वायुदाब

आप इस पोस्ट में वायुदाब air pressure से संबंधित चीजों जैसे निम्न वायुदाब low pressure, उच्च वायुदाब high pressure के आलावा इससे पवन की उत्पत्ति, वायुकोष air sac और समदाब रेखाओं के बारें में पढेंगें.

वायुदाब Air Pressure


पृथ्वी तल पर प्रति इकाई क्षेत्र पर वायु के पड़ने वाले भार को air pressure कहते है. पृथ्वी की औसत वायुदाब 1013.19 मिलिबार है. इसकी औसत दशा में विभिन्न भौतिक कारकों से अक्षांसीय, प्रादेशिक और स्थानीय स्तर पर परिवर्तन या विचलन की स्थिति पाई जाती है. इसी कारण इसमें सापेक्षिक अंतर पाया जाता है. इसी आधार पर इसका अध्ययन उच्च वायुदाब और निम्न वायुदाब के रूप में किया जाता है.

उच्च वायुदाब High Pressure


पृथ्वी तल पर तापीय या गत्यात्मक कारणों से वायु के अवतलन की स्थिति में उच्चवायुदाब (high pressure) का विकास होता है. अर्थात जब हवा नीचे बैठती है तो इसे उच्च वायुदाब कहा जाता है.

निम्न वायुदाब Low Pressure


पृथ्वी तल पर तापीय या गत्यात्मक कारणों से वायु के आरोहन की स्थिति में निम्नवायुदाब का विकास होता है. अर्थात जब हवा उपर उठती है तो उसे निम्न वायुदाब कहा जाता है.

वायुदाब से पवन की उत्पत्ति


अलग-अलग क्षेत्रो में वायु के नीचे बैठने और उपर उठने के कारण उच्चवायुदाब से निम्नवायुदाब की ओर एक ढाल का विकास होता है. इसे बैरोमिट्रिक ढाल कहते है. इसके कारण ही वायु का क्षैतिज प्रवाह उच्चवायुदाब से निम्नवायुदाब की ओर विकसित होती है और क्षैतिज पवनों की उत्पत्ति होती है.

वायुदाब की संकल्पना

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वायुकोष Air sac


पृथ्वी तल पर वायुदाब के क्षेत्रों के विकास के साथ ही पवन संचार प्रणाली की चक्रीय व्यवस्था विकसित होती है. इससे वायुकोष का विकास होता है. वायुकोष में वायु की चक्रीय व्यवस्था से ही विभिन्न मौसमी हलचलें निर्धारित होती है.

वायुकोष airsac

स्थानीय पवनें, मौसमी पवने तथा दैनिक एवं स्थानीय पवनों की उत्पत्ति air pressure संबंधी दशाओं के कारण होती है. चक्रवात, प्रतिचक्रवात जैसी वायुमंडलीय परिघटनाएं भी इसकी विशिष्ट दशाओं से ही संबंधित है.

समदाब रेखाएं


air pressure की स्थिति को समझने के लिए समदाब रेखाओं का प्रयोग किया जाता है. यह समान वायुदाब के स्थानों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा होती है. समदाब रेखाओं को समुद्रतल के संदर्भ में खींचा जाता है. समदाब रेखाएं के अध्ययन से विभिन्न क्षेत्रों में air pressure के अंतर की दशाओं को समझा जाता है.

जब किसी क्षेत्र के वायुदाब में कम दुरी पर परिवर्तन होता तब इसे पास-पास की समदाब रेखाओं से प्रदर्शित किया जाता है. यह तीव्र दाब प्रवणता को बताता है. वायु के तीव्र प्रवाह के लिए तीव्र दाब प्रवणता का होना आवश्यक है. यानी की और भी सरल शब्दों में कहें तो जब air pressure में शीघ्र-शीघ्र परिवर्तन होता है तो इससे तीव्र गति से पवन प्रवाहित होती है.

मंद ढाल प्रवणता को अधिक दूर-दूर स्थित समदाब रेखाओं से प्रदर्शित करते है. अर्थात यहाँ अधिक दुरी तक एक समान दाब होता है. इससे मंद ढाल होने के कारण तेज गति की पवन प्रवाहित नहीं होती.

समदाब रेखाएं

इस तरह कहा जा सकता है की एयरप्रेसर वायुमंडलीय दशा को निर्धारित करने वाला एक प्रमुख तत्व है. यह प्रत्यक्षतः वायुमंडलीय परिसंचरण को निधारित करती है.

Hey, मुझे आशा है की इस आर्टिकल को पढकर आप एयरप्रेसर और संबंधित चीजों को समझ पाए होंगें. अगर इसे समझने में किसी भी तरह की कठिनाई हो तो कमेंट करें या फिर हमारे कांटेक्ट अस के माध्यम से सम्पर्क करें. इस बारे में और जानकारी के लिए पृथ्वी की वायुदाब पेटियां पोस्ट को पढ़ें. हमारे आर्टिकल को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

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