जेट स्ट्रीम या जेट वायुधारा क्या है, यह कहाँ चलती है?

जेट स्ट्रीम पृथ्वी की निचली वायुमंडल में तीव्र वेग से प्रवाहित होती है. आप इस पोस्ट में इससे संबंधित विभिन्न बातें जैसे की जेट प्रवाह क्या होता है या जेट वायुधारा क्या है, यह कहां चलती है, विभिन्न जेट धाराएं – उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम, ध्रुवीय जेट धारा, उपोष्ण पछुआ जेट प्रवाह क्या है, इसके प्रभाव क्या है, के बारे मे विस्तार पूर्वक पढेंगें. जेट स्ट्रीम डेफिनेशन इन हिंदी. जेट स्ट्रीम इन इंडिया.

जेट स्ट्रीम - जेट वायुधारा

जेट स्ट्रीम या जेट वायुधारा क्या है


पृथ्वी की निचली वायुमंडल में, क्षोभसीमा से थोड़ा नीचे और क्षोभमंडल के उपरी भाग में तीव्र वेग वाली वायुधारा प्रवाहित होती है. इसे जेट स्ट्रीम या जेट वायुधारा या जेट धाराएं या जेट प्रवाह कहा जाता है. जेट धाराएं सर्पिलाकार रूप से प्रवाहित होती रहती है.

जेट स्ट्रीम की सामान्य गति 340 से 380 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है. इसके अक्ष पर इसकी न्यूनतम गति 30 मीटर प्रति सेकंड होती है. संकरी पेटी में तीव्र वेग से प्रवाहित होने के कारण जेट वायुधारा का सलंग्न प्रदेश शांत प्रतीत होता है. जेट प्रवाह क्षोभमंडलीय वायुमंडलीय दशा को व्यापक रूप से प्रभावित करती है. नीचे के चित्रों को देखें.

जेट स्ट्रीम - जेट वायुधारा

जेट वायुधारा की उत्पत्ति या विकास का कारण उच्चक्षोभमंडलीय दाब एवं ताप प्रवणता का पाया जाना है. इसका प्रत्यक्ष संबंध स्थायी पवनों द्वारा विकसित त्रिकोशिय वायुमंडलीय परिसंचरण प्रणाली से है.

जेट स्ट्रीम या जेट धाराओं के प्रकार


उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर जेट स्ट्रीम मुख्यतः तीन प्रकार के होते है – (क.) ध्रुवीय जेट स्ट्रीम, (ख.) उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम, (ग.) उष्ण पूर्वी जेट स्ट्रीम.

ध्रुवीय जेट स्ट्रीम – ध्रुवीय वायु प्रवाह


ध्रुवीय जेट वायु प्रवाह पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली एक ठंडी तीव्र वेग वाली वायुधारा है. इसकी उत्पत्ति ध्रुवीय वताग्र के उपर दोनों ओर के तापमान में अंतर के कारण उत्पन्न ताप प्रवणता के परिणामस्वरूप होती है,

ध्रुवीय वताग्र के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की ओर अधिक तापमान और ध्रुवीय क्षेत्र की ओर कम तापमान की स्थिति पाई जाती है. इसी के कारण तीव्र वेग वाली वायु प्रवाह का विकास होता है. इसकी दिशा कोरियालिस प्रभाव के कारण पूर्व की ओर हो जाती है.

ध्रुवीय जेट प्रवाह एक वैश्विक जेट वायुधारा है और यह वर्ष भर बनी रहती है, लेकिन शीतकाल में इसकी सक्रियता और विस्तार अधिक हो जाता है. ध्रुवीय जेट को बेहतर समझने के लिए नीचे के चित्र को देखें. ध्रुवीय जेट स्ट्रीम

ध्रुवीय जेट स्ट्रीम में रासबी तरंगें


ध्रुवीय जेट स्ट्रीम में इसके दोनों ओर स्थित क्रमशः ठंडी एवं गर्म वायु के दबाब से उत्पन्न लहरों को रासबी तरंगे कहते है. जब जेट वायुधारा पर एक ओर से उत्तरी ध्रुवीय ठंडी वायु और दूसरी ओर से उष्णकटिबंधीय गर्म वायु का दबाब होता है, तब ठंडी वायु गर्म क्षेत्र में और गर्म वायु ठंडे क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास करता है.

ध्रुवीय जेट स्ट्रीम में रासबी तरंगें

इस प्रकिया में ध्रुवीय वताग्र में लहरे उत्पन्न होने के साथ ही ध्रुवीय जेट वायु प्रवाह में भी लहरे उत्पन्न होती है. इससे तरंगों की स्थिति में और गहराई में भी क्रमशः परिवर्तन होता है और एक समय, ठंडी वायु द्वारा गर्म क्षेत्र और गर्म वायु द्वारा ठंडे क्षेत्र घेर लिए जाते है. इससे उच्च वायुमंडलीय या उच्च क्षोभमंडलीय चक्रवातीय एवं प्रतिचक्रवातीय दशा का विकास हो जाता है.

इसका स्पष्ट प्रभाव निचली वायुमंडल की चक्रवातीय एवं प्रतिचक्रवातीय दशाओं पर होता है. साथ ही क्षेत्र विशेष के मौसमी दशाओं को भी यह निर्धारित करता है.

उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम


उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम भी एक ठंडी तीव्र वेग वाली जेट वायुधारा है. यह पश्चिम से पूर्व की ओर सम्पूर्ण ग्लोब पर प्रवाहित होती है. शीतकाल में इसकी सक्रियता और विस्तार में वृद्धि हो जाती है. और यह 20° निचले अक्षांस तक प्रवाहित होने लगती है.

उपोष्ण पछुआ जेट वायुधारा की उत्पत्ति या विकास का कारण हेडली कोस तथा फेरल कोश के अभिशरण से इसके शीर्ष भाग में वायु के दबाब के कारण उत्पन्न दाब प्रवणता है. कोरियालिस बल के कारण इसकी दिशा पश्चिम से पूर्व हो जाती है. उपोष्ण पछुआ जेट स्ट्रीम भारत के मानसून की उत्पत्ति में सहायक होता है.

उष्णकटिबंधीय पूवी जेट स्ट्रीम


हम बात करने जा रहे है जेट स्ट्रीम इन इंडिया अथवा पूर्वी जेट प्रवाह की. उष्णकटिबंधीय पूवी जेट स्ट्रीम एक स्थानीय गर्म जेट वायुधारा है. इसकी उत्पत्ति ग्रीष्मकाल में मुख्यतः तिब्बत के पठार और सलंग्न पठारी एवं पहाड़ी क्षेत्र के गर्म होने और निम्न वायुदाब के विकास के कारण उपर उठने वाली गर्म वायु से होती है.

उष्णकटिबंधीय पूवी जेट स्ट्रीम

तिब्बत के पठार से उपर उठती गर्म वायु उत्तर एवं दक्षिण की ओर मुड़ जाती है. दक्षिण की ओर हिमालय को पार करने वाली हवाओं से उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट प्रवाह की उत्पत्ति होती है. क्षोभमंडलीय दशाओं के कारण इसकी दिशा सामान्यतः उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम होती है.

उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट प्रवाह भारतीय उपमहाद्वीप को सर्वाधिक प्रभावित करता है. अफ्रीका तक इसके प्रभाव का विस्तार हो जाता है. भारत के दक्षिण पश्चिम मानसून के उत्पत्ति में पूर्वी जेट प्रवाह का अहम रोल होता है.

मुल्यांकन

स्पष्ट है की जेट वायुधारा या जेट प्रवाह विशिष्ट वायु प्रवाह है, जो क्षोभमंडलीय दशाओं के साथ ही पृथ्वी की सतह के सम्पर्क में घटित होने वाली विभिन्न वायुमंडलीय परिघटनाओं को भी निर्धारित करती है.

Hey, आशा है की इस पोस्ट को पढ़कर आप जेट स्ट्रीम या जेट वायु प्रवाह को समझ पाए होंगे. अगर इसे समझने में किसी तरह की कठिनाई हो तो अथवा इससे संबंधित आपका कोई प्रश्न या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करें. आप हमसें हमारे कांटेक्ट अस के माध्यम से भी सम्पर्क कर सकते है. अगर आपको इस आर्टिकल की जानकरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरुर करें. इस आर्टिकल को पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

यह भी पढ़ें.

Leave a Reply

Your email address will not be published.