‘सपने’ सच होते है या झूठ

क्या सोते समय देखा गया सपना (dream) वास्तविक दुनिया में सच होता है? बहुत से लोगो के मन में यह सवाल उठते रहे है. कुछ लोग का कहना है की उनके द्वारा देखा गया सपना अधिकतर सच होता है. वही कुछ लोग इसे सिर्फ दिमाग का खेल मानते है. लेकिन इन सबके बीच हमेशा से यह प्रश्न रहा है की ‘सपने’ सच होते है या झूठ. हम इस आर्टिकल में इसी प्रश्न के संबंध में चर्चा करेंगें.

सपना सच होते है या झूठ

मानव के लिए उसके द्वारा देखा गया सपना हमेशा से कौतुहल का विषय रहा है. यहाँ तक की हमारे ज्योतिष शास्त्र के ग्रन्थ ‘सपने’ में देखे गये विषय, परिस्थितियां, साध्य-साधन आदि के लिए सुभ और अशुभ का निर्धारण करते है. जैसे की सपने में जीवित सर्प (snake) को देखना शुभ है जबकि मृत सर्प को देखना अशुभ माना गया है. बहुत से लोग का कहना है की उनके जीवन में यह सही साबित हुई है.

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अगर अध्यात्म की एक शाखा की माने तो ‘सपना’ हमारे अचेतन मन द्वारा बुना गया ताना-बाना है. जब कोई इन्सान सो जाता है तो उसका चेतन मन निष्क्रिय हो जाता है और तब मनुष्य का अचेतन मन जाग्रत हो जाता है. वह अचेतन मन अपने अनुसार विचरण करता है, चिंतन-मनन करता है, अठखेलियाँ करता है. यही कारण है की किसी वास्तु या साधन-परिस्थिति को वास्तविक जीवन में न पा सकने पर सपने में हमें वैसी परिस्थितियां दिखाई देती है. अतएव अचेतन मन को भी अपने वश में और पवित्र रखने के लिए योग साधना का विधान बनाया गया है.

अध्यात्म की एक शाखा यह भी मानती है की साधक का स्वप्न निरर्थक नही होता है. अपने ध्यान, भक्ति और योग साधना के चलते उसका अचेतन मन चैतन्य और तेजवान, पवित्र हो जाता है, अतएव उसके द्वारा देखा गया सपना निरर्थक नही होता, बल्कि सार्थक होता है. किसी व्यक्ति के द्वारा देखा गया सपना कितना सच होगा यह उसके मानसिक निर्मलता पर निर्भर करता है. मानसिक निर्मलता साधना के द्वारा प्राप्त होती है. साधना का स्तर जितना अधिक होगा, सपने उतने ही सच होंगें. इसी संदर्भ में युग ऋषि ‘श्री राम शर्मा आचार्य’ ने ‘गायत्री महाविज्ञान’ में लिखा है की साधको के स्वप्न निरर्थक नही होते.

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उपर के बातो का यह अर्थ भी नही लगाया जा सकता है की सिर्फ वही लोग जो अधिक समय ध्यान, साधना में लीन रहते है, उनके सपने ही सच होते है. दरअसल साधना के एक नही, बल्कि अनंत प्रकार होते है. यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन के दायित्वों को पवित्रता से निभा रहा है तो उसकी साधना किसी धुनी रमाने वाले साधू-संतो से किसी भी प्रकार से कम नहीं कही जा सकती. उस व्यक्ति का अचेतन मन भी सही दिशा-निर्देश देगा.

सपना-tree

दुनिया में ऐसे ढेरों उदाहरण मिलेंगें, जहाँ एक आम इन्सान को घटित घटनाओं का आभास, सपनों के द्वारा, पूर्व में ही मिल गया था. आपके आस-पास भी ऐसे ढेरों उदाहरण भरे पड़े होंगें. जैसे मेरे एक करीबी (जो की कामकाजी व्यक्ति है) ने कुछ समय पहले मुझे उनपर घटित, एक रोमांचकारी घटना के बारे में बताया. मैं उसे उन्ही के शब्दों में आपके साथ शेयर करना चाहूँगा.

रोज की की तरह ही मैं उस दिन भी सुबह उठा, लेकिन आज अजीब सा डर सता रहा था. दरअसल रात को सपने में देखा था की किसी बात से क्रुद्ध होकर ब्रह्मदेव (indian god Brahma) ने मुझे श्राप देते हुए कहा की ‘तू कल मृत्यु को प्राप्त करेगा’ | मैं सपने में ही काफी डर गया, रोया, माफ़ी माँगा और जीवन रक्षा की प्रार्थना की. लेकिन ब्रह्मदेव के कुछ बोलने से पहले ही मेरी नींद खुल गई.

अब नींद जा चुकी थी. सपने में मिली श्राप की चिंता मुझे सताये जा रही थी, किसी भी काम में मन न लग रहा था, पता न आज का दिन कैसा गुजरेगा, गुजरेगा भी या नही, यही आखिरी दिन न बन जाये. मेरी जिम्मेदारियों का अब क्या होगा? इन बातों को लेकर मैं काफी चिंतित था.  

अभी हाल ही में मेरी नियुक्ति हुई थी, नई नौकरी, नई शहर और नये लोग मेरे डर को और बढ़ा रहे थे.मैंने तय किया की आज किसी से उलझना नही है और किसी तरह का जोखिम नही लेना है.

दोपहर में मुझे ऑफिस के एक आवश्यक काम से बाहर जाना ही पड़ा. मैं एक सहकर्मी को साथ लेकर बाइक से निकल पड़ा. हम सावधानी पूर्वक बैंक पहुंचे, वहां का काम खत्म किया, फिर बाजार से कुछ खरीदारी करने के बाद हम वापस ऑफिस लौटने लगे.

अब मैं सपने की बात को भूलाते हुए कुछ-कुछ निश्चिंत सा हो गया था. फिर भी मैं उस बात को पूरी तरह नहीं भुला पाया था. थोरी ही दूरी पर अचानक हमारा एक्सीडेंट हो गया. एक्सीडेंट काफी जबर्दस्त थी. मैं टक्कर से फेंके जाने के बाबजूद काफी दुरी तक घिसटता रहा, मेरे कपड़े फट गये लेकिन सहकर्मी को अधिक चोट का सामना नहीं करना पड़ा. भीड़ जुट गई थी लेकिन किसी ने भी मदद को हाथ न बढाया.

हम हिम्मत जुटा कर खुद ही उठे और बाइक को ठेलकर साइड किया. घटना स्थल से लेकर ऑफिस तक लोगों ने हमें खूब नसीहतें दिए की बाइक कैसे चलाना चाहिए. लेकिन जिस किसी ने भी बाइक की स्थिति को देखा वह आश्चर्य में था की हम जीवित कैसे बच गये.रात को सोते समय मैंने सोचा की ब्रह्मदेव ने शायद मेरी विनती सुनकर मेरी जिन्दगी बख्स दी. खैर मैं सही सलामत रहा.

इस तरह के कई उदाहरण आपने भी अपने आस-पास सुने होंगें, जिनमें व्यक्ति को अनिष्ट की संभवनाओं का संकेत हो जाता है. लेकिन ज्यादातर सपने का हमारे जीवन में कोई प्रभाव नहीं होता. वो बस हमारे दिमाग की चंचलता को प्रदर्शित करती है.

अंत में हम फिर से यह कहना चाहेंगें की यह व्यक्ति के साधना पर निर्भर करता है उसे किस तरह का सपना आयेगी और उसकी सार्थकता कितनी होगी. हमारे मनीषियों की माने तो सार्थक स्वप्न की स्थिति को योग-साधना के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है. बहुत से ऐसे साधारण और असाधारण लोग है जो यह दावा करते है की वह किसी नयी जगह पर अपने स्वप्न में पूर्व में ही जा चुके है. यह स्थिति सार्थक स्वप्न की एक छोटी सी दशा है.

आशा है की यह चिंतन आपको पसंद आया होगा. आप भी इसमें भागीदार हो सकते है. अपने विचार कमेंट के माध्यम से अथवा हमारे कांटेक्ट अस के माध्यम से शेयर करें. इस साईट को पढने के लिए आपका बहुत धन्यवाद.

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