पृथ्वी की आंतरिक संरचना की सामान्य जानकारी

भूगोल के अध्ययन से पूर्व मेरा अनुमान था की ‘पृथ्वी एक खोखली गेंद की तरह है और हम इसके अंदर रहते है’. लेकिन भूगोल के अध्ययन से यह ज्ञात हुआ की ‘यह एक ठोस गेंद की तरह है और हम इसके बाहर चिपके हुए अवस्था में है’ अब प्रश्न उठता है की इसके अंदर क्या है और सतह पर घटित घटनाओं में इसके आंतरिक संरचना का क्या रोल है, तो इसका उत्तर है की भूपटल की समस्त क्रियाएँ इसके आंतरिक संरचना से ही निर्धारित होती है. हम इस पोस्ट में पृथ्वी के भूगर्भिक संरचना की विशेषताएँ या पृथ्वी की आंतरिक संरचना की सामान्य जानकारी के बारे में बात करेंगें. [यह भी पढ़ें-भूगर्भिक संरचना के जानकारी के स्त्रोत]

पृथ्वी के भूगर्भिक संरचना की विशेषताएँ

 पृथ्वी के भूगर्भिक संरचना की विशेषताएँ


Characteristics of Earth’s Geologic Structure. पृथ्वी के भूगर्भिक संरचना की विशेषताएँ की सामान्य जानकारी भूभौतिकी के सिद्धांतो और भूकम्पीय तरंगों के अध्ययन (सिस्मोग्रफिक अध्ययन) के आधार पर प्राप्त हुई. इस आधार पर पृथ्वी को सतह से केंद्र तक विभिन्न संरचनात्मक परतों (layer) में विभाजित किया जाता है. इसका आधार पदार्थो के घनत्व एवं अवस्था में परिवर्तन है. [यह भी पढ़ें-दैनिक पवनें]

भूगर्भ के मुख्य परत


पृथ्वी को सतह से केंद्र तक 3 मुख्य परतों में विभाजित किया जाता है- भूपटल (The crust), मेंटल (The Mantle) तथा कोर (The Core). भूपटल एवं मेंटल को मोहो असंबद्धता तथा मेंटल एवं कोर को गुटेनबर्ग असंबद्धता पृथक करती है. [यह भी पढ़ें- वायुदाब पेटियां]

भूपटल (The Crust)


  • भूपटल औसत 33 किलोमीटर की मोटाई की ठोस परत है.
  • भूपटल को उपरी एवं निचली भूपटल में विभाजित किया जाता है. दोनों के मध्य कोनार्ड असंबद्धता स्थित है.
    • उपरी भूपटल मुख्यतः सिलिका, एल्युमिनियम और ग्रेनाईट प्रधान संरचना की है, इससे महाद्वीपीय भूपटल के उपरी भाग का निर्माण हुआ है.
    • निचली भूपटल की संरचना में सिलिका, मैग्नीशियम और बैसाल्ट की प्रधानता है, इससे मुख्यतः महासागरीय भूपटल का निर्माण हुआ है. महाद्वीपीय भूपटल के निचले भाग में यह संरचना पाई जाती है.
  • भूपटल का औसत घनत्व 2.8 gm/cm क्यूबिक है. उपरी भूपटल का औसत घनत्व 2.65 से 2.67 gm/cm क्यूबिक तथा निचली भूपटल का 2.95 से 2.97 gm/cm क्यूबिक है. [यह भी पढ़ें- चिनूक पवन]

मेंटल (The Mantle)


  • भूपटल के नीचे मोहो असंबद्धता से लगभग 2900 किलोमीटर की गहराई तक पृथ्वी की मध्यवर्ती परत मेंटल स्थित है.
  • इसमें मैग्नीशियम, लोहा और विभिन्न प्रकार की आग्नेय चट्टानों की प्रधानता है. इसका औसत घनत्व 4.5-5.5 gm/cm क्यूबिक है.
  • मेंटल को भी संरचनात्मक दृष्टि से उपरी मेंटल और निचली मेंटल में विभाजित किया जाता है.
    • उपरी मेंटल को दुर्बलमंडल और निचली मेंटल को मध्यमंडल कहते है.
    • उपरी मेंटल और निचली मेंटल को रेपेटी असंबद्धता विभाजित करती है.
    • उपरी मेंटल में लगभग 100-200 किलोमीटर की मध्य की परत अर्द्धतरल अवस्था में है, इसे प्लास्टिक दुर्बलमंडल कहते है. यहाँ भूकम्पीय तरंगों की गति में कमी आ जाती है. इस क्षेत्र से ही तापीय ऊर्जा तरंगों की उत्पत्ति होती है, जो भूगर्भिक क्रियाओं का मुख्य आधार है.
  • शेष मेंटल ठोस अवस्था में है. मेंटल का उपरी ठोस भाग और भूपटल संयुक्त रूप से औसत 100 किलोमीटर मोटी परत स्थलमंडल का निर्माण करती है. स्थलमंडल में ही प्लेटें स्थित है. [यह भी पढ़ें- विश्व की स्थानीय पवनें]

कोर (The Core)


  • मेंटल के नीचे पृथ्वी की केन्द्रीय परत कोर या क्रोड (अंतरतम परत) स्थित है. मेंटल और कोर को गुटेनबर्ग असम्बद्धता विभाजित करती है.
  • कोर का विस्तार गुटेनबर्ग असम्बद्धता से पृथ्वी के केंद्र (6371 km) तक है.
  • इसमें निकेल और लोहा की प्रधानता होती है और यह सर्वाधिक घनत्व की परत है.
  • क्रोड का औसत घनत्व 11-13 gm/cm क्यूबिक है.
  • कोर को बाह्य कोर और आंतरिक कोर में विभाजित किया जाता है. इसे लेहमेन असंबद्धता विभाजित करती है.
    • बाह्य कोर
      • यह तरल अवस्था में है.
      • यहाँ द्वितीयक भूकम्पीय तरंगे प्रवेश नहीं कर पाती है और प्राथमिक भूकम्पीय तरंगों की गति कम हो जाती है.
      • बाह्य कोर का विस्तार 5150 km तक है.
      • इसमें निकेल तथा लोहा तरल अवस्था में है, जिसमें पृथ्वी की घूर्णन के कारण गति उत्पन्न होने से विद्युत् चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति होती है. जो पृथ्वी में चुम्बकत्व विकसित करती है.
    • आंतरिक कोर
      • बाह्य कोर के नीचे आंतरिक कोर स्थित है.
      • अधिक घनत्व बढ़ जाने के कारण यह ठोस अवस्था में है.
      • इसका विस्तार पृथ्वी के केंद्र तक 6371 km तक है.

हमें अभी तक भूगर्भ के बारे में मुख्य रूप से इतनी ही जानकारी प्राप्त हो सकी है. पृथ्वी की भूगर्भिक संरचना एक जटिल संरचना है. इसे समझने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है, लेकिन भूगर्भिक क्रियाओं की व्याख्या के लिए और भूकम्प, सुनामी, ज्वालामुखी जैसे प्राकृतिक आपदा के आकलन एवं प्रबंधन के लिए विशेष अनुसन्धान की आवश्यकता है. [यह भी पढ़ें- वाताग्र]


Hey, I hope इस पोस्ट को पढ़कर आप पृथ्वी के भूगर्भिक संरचना की विशेषताएँ के बारे में जान पाए होंगें. अगर इसे समझने में किसी तरह की कठिनाई हो तो नीचे कमेंट करें अन्यथा कांटेक्ट अस के माध्यम से सम्पर्क करें. हमारे पोस्ट को पढने के लिए बहुत धन्यवाद.  [यह भी पढ़ें- भू आकृति भूगोल से संबंधित पोस्ट  और जलवायु भूगोल से संबंधित पोस्ट ]

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