-एक कर इनके बारे में विस्तार से समझें.

इन्हें समझने से पूर्व एक बात पर गौर करना चाहिए की पवनें सामान्यतः उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती है. अगर आप इसके बारे में विस्तार से जानना चाहते है तो यहाँ क्लिक करें- वायुदाब . अब हम यह मान कर चलते है की आप समझ चुके है की पवनें सामान्यतः उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर प्रवाहित होती है.

समुद्री एवं स्थलीय समीर


समुद्री एवं स्थलीय समीर क्रमशः दिन एवं रात में समुद्र तटीय क्षेत्रों में प्रवाहित होते है. समुद्री एवं स्थलीय समीर के कारण सागर तटीय भागों में समकारी (समान) मौसमी दशाएं बनी रहती है. यही कारण है की सागर तटीय भागों में दैनिक तापान्तर तथा वार्षिक तापान्तर अधिक नहीं पाया जाता है और तटीय जलवायु सर्वाधिक अनुकूल मानी जाती है.

समुद्री समीर

दिन के समय स्थलीय भाग अपने सटे हुए सागरीय क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म हो जाता है, इससे स्थलीय भाग पर निम्न वायुदाब और समुद्री भागों पर उच्च वायुदाब का विकास हो जाता है और ऐसे में समुद्र से स्थल की ओर अपेक्षाकृत ठंडी और आर्द्र हवाएं प्रवाहित होती है इसे समुद्री समीर कहा जाता है.

समुद्री समीर

स्थलीय समीर

रात के समय तापमान की दशाओं में परिवर्तन हो जाता है. इस समय स्थलीय भाग सागरीय क्षेत्रों की तुलना में अधिक ठंडी हो जाती है. ऐसे में स्थलीय भाग के उच्चवायुदाब से ठंडी हवाएं ठंडी एवं शुष्क हवाएं सागरीय निम्न वायुदाब की ओर प्रवाहित होती है इसे स्थलीय समीर कहा जाता है.

स्थलीय समीर

घाटी एवं पर्वतीय समीर


पर्वतीय क्षेत्रों में घाटी और पर्वत के अपेक्षाकृत उपरी भाग के मध्य दिन एवं रात के तापमान में अंतर के कारण घाटी एवं पर्वतीय समीर प्रवाहित होती है.

घाटी एवं पर्वतीय समीर

घाटी समीर

दिन के समय पर्वतों के उपरी भाग घाटी की तुलना में अधिक गर्म हो जाता है. ऐसे में घाटी में उच्च वायुदाब और पर्वतों के उपरी भाग में निम्न वायुदाब का विकास हो जाता है. अतः उच्च वायुदाब वाले घटी से, निम्न वायुदाब वाले पर्वतों की उपरी भाग की ओर वायु का प्रवाह होने लगता है. इसे घाटी समीर कहा जाता है.

 

घाटी समीर को एनाबेटिक समीर या उपर चढ़ने वाली पवन भी कहा जाता है. घाटी समीर के कारण पर्वतों के उपर बादल का निर्माण हो जाता है, जिससे थोड़ी वर्षा भी प्राप्त होती है.

पर्वतीय समीर

पर्वतीय क्षेत्रों में ही रात के समय तापीय दशाओ में परिवर्तन हो जाता है. पर्वतों के उपरी भाग तीव्र विकिरण के कारण ठंडे हो जाते है और उच्च वायुदाब का विकास होता है. ऐसे में तुलनात्मक रूप से घाटी की तली में या निचले भाग में निम्न वायुदाब का विकास होता है. अतः हवाएं पर्वतों के उपरी भाग से घाटी की ओर उतरनी लगती है. इसे पर्वतीय समीर कहा जाता है.

पर्वतीय समीर को केटाबेटिक समीर या नीचे उतरने वाली पवन भी कहा जाता है. पर्वतीय समीर ठंडी एवं शुष्क होती है. प्रातः काल तक ठंडी पर्वतीय समीर के घाटी में बंद हो जाने के कारण घाटी के तापमान में अधिक कमी आ जाती है और यहाँ पाला की दशा विकसित हो जाती है. यह दशा मानव जनसँख्या एवं कृषि के लिए प्रतिकूल दशाएं उत्पन्न करती है.

लेकिन उतरती हुई पवन में संपीडन के कारण घाटी के मध्यववर्ती ढाल के पास वायु के तापमान में थोरी वृद्धि हो जाती है, जो मानव अधिवास के साथ ही फलों की कृषि और बागानी फसलों के लिए अनुकूल होती है.

Hey, हमें आशा है की इस पोस्ट को पढ़कर आप दैनिक पवनें – (क.) समुद्री एवं स्थलीय समीर (ख.) घाटी एवं पर्वतीय समीर को जान पायें होंगें. अगर इसे समझने में कोई कठिनाई हो या इससे संबंधित कोई प्रश्न या सुझाव हो तो नीचे कमेन्ट करे या हमारे अबाउट अस के माध्यम से सम्पर्क करें. इस आर्टिकल को पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद. अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर जरुर करें.

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