आर्द्रता तथा संघनन के रूप

वायुमंडल में स्थित जल के गैसीय या वाष्पीकृत रूप को आर्द्रता humidity कहते है. यह क्षेत्र विशेष में उपलब्ध जल के स्त्रोतों एवं तापीय दशाओं से निर्धारित होती है. इसे आर्द्रता सामर्थ्य, निरपेक्ष आर्द्रता और सापेक्षिक आर्द्रता के संबंध में समझा जाता है.

सापेक्षिक आर्द्रता

निश्चित तापमान एवं आयतन पर वायु में आर्द्रता धारण करने की एक अधिकतम क्षमता होती है. इसे आर्द्रता सामर्थ्य कहते है. वायु में उपस्थित आर्द्रता की मात्रा को निरपेक्ष आर्द्रता व्यक्त करता है. जब निरपेक्ष आर्द्रता और आर्द्रता सामर्थ्य एकसमान हो जाता है तब वायु संतृप्त हो जाती है. संघनन के लिए वायु का संतृप्त होना आवश्यक है.

वायु की आर्द्रता संबंधी दशाओं को सापेक्षिक आर्द्रता से व्यक्त किया जाता है. सापेक्षिक आर्द्रता, निरपेक्ष आर्द्रता और आर्द्रता सामर्थ्य का अनुपात है. इसे प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है.

% सापेक्षिक आर्द्रता = निरपेक्ष आर्द्रता / आर्द्रता सामर्थ्य * 100

 सापेक्षिक आर्द्रता 100% होने की स्थिति में ही वायु संतृप्त होती है. जिसमें संघनन की क्रिया के कारण ओस, पाला, कोहरा तथा बादल का निर्माण होता है. इन्हें संघनन का रूप (Forms of condensation) कहते है. वायु के संतृप्त होने के लिए आर्द्रता सामर्थ्य का निरपेक्ष आर्द्रता के समान होना आवश्यक है.

आर्द्रता सामर्थ्य तापमान से प्रत्यक्षतः निर्धारित होता है. तापमान की अधिकता में इसमें वृद्धि और न्यूनता में इसमें कमी आती है. इसी कारण कम तापमान की दशाओं में उपलब्ध आर्द्रता, आर्द्रता सामर्थ्य के बराबर हो जाता है. क्योंकि आर्द्रता सामर्थ्य में कमी आ जाती है. यही स्थिति संघनन की आदर्श दशा होती है.

शीतकाल में प्रातःकाल तक वायु के तापमान में कमी के कारण आर्द्रता सामर्थ्य में कमी आने से वायु संतृप्त हो जाती है. इससे जल की सूक्ष्म बूंदों का निर्माण होता है इसे ओस कहते है. शीतकाल में ही वायु के तापमान में अधिक कमी के कारण जब संघनन की क्रिया शुन्य डिग्री सेल्सियस या इससे कम तापमान पर होती है तब बर्फ के सूक्ष्म कणों का निर्माण होता है इसे पाला कहते है.

ओस और पाला के लिए संतृप्त वायु का सतह के सम्पर्क में आना आवश्यक है. सतह के सम्पर्क के निचली वायुमंडल में धुलकणों के उपर संघनन की क्रिया से कोहरे का विकास होता है. यह दृश्यता को निर्धारित करता है. कम घने कोहरे को कुहासा mist कहते है. अधिक घने कोहरे को Fog कहते है.

संघनन का सबसे व्यापक रूप बादल है. इसका निर्माण आर्द्र वायु के उर्ध्वाधर विस्थापन के कारण संघनन की प्रक्रिया द्वारा होता है. जब उपर उठती हुई आर्द्र वायु के तापमान में रुद्धोश्म प्रक्रिया द्वारा कमी आती है तब आर्द्रता सामर्थ्य निरपेक्ष आर्द्रता के समान हो जाता है और वायु के संतृप्त होने की स्थिति में जल या हिम के विशाल समूह का निर्माण होता है. इससे वर्षा होती है.

इस तरह कहा जा सकता है की आर्द्रता और संघनन आपस में अंतर्सबंधित क्रियाएँ है, जो की विशिष्ट मौसमी दशाओं को निर्धारित करती है.

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