वायुमंडलीय परिसंचरण क्या है और यह मौसम और जलवायु को कैसे प्रभावित करता है?

वायुमंडलीय परिसंचरण वायुमंडल में उत्पन्न विभिन्न प्रकार गतियाँ या विक्षोभ होती है, जो मौसम एवं जलवायु को निर्धारित एवं प्रभावित करती है. हम इस पोस्ट में समझेंगें की वायुमंडलीय परिसंचरण क्या है और यह मौसम और जलवायु को कैसे प्रभावित करता है? इसे समझने के दौरान ही हम मौसम और जलवायु क्या है को भी जानेंगे. Vayumandliya parisanchran ke sath hi mausam aur jalvayu ki hindi me puri jankari.

वायुमंडलीय परिसंचरण

अगर आप चाहते है की वायुमंडलीय परिसंचरण, मौसम एवं जलवायु से संबंधित निम्न तरह के प्रश्नों का उत्तर दे पायें तो इस आर्टिकल को carefully और पूरा पढ़ें.

  1. मौसम एवं जलवायु क्या है को बताते हुए, मौसम एवं जलवायु के अंतर्सबंध तथा इस अंतर्संबंध को निर्धारित करने वाले कारकों को भी बताएं.
  2. वायुमंडलीय परिसंचरण को समझाते हुए यह स्पष्ट करे की यह किस प्रकार मौसम एवं जलवायु को प्रभावित करता है.
  3. हालाँकि मौसम वायुमंडलीय दशाओं का स्थानीय प्रतिरूप है लेकिन जलवायविक दशाएं इसी से निर्धारित होती है. कैसे समझाएं.

इस आर्टिकल को पढने के बाद आप वायुमंडलीय परिसंचरण, मौसम एवं जलवायु से संबंधित उपरोक्त विभिन्न तरह के प्रश्नों के उत्तर सकने की स्थिति में होंगें. आइये अब चर्चा की शुरुआत करते है. यह भी पढ़ें- हमारा वायुमंडल किन चीजों से मिलकर बना है और यह कितनी दूर तक फैला है?

वायुमंडलीय दशाओं से तात्पर्य पृथ्वी की सतह और सम्पर्क के वायुमंडल में उत्पन्न होने वाले ऐसी घटनाओं या हलचलों से है जिसका संबंध मुख्यतः तापमान, वायुदाब और आर्द्रता से होती है. इन घटनाओं को ही वायुमंडलीय परिसंचरण कहा जाता है.

वास्तविक अर्थ में वायुमंडलीय परिसंचरण वायुमंडल में उत्पन्न विभिन्न तरह की गतियाँ या विक्षोभ होती है जो मौसमी एवं जलवायविक दशाओं को निर्धारित करती है. वायुमंडलीय दशाओं का अध्ययन मौसम एवं जलवायु के संदर्भ में किया जाता है.

मौसम और जलवायु


मौसम वायुमंडलीय दशा का अल्पकालिक एवं स्थानिक प्रतिरूप है, जो घंटे दिन, सप्ताह, महीने से निर्धारित होता है. मौसमी दशाओं में इसी कारण परिवर्तनशीलता पाई जाती है.

वायुमंडलीय दशाओं के दीर्घकालिक औसत से जलवायु का निर्धारण होता है. इसका स्वरूप स्थानिक एवं प्रादेशिक दोनों होता है. जलवायु का निर्धारण जलवायु वैज्ञानिकों द्वारा लगभग 30-31 वर्ष की औसत वायुमंडलीय दशा से की जाती है.

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मौसम-जलवायु अंतर्संबंध


यदि मौसमी दशाओं का दीर्घकालिक औसत निकाला जाये तब भी जलवायु का निर्धारण किया जा सकता है अतः मौसम और जलवायु पुर्णतः अंतर्सबंधित है. लेकिन जलवायु की औसत दशाओं में अधिक परिवर्तनशीलता नहीं पाई जाती है, जबकि मौसम एक परिवर्तनशील परिघटना है.

ऐसे में जलवायु का सामान्यतः एक स्थिर दशा के रूप में अध्ययन किया जाता है लेकिन यदि जलवायु के औसत दशाओं में जैसे औसत तापमान, औसत वायुदाब, औसत वर्षा की मात्रा में परिवर्तन होता है तब इसे जलवायु परिवर्तन कहते है.

वायुमंडलीय परिसंचरण क्या है

यदि जलवायु में परिवर्तन होता है तब इससे मौसमी परिवर्तन की स्थिति भी स्वीकार की जा सकती है. अर्थात मौसम में अत्यधिक परिवर्तन जलवायु परिवर्तन का संसूचक है. लेकिन मौसम स्वयं में एक परिवर्तनशील दशा है ऐसे में जलवायु परिवर्तन के संबंध में इसकी परिवर्तनशीलता को समझना एक चुनौती है.

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मौसम एक परिवर्तनशील तथ्य है लेकिन परिवर्तनशीलता का भी एक नियम और सीमा होती है, ऐसे में इन सीमाओं का टूटना और नियम का उलंघन यदि बार-बार घटित होती है तब यह संभावित जलवायु परिवर्तन का सूचक है. इन दशाओं में वायुमंडलीय परिसंचरण में भी परिवर्तनशीलता दिखाई देगी. इसके अध्ययन से भी जलवायु परिवर्तन की सम्भावना और सीमाओं को समझा जा सकता है. इस दिशा में वैज्ञानिक अनुसन्धान विशेष रूप से किया जा रहा है.

वायुमंडलीय परिसंचरण


पृथ्वी की सतह और वायुमंडल के सम्पर्क क्षेत्र में उत्पन्न विभिन्न वायुमंडलीय गतियों एवं विक्षोभों को वायुमंडलीय परिसंचरण कहते है. इसमें तापमान, वायुदाब एवं आर्द्रता की प्रभाव से उत्पन्न विभिन्न वायुमंडलीय दशाओं को रखा जाता है. इन दशाओं से ही मौसमी एवं जलवायविक दशाएं निर्धारित होती है. इसका स्वरूप स्थानिक या स्थानीय, प्रादेशिक या अक्षांसीय हो सकती है.

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वायुमंडलीय परिसंचरण प्रणाली


वायुमंडलीय परिसंचरण के अंतर्गत 3 प्रकार के परिसंचरण प्रणाली आते है-

  1. प्राथमिक परिसंचरण प्रणाली
  2. द्वितीयक परिसंचरण प्रणाली
  3. तृतीयक परिसंचरण प्रणाली

प्राथमिक परिसंचरण प्रणाली

वायुमंडलीय दशाओं में अक्षांसीय स्तर पर कटिबंध के रूप में विकसित वायुमंडलीय गतियों को जिसका पृथ्वी के व्यापक क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव होता है उसे प्राथमिक परिसंचरण प्रणाली कहा जाता है. जैसे – स्थायी पवने. व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें तथा ध्रुवीय पवन प्रणाली इसी वर्ग में आते है. प्राथमिक परिसंचरण प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रभाव मौसम एवं जलवायु पर होता है.

द्वितीयक परिसंचरण प्रणाली

जब प्राथमिक परिसंचरण प्रणाली में प्रादेशिक कारणों से विचलन या परिवर्तन होता है तब कई नवीन वायुमंडलीय गतियाँ उत्पन्न हो जाती है, इन्हें वायुमंडल का द्वितीयक परिसंचरण प्रणाली कहा जाता है. जैसे चक्रवात, प्रतिचक्रवात, मानसून, वायुराशी, वाताग्र आदि. द्वितीय परिसंचरण प्रणाली का व्यापक प्रादेशिक प्रभाव होता है, जिससे मौसमी एवं जलवायविक दशाएं निर्धारित होती है.

तृतीयक परिसंचरण प्रणाली

जब द्वितीय परिसंचरण प्रणाली स्थानीय कारकों के प्रभाव में आ जाती है तब उत्पन्न नवीन वायुमंडलीय गतियों को तृतीयक परिसंचरण प्रणाली कहते है. जैसे स्थानीय पवनें.

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वायुमंडलीय संचरण को निर्धारित करने वाले कारक


वायुमंडलीय संचरण को निर्धारित करने वाले कारक निम्नलिखित है. यही कारक मौसम एवं जलवायु को भी निर्धारित करते है.

  • खगोलीय कारक- सूर्य एवं पृथ्वी की सापेक्षिक स्थिति में परिवर्तन, घूर्णन गति, परिक्रमण गति, सूर्य का उत्तरायण और दक्षिणायन होना.
  • क्षोभमंडलीय या वायुमंडलीय कारक- क्षोभमंडल की तापीय विशेषताएं, वायु प्रवाह, वायुमंडल की पारदर्शिता.
  • जल एवं स्थल का वितरण- महासागरों एवं महाद्वीपों की स्थिति एवं प्रकृति.
  • स्थलाकृतिक कारक या उच्चावच कारक- पर्वत, पठार, मैदान, घाटी, मरुस्थल आदि.

उपरोक्त कारकों की अंतर्क्रिया के कारण ही विभिन्न वायुमंडलीय दशाएं, मौसमी एवं जलवायविक परिघटनाएं घटित होती है.

प्राथमिक परिसंचरण प्रणाली के लिए मुख्यतः खगोलीय एवं क्षोभमंडलीय कारक उत्तरदायी होते है. तुलनात्मक रूप से ये कारक स्थायी प्रभाव वाले होते है इसी कारण से प्राथमिक अक्षांसीय पवनों को स्थायी पवन कहा जाता है.

प्राथमिक परिसंचरण प्रणाली में जल एवं स्थल के वितरण में विषमता और इसकी भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन के कारण प्रादेशिक स्तर पर द्वितीय परिसंचरण प्रणाली का विकास होता है. जैसे जलीय भाग पर गर्म पवनों के अभिशरण से उष्ण चक्रवातों की और जलीय भाग पर ध्रुवीय ठंडी और पछुआ गर्म पवनों के अभिशरण से शीतोष्ण चक्रवात की उत्पत्ति होती है.

शीतोष्ण चक्रवात जब पर्वतीय क्षेत्र से टकराती है तब चिनूक एवं फ़ोन जैसी स्थानीय पवनों की उत्पत्ति होती है. अर्थात स्थलाकृतिक कारक स्थानीय स्तर पर तृतीय परिसंचरण प्रणाली को विकसित करने में सहयोग करता है.  इससे पता चलता है की विभिन्न वायुमंडलीय परिघटनाएं क्रमिक विकास की प्रक्रिया से उत्पन्न होती है.

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Hey, आशा है की इस आर्टिकल को पढने के बाद आप वायुमंडलीय परिसंचरण के बारे में जानने के साथ ही मौसम एवं जलवायु के अंतर्संबंध को भी जान पाए होंगें. अगर आपका इससे संबंधित कोई प्रश्न, सुझाव या सलाह हो तो कमेंट करे या हमारे कांटेक्ट अस के माध्यम से सम्पर्क करें. अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरुर करें. इस आर्टिकल को पढने और इस साईट पर विजित करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद,

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