पवन या हवा कितने प्रकार के होते है, हिंदी में पूरी जानकारी

ठहरी हुई वायु (air) को हवा तथा गतिमान वायु को पवन (wind) कहा जाता है, लेकिन सामान्यतः दोनों को एक ही माना जाता है. हम भी इस पोस्ट में दोनों को एक ही चीज मानकर पवनों के प्रकार या हवाओं के प्रकार पर बात करेंगें. हम देखेंगें की पवन या हवा कितने प्रकार के होते है. हम स्थायी पवनें अर्थात व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें और ध्रुवीय पवनों के आलावा दैनिक, स्थानीय, मौसमी पवनों और जेट वायुधारा की भी बात करेंगें. Types of winds in hindi. Or pawnon ke prakar hindi me.

पवनों के प्रकार

अगर आप जानना चाहते है की स्थायी पवनें क्या है? व्यापारिक पवनें क्या है? पछुआ पवनें क्या है? ध्रुवीय पवनें क्या है? दैनिक एवं स्थानीय पवनें क्या है? मौसमी पवनें क्या है? विषुवतीय पछुआ पवन क्या है? जेट वायुधारा क्या है? तो इस पोस्ट को जरुर पढ़ें. इस पोस्ट में आप पवनों के प्रकार के आलावा और भी बहुत सी बातों को जैसे की पवनों की उत्पत्ति, दिशा, मार्ग, विचलन, प्रभाव आदि की भी जानकारी पाएंगें.

पवनों को समझने के लिए पृथ्वी की वायुदाब पेटी को समझना आवश्यक है. पृथ्वी तल पर वायु के पड़ने वाले दबाब या भार को वायुदाब (Air pressure) कहते है. यह उच्चवायुदाब HP और निम्न वायुदाब LP के रूप में होती है. जहाँ वायु नीचे बैठती है उसे उच्चवायुदाब HP क्षेत्र और जहाँ उपर उठती है उसे निम्नवायुदाब LP क्षेत्र कहा जाता है. उच्चवायुदाब और निम्नवायुदाब से एक ढाल (slopping) का विकास होता है, जिसके सहारे वायु का क्षैतिज प्रवाह होने लगता है. इससे पवन की उत्पत्ति होती है. वायुदाब को बेहतर समझने के लिए वायुदाब की समझ और पृथ्वी की वायुदाब पेटी पोस्ट को पढ़ें. इसे पढने के बाद आप पवन के प्रकार को अच्छे से समझ पाएंगें.

पवनों के प्रकार – Types of Wind in hindi


pawnon ke prakar hindi me. पृथ्वी तल पर विभिन्न प्रकार की पवन संचार प्रणाली पाई जाती है. इनका विकास वायुदाब एवं तापमान की विशिष्ट दशाओं में ताप एवं दाब प्रवणता के कारण होती है. इन पवनों को मुख्य तौर तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है. (क.) स्थायी पवनें (Permanent wind) (ख.) दैनिक एवं मौसमी पवनें (Daily and seasonal wind) (ग.) स्थानीय पवनें (Local wind). पृथ्वी की विभिन्न पवनें इन्हीं तीन केटेगरी के अंतर्गत आती है. इसके अलावे क्षोभमंडल में ऊंचाई पर तीव्र वेग वाली जेट वायुधारा (Jet stream) को भी पवन के अंतर्गत अध्ययन किया जा सकता है.

स्थायी पवनें – Permanent wind


स्थायी पवनें आधारभूत और व्यापक पवन संचार प्रणाली है इन्हें वायुमंडल का प्राथमिक परिसंचरण कहा जाता है.  प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न वायुमंडलीय हलचलें या परिघटना स्थायी पवन से संबंधित है. स्थायी पवनों को प्रचलित पवनें (popular wind) भी कहा जाता है.

स्थायी पवन क्षैतिज पवन प्रवाह प्रणाली है. इसका विकास स्थायी वायुदाब पेटियों के मध्य उच्चवायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर विकसित बैरोमिट्रिक ढाल के सहारे होती है. स्थायी पवनें पृथ्वी की घूर्णन के प्रभाव में आकर अपने मूल मार्ग से विक्षेपित हो जाते है यही कारण है की यह उत्तरी गोलार्ध में दायी ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बायी ओर मुड़ जाती है. इसे निम्न चित्र के माध्यम से समझा जा सकता है. आगे के जानकारियों को पढ़ते चित्र को और भी अच्छे से समझा जा सकता है.

पवनों के प्रकार

स्थायी पवनों के प्रकार – Types of Permanent wind


प्रचलित या स्थायी पवनें वैश्विक पवनें है. यह आदर्श रूप में पुरे पृथ्वी तल पर प्रवाहित होती रहती है. इन्हें भी तीन प्रकार में बांटा जाता है. व्यापारिक पवन ( Merchant wind या Trade wind), पछुआ पवन (Western wind) और ध्रुवीय पवन (Polar wind). आइये इनके बारे में एक-एक कर विस्तार से समझते है.

व्यापारिक पवन – Merchant wind or Trade wind


Merchant wind उपोष्ण उच्चवायुदाब पेटी से विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी ओर प्रवाहित होती है. इसकी दिशा उत्तरी गोलार्ध में उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम की ओर और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम की ओर होती है. यही कारण है की व्यापारिक पवनें उत्तरी गोलार्ध में उत्तर पूर्वी व्यापारिक पवनें (North east merchant wind) और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण पूर्वी व्यापारिक पवनें (South east merchant wind) कहलाती है.

व्यापारिक पवनें उष्णकटिबंधीय महाद्वीपों में पूर्वी तटीय भाग पर वर्षा का प्रमुख माध्यम है, लेकिन पश्चिम की ओर यह क्रमशः शुष्क हो जाती है. व्यापारिक पवनें के अभिशरण से विषुवतीय प्रदेश में विषुवतीय पछुआ पवन (Equatorial western wind) का विकास होता है. विषुवतीय पछुआ पवन के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

व्यापारिक पवनों के अभिशरण से ही अतः उष्णकटिबंधीय अभिशरण क्षेत्र (ITCZ) का विकास होता है. यह एक गर्म क्षेत्र है जो विषुवतीय पेटी से बाहर अयनवृत्त (कर्क-मकर रेखा) के मध्य होता है. इन्हीं क्षेत्रों में निम्न वायुदाब के कारण उष्णकटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति होती है.

पछुआ पवन – Western wind


Western wind एक गर्म पवन है. यह उपोष्ण उच्चवायुदाब से उपध्रुवीय निम्नवायुदाब की ओर प्रवाहित होती है. पछुआ पवनें व्यापारिक पवनों की विपरीत दिशा में प्रवाहित होती है. उत्तरी गोलार्द्ध में इसकी दिशा दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व होती है. इसीलिए उत्तरी गोलार्द्ध में इसे दक्षिण पश्चिम पछुआ पवन और दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर पश्चिम पछुआ पवन कहते है.

पछुआ पवन के कारण शीतोष्णकटिबंधीय महाद्वीपों के पश्चिमी तटीय भागों पर पर्याप्त वर्षा होती है. दक्षिणी गोलार्द्ध में सागरीय भागों की अधिकता के कारण उत्तरी गोलार्द्ध की तुलना में दक्षिणी गोलार्ध में इसकी गति में अधिक वृद्धि हो जाती है. इसीलिए दक्षिणी गोलार्द्ध में पछुआ पवनों को 40° अक्षांस के पास गरजती चालीसा (Roaring Forties), 50° अक्षांस के पास भयंकर पचासा (Furious Fifties) और 60° अक्षांस के पास चीखती साठा (Shrieking Sixties) कहते है.

ध्रुवीय पवन – Polar wind


Polar wind एक ठंडी पवन है. यह ध्रुवीय उच्चवायुदाब से उत्पन्न होती है. ध्रुवीय पवनें व्यापारिक पवनों की दिशा का अनुशरण करती है. यह उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है. ध्रुवीय पवनों से महाद्वीपों के पूर्वी तटीय भाग पर थोरी वर्षा प्राप्त हो जाती है.

जब ध्रुवीय पवन उपध्रुवीय प्रदेश में गर्म पछुआ पवनों के सम्पर्क में आता है तब ध्रुवीय वाताग्र का विकास होता है. इसी वताग्र के सहारे शोतोष्ण चक्रवात की उत्पत्ति होती है. शीतोष्ण चक्रवात एक द्वितीय परिसंचरण प्रणाली है और यह शीतोष्ण कतिबंधो के जलवायु और मौसमी दशाओं को व्यापकता से निर्धारित करता है.

स्पष्ट है की स्थायी पवनें व्यापक प्रभाव उत्पन्न करती है. इनसे ही त्रिकोशीय पवन संचार प्रणाली का विकास होता है, जो की पुरे विश्व की जलवायु और मौसमी दशाओं को निर्धारित करती है. त्रिकोशीय परिसंचरण प्रणाली के बारे में पढने के लिए त्रिकोशिय परिसंचरण प्रणाली पर क्लिक करें.

स्थायी पवनों की पेटियों में सूर्य की उत्तरायण एवं दक्षिणायन होने के साथ क्रमशः उत्तर एवं दक्षिण की ओर स्थानातरण होता है, साथ ही इसमें महासागरीय एवं महाद्वीपीय क्षेत्रों एवं उच्चावच कारकों का प्रभाव भी उत्पन्न होता है. इसके कारण मौसमी पवन (Seasonal wind) तथा दैनिक एवं स्थानीय पवन (Daily and Local wind) संचार प्रणाली का विकास होता है.

मौसमी पवन एवं दैनिक पवन Seasonal wind & Daily wind


मौसमी पवन मौसम विशेष में उत्पन्न होने वाली पवन है. यह मौसमी प्रभाव उत्पन्न करते है और मौसम परिवर्तन के साथ समाप्त भी हो जाते है. मौसमी पवनों का क्षेत्र अधिक व्यापक नहीं होता है. यह मुख्यतः दिन एवं रात के तापमान में अंतर के कारण उत्पन्न होती है. दैनिक पवनों को इस श्रेणी में रखा जा सकता है क्योंकि दैनिक पवनों की उत्पत्ति दिन एवं रात में मौसमी परिवर्तन के कारण होती है.

मानसून पवन को को भी एक मौसमी पवन माना जाता है. भारतीय मानसून में दक्षिण पश्चिम मानसून की उत्पत्ति ग्रीष्मकालीन तापीय दशाओं में और उत्तर पश्चिम मानसून की उत्पत्ति शीतकालीन तापीय दशाओं में होती है. लेकिन वास्तविक अर्थ में मानसून एक ऋत्विक पवन है. इसकी उत्पत्ति सूर्य के उत्तरायण एवं दक्षिणायन के साथ तापीय दशाओं में परिवर्तन और विशेषकर पूर्वी जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति के कारण होती है. दक्षिण पश्चिम मानसून लगभग सम्पूर्ण भारत को प्रभावित करती है. ऐसे में मानसूनी पवनों को सामान्य मौसमी पवन नहीं कहा जा सकता.

वास्तविक अर्थ में दैनिक पवनों का अध्ययन ही मौसमी पवनों के अंतर्गत किया जाना चाहिए. दैनिक पवनें दो प्रकार की होती है. (क.) समुद्री एवं स्थलीय समीर (Sea breezes and Land Breezes) (ख.) घाटी एवं पर्वतीय समीर (Valley breeze and Mountain breeze)

समुद्री एवं स्थलीय समीर क्रमशः दिन एवं रात में समुद्र तटीय क्षेत्रों में प्रवाहित होते है. जबकि घाटी एवं पर्वतीय समीर पर्वतीय क्षेत्रों में घाटी और पर्वत के अपेक्षाकृत ऊपरी भाग के मध्य दिन एवं रात के तापमान में अंतर के कारण बहती है. इनके बारे में जानने के लिए समुद्री एवं स्थलीय समीर तथा घाटी एवं पर्वतीय समीर पर क्लिक करें. 

स्थानीय पवन – Local wind


Local wind वायुमंडल के विशिष्ट परिसंचरण प्रणाली है. यह मुख्यतः स्थानीय स्तर पर तापमान एवं वायुदाब की विशिष्ट दशाओं के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है. कई विशिष्ट स्थानीय पवनें प्रत्यक्षतः वायुमंडल की द्वितीय परिसंचरण प्रणाली जैसे चक्रवात एवं प्रतिचक्रवात से संबंधित होती है इसी कारण इन्हें वायुमंडल का तृतीय परिसंचरण कहा जाता है.

चिनूक (chinook), फोन (Foehn), सिराको (Sirocco), बोरा, मिस्ट्रल, ब्लिजार्ड जैसी कई स्थानीय पवनें तृतीय परिसंचरण प्रणाली के रूप में उत्पन्न होती है. स्थानीय पवनें हालाँकि अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्रों में प्रभावी होते है लेकिन क्षेत्र विशेष के मौसम और जलवायु के ये प्रमुख निर्धारक तत्व होते है, इसी संदर्भ में स्थानीय पवनों का अध्ययन किया जाता है.

स्थानीय पवनों को उनकी प्रकृति के अनुसार गर्म एवं ठंडी पवन में विभाजित किया जाता है. गर्म पवनों में चिनूक, फोन, सिराको, हरमट्टान, लू आदि प्रमुख है. ठंडी पवनों में बोरा, मिस्ट्रल और ब्लिजार्ड प्रमुख है. इनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए स्थानीय पवन की हिंदी में पूरी जानकारी पर क्लिक करें.

पवनों के प्रकारों पर चर्चा के इस दौर में जेट वायुधारा का जिक्र किया जाना सही होगा. हालाँकि जेट वायुधारा (Jet stream) पवन के प्रकार में नहीं आता, लेकिन बहुत से लोग इसे लेकर काफी कन्फ्यूजन में रहते है. इसीलिए जेट वायुधारा के बारे में बात करना उचित होगा.

जेट वायुधारा – Jet stream


जेट वायुधारा पृथ्वी की निचली वायुमंडल में, क्षोभसीमा से थोडा नीचे और क्षोभमंडल के ऊपरी भाग में तीव्र वेग से प्रवाहित होती है. यह सर्पिलाकार वायुधारा होती है. इसकी सामान्य गति 340 से 380 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. इसके अक्ष पर न्यूनतम गति 30 मीटर प्रति सेकंड होती है.

संकरी पेटी में तीव्र वेग से प्रवाहित होने के कारण इसका सलग्न प्रदेश लगभग शांत प्रतीत होता है. तीव्र गति एवं तापीय प्रभाव के कारण यह क्षोभमंडलीय दशा को व्यापक रूप से प्रभावित करती है. जेट वायुधारा की उत्पत्ति का कारण उच्चक्षोभमण्डलीय दाब एवं ताप प्रवणता का पाया जाना है. इसका प्रत्यक्ष संबंध स्थायी पवनों द्वारा विकसित त्रिकोशिय परिसंचरण प्रणाली से है.

उत्पत्ति की प्रक्रिया एवं प्रकृति के आधार पर जेट स्ट्रीम मुख्यतः तीन प्रकार के होते है. (क.) ध्रुवीय जेट स्ट्रीम (Polar jet stream) (ख.) उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम  (ग.) उष्ण पूर्वी जेट स्ट्रीम. इनके बारे में सरल भाषा में विस्तारपूर्वक पढने के लिए जेटस्ट्रीम या जेटवायुधारा की हिंदी में पूरी जानकारी लिंक पर क्लिक करें.

इस तरह हमनें इस पोस्ट में पवनों के प्रकार की विस्तृत चर्चा की. अंत में हम कह सकते है की स्थायी पवनें एक आदर्श दशा है जो व्यापक प्रभाव उत्पन्न करती है लेकिन वास्तविक अर्थ में तापमान, वायुदाब, पवन संचार प्रणाली में अक्षांसीय, क्षेत्रीय एवं स्थानीय स्तर पर उत्पन्न विशिष्टता ही किसी भी जलवायु और मौसमी दशा का कारण होता है.


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