पृथ्वी की भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के स्त्रोत

भूकम्प में धरती क्यों हिलती है, या ज्वालामुखी कैसे निकलती है, या हम पृथ्वी से कैसे चिपके रहते है, इस तरह के प्रश्न का उत्तर, पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी प्राप्त होने के पहले, दे पाना कठिन था. वैज्ञानिकों ने क्रमिक रूप से विभिन्न स्त्रोतों को आधार बना पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी हासिल किया. इन्हें पृथ्वी की भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के स्त्रोत कहते है. हम यहाँ इन्हीं विभिन्न स्त्रोतों के बारे में जानेंगें.  [यह भी पढ़े-प्लेट विवर्तनिकी]

पृथ्वी की भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के स्त्रोत

भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के स्त्रोत


पृथ्वी की त्रिज्या 6371 किलोमीटर है. अर्थात हमें पृथ्वी के केंद्र तक पहुँचने के लिए 6371 किलोमीटर की दुरी तय करनी होगी. लेकिन पृथ्वी की आंतरिक परिस्थिति के कारण यहाँ तक पहुंचना संभव नहीं है. अभी तक अधिकतम 12 किलोमीटर तक की गहराई तक ड्रिल (आर्कटिक महासागर में) किया जा सका है. इससे भी अत्यंत सीमित जानकारी प्राप्त हुई है. यही कारण है की भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के लिए विभिन्न स्त्रोतों को अपनाया गया. इसे दो प्रकार में बांटा जा सकता है- 1. प्रत्यक्ष स्त्रोत, 2. अप्रत्यक्ष स्त्रोत     [यह भी पढ़ें- विश्व के ताप कटिबंध]

प्रत्यक्ष स्त्रोत


भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के प्रत्यक्ष स्त्रोत (Direct source) के अंतर्गत हम उन चीजों को रखते है जिनके द्वारा हमें प्रत्यक्ष तौर पर पृथ्वी की आंतरिक संरचना की प्राप्त होती है. जैसे खनन से प्राप्त चट्टानें, ज्वालामुखी आदि. हालाँकि इनसे हमें सीमित मात्रा में ही आंतरिक सरंचना की जानकारी प्राप्त हो पाती है.

खनन द्वारा प्राप्त चट्टानों से हमें जानकारी प्राप्त तो हुई है लेकिन इसकी सबसे बड़ी सीमा है की यह धरातलीय चट्टाने होती है, जो की अधिकतम 12 किलोमीटर गहराई से प्राप्त की गई है. पृथ्वी की भूगर्भ में गहराई बढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होती है इसीलिए प्रत्यक्षतः अधिक गहराई में जाना संभव नहीं है. हालाँकि वैज्ञानिक विभिन्न परियोजना (मुख्य रूप से दो -1. गहरे समुद्र में प्रवेधन योजना – Deep ocean drilling project 2. समन्वित महासागरीय प्रवेधन योजना – Integrated ocean drilling project) के अंतर्गत पृथ्वी की आंतरिक स्थिति को जानने के लिए पर्पटी में गहराई तक छानबीन कर रहे है.

ज्वालामुखी क्रिया भी भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के स्त्रोत है. लावा के अन्वेषण-विश्लेषण से वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करते है. यद्यपि इसकी भी कई सीमाएं है जैसे की यह निश्चय कर पाना कठिन होता है की मैग्मा कितनी गहराई से निकला है. [यह भी पढ़ें- संवहनिक ऊर्जा तरंग सिद्धांत]

अप्रत्यक्ष स्त्रोत


भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के अप्रत्यक्ष स्त्रोत (indirect source) के अंतर्गत निम्न को रखा जा सकता है-

1. पदार्थो के गुण धर्म का विश्लेषण- इससे हमें पृथ्वी के आंतरिक भागों की अप्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त होती है. खनन क्रिया से हमें पता चलता है की भूगर्भ में गहराई बढ़ने के साथ-साथ तापमान और घनत्व में वृद्धि होती है. इससे  तापमान, घनत्व, दबाब में परिवर्तन के दर को मापा जा सका.

इसके माध्यम से यह अनुमान लगाया जा सका की गहराई में 1°C प्रति मीटर के तापमान में वृद्धि होती है. पृथ्वी की कुल मोटाई को ध्यान में रखते हुए, वैज्ञानिकों ने विभिन्न गहराइयों पर पदार्थ के तापमान, दबाब एवं घनत्व के मान को अनुमानित किया. [यह भी पढ़ें-पवन के प्रकार]

2. उल्का पिंड- उल्का पिंड का अध्ययन पृथ्वी की आंतरिक जानकारी के लिए महत्वपूर्ण स्त्रोत के रूप में किया जाता है. यह कभी-कभी धरती तक पहुँचती है. हालाँकि उल्काओं के विश्लेषण के लिए उपलब्ध पदार्थ पृथ्वी के आंतरिक भाग से नहीं प्राप्त होते, तथापि उल्का पिंड की संरचना एवं पदार्थ पृथ्वी से मिलती जुलती है. इसी सन्दर्भ में उल्का पिंड को पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी का स्त्रोत माना जाता है. [यह भी पढ़ें- आर्द्रता तथा संघनन]

3. गुरुत्वाकर्षण- इससे भी पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में अनुमान लगाया जा सका. पृथ्वी के विभिन्न अक्षांसो पर गुरुत्वाकर्षण बल एकसमान नही होता है. जहाँ ध्रुवों पर गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होता है वहीँ भूमध्य रेखा की ओर कम होता जाता है तथा भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है. गुरुत्व का मान पदार्थो के द्रव्यमान के अनुसार भी बदलता है. पृथ्वी के भीतर पदार्थो का असमान वितरण भी इस भिन्नता को प्रभावित करता है.

अलग -अलग स्थानों पर गुरुत्वाकर्षण की भिन्नता अनेक अन्य कारणों से प्रभावित होती है. इस भिन्नता को गुरुत्व विसंगति (gravity anomaly) कहा जाता है. यह हमें भूपर्पटी में पदार्थ के द्रव्यमान के वितरण की जानकारी देती है. [यह भी पढ़ें- वायुमंडल के गर्म होने की प्रक्रिया]

4. चुम्बकीय क्षेत्र – चुम्बकीय सर्वेक्षण भी भूपर्पटी में चुम्बकीय पदार्थ के वितरण की जानकारी देते है.

5. भूकम्प – भूकम्प एवं भूकम्पीय गतिविधियाँ पृथ्वी की भूगर्भिक जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है. इससे हमें भूगर्भ की अपेक्षाकृत सर्वाधिक जानकारी प्राप्त हुई है. इस पर विस्तृत चर्चा हम ‘भूकम्पीय तरंगों से पृथ्वी की आंतरिक सरंचना की जानकारी कैसे मिलती है’ पोस्ट में कर चुके है. इसे यहाँ क्लिक कर पढ़ा जा सकता है.


Hey, I hope इस पोस्ट को पढने के बाद आप पृथ्वी की भूगर्भिक सरंचना के जानकारी के स्त्रोत को समझ पाए होंगें. अगर इसे समझने में किसी तरह की कठिनाई हो तो कमेंट करें अन्यथा कांटेक्ट अस के माध्यम से सम्पर्क करें. यह जानकारी आपको कैसी लगी, आप हमें जरुर बताएं. हमारे पोस्ट पढने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.  [यह भी पढ़ें- भू आकृति भूगोल से संबंधित पोस्ट  और जलवायु भूगोल से संबंधित पोस्ट ]

 

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