पृथ्वी की वायुदाब पेटियां

सूर्य एवं पृथ्वी की सापेक्षिक स्थिति में परिवर्तन, घुर्णन और क्षोभमंडलीय दशाओं के अनुरूप पृथ्वी की वायुदाब पेटियां विकसित होती है. वायुदाब से संबंधित बेसिक बातों की चर्चा हम पूर्व में कर चुके है.आप इस पोस्ट में वायुदाब के कटिबंधीय स्वरूप या अक्षांसीय स्वरूप – विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी, ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी, उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी और उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी के बारे में पढेंगें.

पृथ्वी की वायुदाब पेटियां

पृथ्वी की वायुदाब पेटियां


पृथ्वी तल पर वायुदाब का विकास अक्षांसो के समानांतर कटिबंधीय रूप में होता है, इसे वायुदाब पेटी कहते है. इसके लिए सूर्य एवं पृथ्वी की सापेक्षिक स्थिति में परिवर्तन, घुर्णन और क्षोभमंडलीय दशाएं उत्तरदायी होती है. विभिन्न वायुमंडलीय घटनाओं का आधारभूत कारक पृथ्वी की वायुदाब पेटियां की अक्षांसीय स्थिति की विकास की प्रक्रिया ही है

वायुदाब पेटियां की अक्षांसीय स्थिति को जल एवं स्थल का वितरण तथा स्थलाकृतिक कारण भी प्रभावित करते है. इससे वायुदाब पेटियां अक्षांसीय नहीं रह जाती है, इनमें आदर्श दशा से विचलन हो जाता है. इसी कारण वायुदाब क्षेत्रो का स्वरूप पुर्णतः अक्षांसीय न रहकर प्रादेशिक और स्थानीय हो जाता है. और प्रादेशिक और स्थानीय वायुमंडलीय परिघटनाएं विकसित होती है. वायुदाब पेटियों की अक्षांसीय स्थिति में विचलन तथा प्रभाव के बारे में विस्तार से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें.

वायुदाब पेटियों की उत्पत्ति


पृथ्वी की वायुदाब पेटियां

पृथ्वी की वायुदाब पेटियां को उत्पत्ति की प्रक्रिया के आधार पर दो भागों में विभाजित किया जाता है. (क.) तापीय वायुदाब पेटी (ख.) गत्यात्मक वायुदाब पेटी या गतिजनित वायुदाब पेटी

(क.) तापीय वायुदाब पेटी


तापीय वायुदाब पेटी की उत्पत्ति का प्रत्यक्ष कारण तापीय प्रभाव है. इसके तहत विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी और ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी का विकास हुआ है.

विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी


विषुवतीय प्रदेश में सूर्य की किरणें वर्ष भर लम्बवत होती है. इससे तापमान में वृद्धि के कारण हवाएं गर्म एवं हल्की होकर ऊपर उठती है इससे इस क्षेत्र में निम्न वायुदाब (LP) का विकास होता है. फलस्वरूप विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी की उत्पत्ति होती है.

ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी


ध्रुवीय प्रदेश में वर्ष भर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है. इससे तापमान में कमी के कारण हवाएं ठंडी और भारी होकर नीचे बैठती है, इसके कारण इस क्षेत्र में उच्च वायुदाब (HP) का विकास होता है. फलस्वरूप ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी का विकास होता है.

(ख.) गत्यात्मक वायुदाब पेटी या गतिजनित वायुदाब पेटी

गत्यात्मक वायुदाब पेटी की उत्पत्ति का कारण प्रत्यक्षतः तापमान न होकर गतिजनित है. इसके तहत उपोष्ण प्रदेश में उच्च वायुदाब की पेटी और उपध्रुवीय प्रदेश में निम्न वायुदाब की पेटी का विकास होता है.

उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी


उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी का विकास क्षोभमंडलीय क्षैतिज वायु प्रवाह और वायु के अवतलन के कारण होता है. इसके विकास में विषुवतीय और उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी से ऊपर उठने वाली वायु का योगदान है, जो क्षोभसीमा के अवरोध के कारण क्षैतिज प्रवाहित होती है और क्रमशः ठंडी और भारी होकर उपोष्ण प्रदेश में अवतलन करती है.

उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी


उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी का विकास उपोष्ण उच्च वायुदाब और ध्रुवीय उच्च वायुदाब के मध्य होता है. इसके विकास का प्रमुख कारण पृथ्वी की घूर्णन गति से उत्पन्न कोरियालिस बल है. कोरियालिस बल वायु में विक्षेप (Deflection) के लिए उत्तरदायी होता है, जो विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ता जाता है.

हालाँकि ध्रुवों पर कोरियालिस बल सर्वाधिक होता है लेकिन यह ध्रुवों की ठंडी हवा को उठाने में सक्षम नहीं होता. लेकिन तुलनात्मक रूप से उपध्रुवीय प्रदेश की थोड़ी हल्की हवाओं को ऊपर उठाने में सक्षम हो जाता है, इससे उपध्रुवीय प्रदेश में निम्न वायुदाब का विकास होता है.

उपध्रुवीय प्रदेश में ध्रुवीय ठंडी और उपोष्ण गर्म वायु के अभिशरण के कारण ठंडी हवाओं द्वारा गर्म वायु के ऊपर उठाने के कारण भी निम्न वायुदाब का विकास होता है. ऐसे भी, स्वाभाविक रूप से दो उच्चवायुदाब क्षेत्र के मध्य निम्न वायुदाब की स्थिति स्वाभाविक है. अतः उपोष्ण उच्चवायु दाब और ध्रुवीय उच्चवायुदाब के मध्य उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी का होना स्वाभाविक है.


उपर वर्णित चारों वायुदाब पेटियां – विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी, ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी, उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी और उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी एक आदर्श स्थिति है. इसमें विभिन्न कारणों से विचलन होता है तथा विचलन के परिणामस्वरूप अक्षांसीय के साथ-साथ प्रादेशिक एवं स्थानीय जलवायु विकसित होती है. इसमें विचलन तथा प्रभावों के बारे में पढने के लिए वायुदाब पेटियों में विचलन तथा प्रभाव पर क्लिक करें. 

आशा है की इस पोस्ट को पढकर आप पृथ्वी की वायुदाब पेटियां के कटिबंधीय स्वरूप या अक्षांसीय स्वरूप के बारे में जान पाए होंगें. अगर इसे समझने में किसी तरह की कठिनाई हो तो नीचे कमेंट करें या हमारे कांटेक्ट अस के माध्यम से सम्पर्क करें. अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे शेयर करें ताकि अन्य लोग भी इससे लाभ प्राप्त कर सकें. धन्यवाद.

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